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सोमवार, 2 जून 2014

मस्सों का होम्योपैथिक उपचार (Homeopathic remedies for warts)

इसके पहले के अंक में हम मस्सों का घरेलू उपचार के बारे में जानकारी दिया था, आज हम मस्सों का होमियोपैथिक उपचार के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगें। आज होमियोपैथी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। खास बात यह है की इस पद्धति में रोगी पर लगातार नजर रखते हुए रोग से उत्पन्न शारीरिक और मानसिक लक्षणों के आधार पर ही चिकित्सा की जाती है अर्थात इस पद्धति में बीमारी के आधार पर नही वरन रोगी के तन मन के हालात को देखते हुए चिकित्सा की जाती है।होम्योपैथी 'समः समं, शमयति' के सिद्धांत पर काम करती है, जिसका अर्थ है समान की समान से चिकित्सा अर्थात एक तत्व जिस रोग को पैदा करता है, वही उस रोग को दूर करने की क्षमता भी रखता है।
इस पद्धति के द्वारा रोग को जड़ से मिटाया जाता है।किसी भी बीमारी की चिकित्सा करते समय ---रोगी के धातुगत लक्षण,मानसिक लक्षण और रोग के लक्षणों के साथ जिस दवा के लक्षणों (Majority of symptoms) सबसे अधिक मेल खाता हो,उसी दवा का प्रयोग सर्वप्रथम करना चाहिए। आइये अब हम मस्सों का इलाज होमियोपैथी से करते हैं जो निरापद और लाभकारी है।

