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शनिवार, 20 मई 2017

"आँख आना" (Conjunctivitis)



सुर्ख लाल गुलाबी आंखें, उनसे रिसता पानी, सूजी हुई पलके, उनका चिपचिपापन ‘आंख आने’ का पर्याय हैं। बोल-चाल की भाषा का यह पर्याय आंख के रोगी होने का सूचक है जिसे चिकित्सा की भाषा में कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है। Conjunctivitis एक आम वायरल इन्फ़ेक्शन है जो कभी-कभी बैक्टीरिया से भी होता है, इसे आम भाषा में आँख आना कहते हैं .इस बीमारी में आखों के उजले भाग पर संक्रमण हो जाता है और इसका रंग लाल हो जाता है। यह संक्रमण एक आदमी से दूसरे तक आसानी से पहुंचता है। हालांकि कई बार धूल, धुंआ और प्रदूषण से भी यह समस्या हो जाती है।इस बीमारी के दौरान संक्रमित इंसान को आंखों में खुजली, धुंधला दिखना जैसी समस्याएं होती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, दिन में खूब पानी पीना इससे बचने का एक अच्छा उपाय है। इसके अलावा हरी सब्जियों, ताजे फलों का सेवन, अच्छी नींद लेना आदि भी इस बीमारी को दूर रखने में मदद करता है। ठंडी चीजों, जैसे ककड़ी आदि को आखों पर रखने से भी इस मौसम में ताजगी महसूस होती है।
लक्षण :
The eyes feel light prick when the eye comes and it feels like something stuck in the eye. In this disease, pain is also caused by opening an eye and the thickness of the disease also increases due to the disease, so the eyelids stick in the night.
This is an infectious disease. It also spread through the use of patient towels or handkerchief. Today, we are telling you some of its home remedies that you can easily get comfort in this disease.
अचानक एक या दोनों आंखों में जलन आरंभ होती है और किरकिरापन महसूस होता है। आंखें लाल-गुलाबी हो जाती हैं, उनमें सूजन, पानी व मवाद आने की स्थिति प्रकट होती है। सोकर उठने पर पलकों के बाल आपस में चिपके मिलते हैं, आंख खोलना मुश्किल हो जाता है। कभी-कभी दर्द व खाज की भी शिकायत होती है। आंखें थकी सी रहती है, पढ़ना-तेज रोशनी में देखना कठिन हो जाता है। रोग अधिक उग्र होने पर नेत्र-श्लेष्मिका का सूक्ष्म रक्त नाड़ियों से रक्तस्राव भी संभव है।

Symptoms

Bacterial conjunctivitis affects both eyes. The eyes will usually feel gritty and irritated with a sticky discharge.
The eyelids may be stuck together, particularly in the mornings, and there may be discharge or crusting on the eyelashes.

आंख आने` की बीमारी के बचने के कुछ उपाए-
  • संक्रमित आंख को छूने या रगड़ने से बचें।
  • दिन में अपनी आंखों को कई बार ठंडे पानी से धोएं। खासकर दिनभर के काम के बाद घर लौटने पर यह जरूर करें।
  • किसी दूसरे का तौलिया, रूमाल, तकिया, बिस्तर आदि इस्तेमाल करने से बचें।
  • दुपहिया वाहन पर चलते समय हमेशा धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें।
  • हमेशा चश्मा पहन कर ही तैराकी करें।
  • जो इस बीमारी से पहले से ही ग्रसित हैं, उनसे दूर रहें।
  • आंखों पर जोर देने वाला कोई काम न करें। घर में बैठकर आराम करें। आपके साथ उनका भी भला होगा, जिनको आपके कारण रोग हो सकता है। प्रभावित आंख के छूने के बाद दरवाजे की चिटकनी, बर्तन, फ्लश की जंजीर आदि को छुएं तो तौलिए के माध्यम से। अन्य लोभ भी रोगी की आंखों से अपनी आंख को दूर रखें।
आँख का लाल होना, दर्द होना और आँख से पानी आना इसके मुख्य लक्षण हैं. आँख आने पर आँखों में कुछ अटका हुआ सा प्रतीत होता है. इस रोग में आँख खोलने से भी दर्द होता है और रोग के बढ़ने पर गाढ़ा -गाढ़ा पदार्थ भी निकलता है इसलिए रात में पलकें चिपक जाती हैं, जो कि पीड़ादायक है.

यह एक संक्रामक रोग है, यह रोगी के तौलिये या रुमाल के इस्तेमाल से भी फैलता है. आज हम आपको इसके कुछ घरेलू उपचारों से अवगत कराते हैं
Conjunctivitis home remedies
1- मुलहठी को दो घंटे तक पानी में भिगोकर रखें. उसके बाद उस पानी में रुई डुबोकर पलकों पर रखें, ऐसा करने से आँखों की जलन व दर्द में आराम मिलता है.

2 -आधे गिलास पानी में दो चम्मच त्रिफ़ला चूर्ण दो घंटे भिगोकर रखें. अब इसे छान लें, इस पानी से दिन में 3 -4 बार छींटें मारकर आँखें धोने से लाभ होता है.

