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रविवार, 29 नवंबर 2015

यौन दुर्बलता: कारण और निवारण (Sexual weakness: Causes and Prevention) -1

हमारे युवा समाज में यूँ तो कई समस्याएँ मुहं फाड़े खड़ी हुए है पर इसमें प्रमुख समस्या ख़राब तंदुरुस्ती भी है। आपने भी सुना ही होगा -'पहला सुख निरोगी काया' लेकिन यह बड़े खेद की बात है की युवा वर्ग में निरोगी काया का टोटा पड़  गया है। प्राकृतिक नियमों के पालन का यानि उचित दिनचर्या पर अम्ल करने का और स्वास्थ्य एवं चरित्र की रक्षा करने का। इस मुद्दे की उपेक्षा करके कोई कितना भी इलाज करा ले, कितनी ही औषधियों का सेवन कर ले पर वह रोगमुक्त नही हो सकता। औषधि तभी असर करती है जब परहेज का पालन सख्ती से किया जाय।
शरीर में अधिक से अधिक आयु तक काम ऊर्जा बनी  रहे यह स्त्री-पुरुष दोनों के लिए आवश्यक है।  ऐसा तभी सम्भव है जब काम-ऊर्जा की फिजूलखर्ची न की जाए और इसे बनाये रखने के लिए या क्षतिपूर्ति के लिए वाजीकारक योगो एवं औषधियों का सेवन किया जाए। कमजोरी और बीमारी का एक प्रमुख कारण होता है शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति में कमी होना और यह होता है धातुक्षीणता के कारन।  हमारे शरीर में सात धातुएँ होती है - रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र। जब ये सातों धातुएँ पुष्ट और परिपूर्ण होती है तो एक आठवी धातु ओज पैदा होती है जो भौतिक रूप से शरीर में तो नही पाई जाती पर चेहरे पर अवश्य दिखाई देती है जिसे चेहरे की रौनक भी कहा जाता है। जब शरीर की धातुएँ क्षीण होगीं तो शरीर का ढांचा चरमरायेगा ही।  आज कल अधिकांश युवकों की दशा ऐसी ही है।
                       आजकल यौन व्याधियों से पीड़ित, दो प्रकार के रोगी ज्यादातर पाये जा रहें हैं।  एक तो यौन-दौर्बल्य यानि नपुंसकता से पीड़ित और दूसरे यौन रोग से पीड़ित। दोनों प्रकार के रोगियों के रोगी होने में गलत ढंग से यौन-क्रीड़ा करना और कामुक आचार-विचार करना हो मुख्य कारण है।किशोरावस्था से ही गलत संगति में पड़कर अप्राकृतिक कुकर्म करते रहने वाला नपुंसकता से पीड़ित न होगा तो क्या भीमसेन पहलवान जैसा होगा। 
 हमें ऐसी समस्यायों से प्रेरित रोज ही मेल प्राप्त होते है। उसमें से अधिकांश युवक यौन विकारों और नपुंसकता दूर करने के उपाय और इलाज के बारे में बताने का आग्रह करते है, यथासम्भव उनकी समस्याओं का जबाब भी देता हूँ परन्तु सभी को अलग अलग जबाब देना सम्भव नही हो पाता है। इसलिए मैंने इस विषय पर क्रमशः आलेख ही लिखने का कोशिश कर रहा हूँ। अगले अंक में इन समस्यायों के समाधान के बारे में लिखने की कोशिश रहेगी। 
क्रमशः  ........ 

5 टिप्‍पणियां:

  1. जय मां हाटेशवरी....
    आप ने लिखा...
    कुठ लोगों ने ही पढ़ा...
    हमारा प्रयास है कि इसे सभी पढ़े...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना....
    दिनांक 01/12/2015 को रचना के महत्वपूर्ण अंश के साथ....
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की जा रही है...
    इस हलचल में आप भी सादर आमंत्रित हैं...
    टिप्पणियों के माध्यम से आप के सुझावों का स्वागत है....
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    कुलदीप ठाकुर...

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  2. ज्वलन्त समस्या पर बेहतरीन आलेख, आभार आपका।

    उत्तर देंहटाएं
  3. उपयोगी जानकारी देने के लिए आपका आभार

    उत्तर देंहटाएं

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