थूजा :थूजा एक प्रधान एंटीसाइकोटिक दवाहै। इस औषधि का प्रयोग किसी भी प्रकार के मस्सों में किया जा सकता है। मस्सों के यह सबसे अच्छी औषधि है। मस्सों के झुण्ड निकलने, सिर के पीछे मस्से जैसे दाने होने, ठोड़ी पर मस्से होने, लटकने वाले मस्से होने, खूनी मस्से जिससे कभी-कभी खून निकलता रहता है। इन सभी प्रकार के मस्सों को ठीक करने के लिए थूजा औषधि की 30 और 200  शक्ति का सेवन करना लाभदायक होता है। इन मस्सों में थूजा औषधि के सेवन के साथ-साथ थूजा Q (मूल अर्क ) को रूई पर लगाकर मस्सों पर लगाना चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान स्त्री को पहले कुछ दिनों तक सल्फर औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और फिर कुछ दिनों तक थूजा औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और अंत में मर्क सौल औषधि की 30 शक्ति सेवन कराने से बच्चे को मस्से नहीं होते। यदि त्वचा पर मस्से गोभी की तरह दिखाई दे तो इस औषधि का प्रयोग करना लाभकारी होता है। योनि के ऊपर -उसमे  दर्द होता है की हाथ लगाया  जाता  स्वर यंत्र के अर्बुद में थूजा काफी लाभप्रद है। 
कैलकेरिया कार्ब : कठोर, नोकदार व चुभने वाले मस्से जिनमें सूजन आने के बाद कभी-कभी जख्म भी बन जाते हैं।चेहरे पर, गर्दन पर, और शरीर के ऊपरी हिस्से के मस्से में लाभकारी।  इस तरह के मस्से को ठीक करने के लिए कैलकेरिया कार्ब औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग करना लाभकारी होता। नाक  अर्बुद से रक्तस्राव  होता है। 
नाइट्रिक ऐसिड : फूलगोभी की तरह बड़े खुरदरे मस्से, टेढ़े-मेढ़े मस्से एवं ऐसे मस्से जिसे धोने से बदबूदार खून निकलने लगता हो। छूने  पर भी खून निकलने लगता है।इस तरह के मस्सों में नाइट्रिक ऐसिड औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है। इस औषधि का प्रयोग लटकने एवं होंठों पर मस्से की तरह दाने होने पर भी किया जाता है।
नैट्रम म्यूर : पुराने मस्सेऐसे मस्से जिसमें दर्द हो और मस्से को हल्का सा छू देने पर असहनीय दर्द हो। मस्से कभी-कभी जख्म में बदल जाता है।हाथ और अंगूठे में अनगिनित मस्से, ऐसे लक्षणों वाले मस्सों का उपचार नैट्रम-म्यूर औषधि की 30 शक्ति से फयदेमन्द होता है। यह रक्तहीन,कमजोर और हरित पाण्डु रोग ग्रस्त स्त्रियों की बीमारी में खास रूप से फायदा करती है। 
सल्फर : यदि कठोर एवं दर्द वाले मस्से हो गए हों और उसमें तपकन महसूस होता हो तो सल्फर औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करें।
ऐन्टिम टार्ट : पुरुषों के जननेन्द्रिय की सुपारी के पीछे मस्से हो गए हों तो ऐन्टिम टार्ट औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है।
कॉस्टिकम : कास्टिकम एक प्रधान सॉरा-बिष-नाशक और फास्फोरस की विरोधिनी दवा है। अगर शरीर पर छोटे-छोटे बहुत से ठोस मस्से हो गए हों जिसके जड़ मुलायम एवं ऊपर के मुंह कठोर और नोकदार  हो तो ऐसे मस्सों को ठीक करने के लिए कॉस्टिकम औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना लाभकारी होता है। नाखूनों के किनारे, बाहों, हाथों, पलकों एवं चेहरे पर होने वाले मस्सों में भी इस औषधि का उपयोग किया जाता है।
कैलि म्यूर : हाथों पर मस्से होने पर कैलि म्यूर औषधि का सेवन करने के साथ इस औषधि की 3x मात्रा को एक चम्मच पानी में मिलाकर लोशन बनाकर मस्सों पर लगाना भी चाहिए।
सीपिया : जननेन्द्रिय की आगे की त्वचा के अगले भाग या शरीर पर बड़े-बड़े कठोर एवं काले मस्से होने पर सीपिया औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना हितकारी होता है। सीपिया के बाद सल्फर की जरूरत पड़ती है। 
नैट्रम-म्यूर : हथेलियों पर मस्से होने पर नैट्रम-म्यूर औषधि की 3x से 200  शक्ति का सेवन करना लाभकारी होता है।
स्थान विशेष के मस्सों में उपयोगी औषधियाँ :
मुहं में : कास्टिकम, एसिड नाइट्रिकम, थूजा 
भौं में : कास्टिकम,
आँख की पलकों में : एसिड नाइट्रिकम 
आँख के नीचे : सल्फर 
नाक में : थूजा,कास्टिकम 
मुहं के कोने में : काण्डुरैगों 
दाढ़ी में : लाइकोपोडियम 
जीभ पर : आरम  म्यूर 
गर्दन पर : एसिड नाइट्रिकम 
बाहँ पर :कैल्केरिया,कास्टिकम,कास्टिकम,सीपिया,नाइट्रिक एसिड,सल्फर 
तलहथी पर: नैट्रम म्यूर, अनकॉर्डियम 
अंगुली में : कैल्केरिया, कास्टिकम,लैक्सिस, नैट्रम मयूर,नाइट्रिक एसिड,सल्फर,थूजा, सीपिया 
लिंगमुण्ड पर : एसिड नाइट्रिक,एसिड फास, थूजा 
लिंगाग्र चर्म : सिनाबेर,इयूकैलिप् 
"सुझाव और परामर्श सादर आमंत्रित" 
धन्यबाद 

रविवार, 25 मई 2014

मस्सों का घरेलू उपचार (Home remedies for warts)