3 -नीम के पानी से आँख धोने के बाद आँखों में गुलाबजल डालें लाभ होगा.

4 -हरी दूब (घास ) का रस निकालें अब इस रस में रुई भिगोकर पलकों पर रखें, आँखों में ठंडक मिलेगी.

5 -हरड़ को रात भर पानी में भिगोकर रखें. सुबह उस पानी को छानकर उससे आँख धोएं, आँखों की लाली और जलन दूर होगी.

6 -दूध पर जमी मलाई उतार  लें, अब इसे दोनों पलकों पर रख कर ऊपर से रुई रखकर पट्टी बांध दें. यह प्रयोग रात को सोते समय करें, लाभ होगा.

7- प्रातःकाल उठते ही अपना बासी थूक भी संक्रमित आँखों पर लगा सकते हैं.
होमियोपैथिक उपचार :
Homeopathic Treatment for Conjunctivitis
हिपर सल्फ (Hepar Sulph) -आँखें आने पर लाली एवं मवाद बनने के लक्षण दिखाई देना, पलको का सूज जाना एवं उनमे टपटप के साथ दर्द महसूस होना,गर्म वस्तु से सिकाई से आराम, ठंढ से तकलीफ का बढ़ जाना, दिन की अपेक्षा रात एवं प्रातःकाल में तकलीफ का बढ़ना जैसे लक्षणों में हिपर सल्फ ३०,२०० शक्ति लाभप्रद है।
कोनायम (Conium Maculatum) - आँख आ जाने की स्थिति में रोगी का निरंतर आखँ बंद रखने की इच्छा होना, सामान्य रौशनी भी सहन न कर पाना जैसे लक्षणों में इस औषधि की ३० शक्ति लाभकारी है। 
क्रोटेलस (Crotalus) - आँख आ जाने पर नेत्र गोलकों के श्वेत भाग में सूजन आ जाना, रोगी का आँखे न खोल पाना, आँखों का रंग पीला पड़ जाना, रेटिना में सूजन न रहने पर भी रक्त स्राव होना, पलकों के अग्र भाग में दर्द, स्त्रियों की माहवारी का समय बढ़ जाना जैसे लक्षणों में इस दवा की ३०, २०० शक्ति काफी लाभकारी है। 
साइलीशिया (Silicea) - कनीनिका पर अल्सर के छाले  पड़ जाना, सूजन का आ जाना, कनीनिका में मवाद का आना, इसमें छेद हो जाना, आसपास के स्थान का निष्क्रिय हो जाना, पलको के बाल  झड़ जाना, लगातार गुहेरियों का होना आदि लक्षणों में साइलीशिया की २०० शक्ति की दवा बेहद लाभकारी है। 
कैलिआयोड (Calcarea Iodata) - शरीर में उपदंश के कारण आँखों का संक्रमित हो जाना, आँखों में भारीपन एवं दर्द का होना, परे मिश्रित औषधियों के सेवन के कारण  आँखों का प्रभावित हो जाना आदि लक्षणों में इस औषधि की ३० शक्ति लाभकारी है। 
सल्फर ( Sulphur) - पलकों और कनीनिका के बीच घर्षण महसूस होना, रोगी को आँखों के अंदर बालू के कण चुभने जैसा महसूस होना, आंखों का सूज जाना, गर्मी के मौसम में अत्यधिक बेचैनी, अग्नि के सम्पर्क में आने पर दर्द और जलन महसूस होना अदि लक्षणों में सल्फर ३० शक्ति की औषधि लाभप्रद है। 
एपिस मेल ( Apis Mellifica ) - निरंतर जलन और खुजली के कारण आँखों की पलकों में सूजन, आँखों में डंक मरने जैसा दर्द, आँखों के कोने से पीब युक्त श्लेष्मा का निकलना जैसे लक्षणों में एपिस मेल की ३० शक्ति उपयोगी है। आंख की सूजन में एपिस का विशेष लक्षण यह है कि आंख के नीचे की पलक सूज कर पानी के थैले जैसी हो जाती है।
इयूफ़्रेसिया आफी (Euphrasia Offi.) - आँख आने की किसी भी अवस्था में इयूफ़्रेसिआ २०० लाभकारी है।  कनीनिका पर फफोले एवं छले पड़ जाना, चिपचिपा स्राव का निकलना, आँखों पर अतिरिक्त दबाव महसूस होना, आंखौं से कड़वा और नाक से गर्म स्राव होते रहना, आँखे चपक जाना, धुंधला दिखाई देना, सूर्य की रौशनी में तकलीफ बढ़ जाने पर इस दवा की १० बून्द मूल अर्क एक गिलास साफ पानी में घोलकर आँखों को धोते रहना चाहिए। इसका आई ड्राप भी मिलता है।
एकोनाइट ( Aconite Nap) - ठंढी हवा के लगते ही पलकों में सूजन का बढ़ जाना, आँखों में प्रदाह के कारण शुष्क और लाल हो जाना, आँखों में गर्मी महसूस होना, रोगी का वात एवं गठिया से ग्रसित आदि लक्षणों में इस दवा की ३० शक्ति लाभकारी है। 
हिपर सल्फ (Hepar Sulph) - आँखों में नेत्र शोथ के कारण स्पर्श एवं ठंढी हवा के प्रति अत्यधिक सवेदनशील हो जाना, पलको का सूज कर लाल हो जाना, नेत्र से अधिक पीले  श्लेष्मा का स्राव होना आदि रहने पर २०० शक्ति की दवा लाभकारी है। 

नोट : ऊपर उल्लेखित मुख्य औषधियों के अतिरिक्त बहुत सारी औषधियां हैं जो लक्षणानुसार प्रयोग की जाती हैं। 


शनिवार, 22 अप्रैल 2017

होमियोपैथिक फर्स्ट एड बॉक्स (Homeopathic Emergency Kit)

प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा की स्थिति में आप एक होम्योपैथी आपातकालीन किट सहायता से आप चिकित्सा कर सकते हैं। एक तो होम्योपैथिक उपचार सस्ते, प्रभावी होते हैं, और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है यह चिकित्सा विज्ञान शरीर को उत्तेजित करने के लिए प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करता है। अधिकांश होम्योपैथिक उपचार जड़ी-बूटियों और खनिजों से बने होते हैं, और वे 200 साल पहले की खोज के सिद्धांत पर आधारित होते हैं कि स्वस्थ व्यक्ति में लक्षण पैदा करने वाला पदार्थ बीमार व्यक्ति में उसी लक्षण का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। साधारण होमियोपैथी की जानकारी रखने वालों को भी ये किट हर घर में रखना चाहिए। 
Homeopathy is best known for its treatment of acute and chronic disease but it also has a lot to offer emergency medicine; the correct remedy acts with remarkable speed in life-threatening situations.


1.पेट्रोलियम 30- कार, बस आदि से यात्रा के दौरान उल्टी आए, जी मिचलाए या चक्कर आएं।

2.इपिकाक 30- सामान्य तौर पर उबकाई आए, उल्टी आए, जी मिचलाए या चक्कर आएं।

3.कार्बोवेज 30-जब रोगी ठंडा पड़ जाता है, नब्ज़ भी कठिनाई से मिलती है, शरीर पर ठंडे पसीने आने लगते हैं, चेहरे पर मृत्यु खेलने लगती है, अगर रोगी बच सकता है तब इस औषधि से रोगी के प्राण लौट आते हैं।

4.नक्स 200- गैस, अफारा, अपच, एसिडिटी, उल्टी, दस्त, कमजोरी, कब्ज।

5.पल्सेटिला 30- उदर विकार यदि आइस्क्रीम, केक, पेस्ट्री, घी या तली- भुनी चीजें खाने से हो।

6.जैलसीमियम 30- मौसम या स्थान परिवर्तन से उत्पन्न जुकाम, नजला, खांसी, बुखार।

7.आर्सेनिक एल्ब 30- सामान्य या पुराना नजला, जुकाम, छीकें, श्वास कष्ट, दर्द, बुखार।

8.अर्निका 200- गुम चोट, मोच, मानसिक थकान, भागदौड़ से उत्पन्न तनाव।

9.एकोनाइट 30- सर्दी में कॉमन कोल्ड से राहत हेतु, नींद लाने के लिए।

10.केलेंडुला- त्वचा के कटने-फटने से उत्पन्न घाव।(मूल अर्क) तथा मूल अर्क को बराबर पानी में मिलाकर घाव साफ करें और कैलेंडुला 30 कैलेंडुला 30 की 6-7 गोली तीन-तीन घंटे पर घाव सुखाने के लिए सेवन करें।

11.मेग फास 200- पेट दर्द, मासिक धर्म के दौरान पेडू में दर्द, चक्कर।

12.बेलाडोना 30- सिरदर्द, कान दर्द, लू लगना, आंख की लाली।

13.प्लेन्टेगो 30- दांत दर्द, कान दर्द, बवासीर।

14.यूप्रेशिया 6- कंजक्टेराइटिस (आंख लाल, सूजन, मवाद, चिपकना, दर्द इत्यादि।

15.सीपिया 200-ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर)

16.हेमेमलिस- रक्त प्रदर। माह में एक से अधिक बार मासिक स्राव या अधिक दिनों तक स्राव।

17.क्रोटन टिग 30- पतले दस्त, पिचकारी की भांति मल निकलना, हरा या फटा हुआ मल।

18.रेस्क्यू रेमेडी- चक्कर, मूच्छा, बेहोशी, घबराहट, बिजली का शाक।

19.ग्रेफाइटिस 30- बच्चा तुतलाकर बोलता हो, अंधेरे से डरता हो, चर्म विकार, एग्जिमा।

20.क्रोल्चिकम 30- मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, लाली, सूजन, पेट खराब, ठंड से कष्ट बढ़े।

21.सेनेगा- सांस फूलना, छाती में कफ का बोझ, सांस लेने में तकलीफ, प्रौढ़ावस्था में।

22.कैलिकेरिया कार्ब 30- बच्चों के दांत निकलते समय के रोग, बच्चा मुंह में उंगली डाले।