प्रिये मित्रों मस्सा शब्द से शायद ही आप अनजान हों।मस्से शरीर पर कहीं भी हों खूबसूरती को कम कर देते हैं, विशेषकर चेहरे पर होने वाले मस्से। मस्सा (wart) शरीर पर कहीं कहीं काले रंग का उभरा हुआ मांस का छोटा दाना जो चिकित्सा विज्ञान के अनुसार एक प्रकार का चर्मरोग माना जाता है। यह प्रायः सरसों अथवा मूँग के आकार से लेकर बेर तक के आकार का होता है। यह प्रायः हाथों और पैर पर होता है किन्तु शरीर के अन्य अंगों पर भी हो सकता है।त्वचा पर पेपीलोमा वायरस के कारण छोटे खुरदरे कठोर गोल पिण्ड बन जाते हैं जिसे मस्सा कहते हैं।
मस्से विषाणु संक्रमण से पैदा होते हैं। प्रायः 'मानव पेपिल्लोमैविरस' नामक विषाणु की
कोई प्रजाति इसका कारण होती है। लगभग दस प्रकार के मस्से होते हैं। मस्से संक्रमण (छुआछूत) से हो सकते हैं और शरीर में वहाँ प्रवेश करते हैं जहाँ त्वचा कटी-फटी हो। प्रायः ये कुछ माह में स्वयं समाप्त हो जाते हैं किन्तु कभी-कभी वर्षों तक बने रह सकते हैं या पुनः हो सकते हैं।शरीर पर अनचाहे मस्सों के उग जाने से मन से बार बार यही आवाज आती है कि इन मस्सों से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है। ये मस्से आपकी सुदरता में धब्बा बन कर आपको परेशान कर रहे हैं तो इन आसान उपायों की सहायता से आप इनसे छुटकारा पा सकते हैं। 
१. रोज दो तीन बार प्याज का लेप मस्सों पर करने से ये मस्से जड़ से खत्म हो जाएंगे। प्याज को काट कर मस्से पर घिसना भी लाभप्रद है। 
२. शरीर की त्वचा पर यदि छोटे-छोटे काले मस्से हो गए हों तो उन पर काजू के छिलकों का लेप लगाने से मस्से साफ हो जाते हैं।
3. चूना और घी एक समान मात्रा में लेकर दोनों को खूब फेंटकर सुरक्षित रखें। उसे दिन में 3-4 बार मस्सों पर लगाएं। उससे मस्से जड़ से हट जाएंगे और दूबारा नहीं होंगे।
४. सोडा कास्टिक 6 ग्राम को 250 ग्राम की बोतल में घोलकर सुरक्षित जगह पर रख दें। सावधानी से रूई की सहायता से मस्सों पर लगाएं। मस्सों को दूर करने के लिए यह रामबाण दवा है। 
५. बी काम्पलेक्स, विटामिन ए, सी, ई युक्तआहार के सेवन से मस्सों को दूर किया जा सकता है।मस्सों से छुटकारा पाने के लिए पोटेशियम बहुत लाभदायक है। पोटेशियम बहुत सी साग-सब्जी और फलों में पाया जाता है। जैसे - सेब, केला, अंगूर, आलू, मशरूम, टमाटर, पालक इत्यादि।
६. खट्टी सेब का रस मस्सों पर लगाने से मस्सों के छोटे-छोटे टुकड़े होकर गिर जाएंगे।
७. मुहासे या मस्से हों तो फिटकरी और काली मिर्च आधा-आधा ग्राम पानी में पीसकर मुहा पर मलने से लाभ होता है।
८. बरगद के पेड़ के पत्तों का रस मस्सों के उपचार के लिए बहुत ही असरदार होता है। इस प्रयोग से त्वचा सौम्य हो जाती है और मस्से अपने आप गिर जाते हैं।
९. एक चम्मच कोथमीर के रस में एक चुटकी हल्दी डालकर सेवन करने से मस्सों से राहत मिलती है।
१०. कच्चे आलू का एक स्लाइस नियमित रूप से दस मिनट तक मस्से पर लगाकर रखने से मस्सों से छुटकारा मिल जायेगा।
११. मस्सा खत्म करने के लिए एक अगरबत्ती जला लें और अगरबत्ती के जले हुए गुल को मस्से का स्पर्श कर तुरन्त हटा लें। ऐसा 8-10 बार करें, इस उपाय से मस्सा सूखकर झड़ जाएगा।
१२. ताजा अंजीर लें। इसे कुचलकर -मसलकर इसकी कुछ मात्रा मस्से पर लगावें और ३० मिनिट तक लगा रहने दें फ़िर गरम पानी से धोलें। ३-४ हफ़्ते में मस्से समाप्त होंगे।
१३. केले के छिलके को अंदर की तरफ से मस्से पर रखकर उसे एक पट्टी से बांध लें। और ऐसा दिन में दो बार करें और लगातार करते रहें जब तक कि मस्से ख़तम नहीं हो जाते।
१४. अरंडी का तेल नियमित रूप से मस्सों पर लगायें। इससे मस्से नरम पड़ जायेंगे, और धीरे धीरे गायब हो जायेंगे। अरंडी के तेल के बदले कपूर के तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं। 
१५. कलौंजी के कुछ दाने सिरके में पीस कर मस्सों पर लगा कर सो जाए कुछ दिनों में मस्से
कट जायेंगे।
१६. लहसून के एक टुकड़े को पीस लें, लेकिन बहुत महीन नहीं, और इस पीसे हुए लहसून को मस्से पर रखकर पट्टी से बांध लें। इससे भी मस्सों के उपचार में सहायता मिलती है।१७. एक बूँद ताजे मौसमी का रस मस्से पर लगा दें, और इसे भी पट्टी से बांध लें। ऐसा दिन में लगभग 3 या 4 बार करें। ऐसा करने से मस्से गायब हो जायेंगे। 
१८. बंगला, मलबारी, कपूरी, या नागरबेल के पत्ते के डंठल का रस मस्से पर लगाने से मस्से झड़ जाते हैं। अगर तब भी न झड़ें, तो पान में खाने का चूना मिलाकर घिसें। 
१९. अम्लाकी को मस्सों पर तब तक मलते रहें जब तक मस्से उस रस को सोख न लें। या अम्लाकी के रस को मस्से पर मल कर पट्टी से बांध लें।
२०. कसीसादी तेल मस्सों पर रखकर पट्टी से बांध लें।
२१. थूहर का दूध या कार्बोलिक एसिड सावधानीपूर्वक लगाने से मस्से निकल जाते हैं। -मस्सों पर अलो वेरा को दिन में तीन बार लगायें। ऐसा एक सप्ताह तक करते रहें, मस्से गायब हो जायेंगे।
२२. बेकिंग सोडा और अरंडी तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर इस्तेमाल करने से मस्से धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं।
२३. हरे धनिए को पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे रोजाना मस्सों पर लगाएं। 
२४. चेहरे को अच्छी तरह धोएं और कॉटन को सिरके में भिगोकर तिल-मस्सों पर लगाएं। दस मिनट बाद गर्म पानी से फेस धो लें। कुछ दिनों में मस्से गायब हो जाएंगे।
२५. रात को सोते वक्त और सुबह के समय मस्सों पर शहद लगाने के लाभकारी परिणाम मिले हैं।
२६. ग्वार पाठा (एलोवेरा) से मस्से की चिकित्सा की जा सकती है। एलोवेरा के रस में रूई का फ़ाया (काटन बाल) एक मिनट के लिये भिगोएं फ़िर इसे मस्से पर रखें और चिपकने वाली पटी (एढीसिव टेप। से स्थिर कर दें। यह प्रक्रिया दिन में कई बार करना उचित है। ३-४ हफ़्ते में मस्से साफ़ हो जाएंगे।
२७. ताजा अंजीर मसलकर इसकी कुछ मात्रा मस्से पर लगाएं। 30 मिनट तक लगा रहने दें। फिर गुनगुने पानी से धो लें। मस्से खत्म हो जाएंगे।

अगले अंक में मस्सों का होमियोपैथिक उपचार पढ़ें  ……। 

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