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शनिवार, 2 मार्च 2013

एंटीबायोटिक दवाइयां ( Antibiotics medicine)



एंटीबायोटिक्स को एंटीबैक्टीरियल्स भी कहते हैं। यह एक प्रकार की दवा है, जिसका उपयोग बैक्टीरिया द्वारा किए गए संक्रमण का उपचार करने के लिए किया जाता है। बैक्टीरिया सूक्ष्मजीव होते हैं, जो कई प्रकार के संक्रमणों का कारण बनते हैं। एंटीबायोटिक्स या तो बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं या इन्हें प्रजनन करने से रोकते हैं। कुछ एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल फंगस और प्रोटोजोआ की रोकथाम के लिए भी किया जाता है, लेकिन इनमें वायरस को नष्ट करने की क्षमता नहीं होती। बैक्टीरियल एंटीबायोटिक दवाएं ‘ब्राड स्पैक्ट्रम’ प्रभाव वाली होती है। वे तुरंत आराम देती है। एलैग्जैण्डर फ्लेमिंग ने 1928 में पैंसिलीन दवाई का निर्माण उल्ली पैनीसीलियमनोट्रेटेक द्वारा किया। एक्टीनोमाईसीन, स्टैप्टोमाईसीन आदि दवाओं का निर्माण 1942 को हुआ था। पिछले पचास वर्षों में 7000 एटीबायोटिक दवाओं का निर्माण हुआ है। हर वर्ष 300 ने एंटीबायोटिक खोजे जाते हैं। यह दवाएं-बैसीलस और सूडोमोनस बैक्टीरिया से बनती है। स्ट्रेप्टामाइसीज ग्रुप में 40 से ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं बनती हैं- दवाओं के अतिरिक्त-मछली और मीट की प्रिजर्व करने में भी प्रयोग होते हैं। टीबी के 20 प्रतिशत से ज्यादा लोगों पर एंटीबायोटिक दवा का भी असर नहीं होता। इनसे दस्य या डायरिया होने का खतरा रहता है।

हमारी आंतों में ई-कोलाई लाभदायक बैक्टीरिया रहते हैं वह हमारे लिये विटामिन बी. और के.बनाते हैं। वे भी नष्ट हो जाते हैं। अत: हमारी आंतों का माईक्रोफ्लोरा बुरी तरह से प्रभावित हो जाता है- दवाइयां लेते समय सदा सावधानी बरतें।
एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल
* एंटीबायोटिक्स डॉक्टर की सलाह के बगैर न लें। हर बीमारी के लिए अलग प्रकार के एंटीबायोटिक्स होते हैं, जिसे डॉक्टर की सलाह से ही समझ सकते हैं।
* जितनी मात्रा में और जिस समय डॉक्टर बताएं, उसी अनुसार एंटीबायोटिक्स लें, क्योंकि बताई गई मात्रा और समय का ध्यान न रखना नुकसान पहुंचा सकता है।
* डॉक्टर जितने समय के लिए एंटीबायोटिक्स कोर्स करने की सलाह दें, उसे अवश्य पूरा करें, तबीयत ठीक लगने पर बीच में ही इनका सेवन बंद न कर दें।
* अगर आप उपचार तुरंत बंद कर देंगे तो कुछ बैक्टीरिया जीवित बच जाएंगे और आपको पुन: संक्रमित कर देंगे।
* हर इंसान के शरीर के मुताबिक अलग एंटीबायोटिक्स लाभ देते हैं, इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के लिए दिए गए एंटीबायोटिक्स का सेवन कतई न करें।
* इन्हें खाना खाने से एक घंटा पहले या दो घंटे बाद लेना चाहिए।
कैसे कार्य करते हैं
बैक्टीरिया के तेजी से बढ़ने और लक्षण दिखाने से पहले शरीर का रोग प्रतिरोधक तंत्र सामान्य तौर पर इन्हें नष्ट कर सकता है। हमारे पास विशेष श्वेत रक्त कणिकाएं होती हैं, जो हानिकारक बैक्टीरिया पर आक्रमण करती हैं। कभी-कभी जब बैक्टीरिया का संक्रमण गंभीर होता है, तब एंटीबायोटिक्स की सहायता लेनी पड़ती है, जो बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं या उनके विकास को धीमा कर देते हैं। कई बार संक्रमण को रोकने के लिए एंटीबायोटिक्स को सर्जरी के पहले भी दिया जाता है।

एंटीबायोटिक्स रेजिस्टेंस
बिना सोचे-समझे या अत्यधिक मात्रा में एंटीबायोटिक्स का सेवन करना एंटीबायोटिक्स रेजिस्टेंस का सबसे प्रमुख कारण है। पूरे विश्व में इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि एंटीबायोटिक्स का उपयोग बहुत अधिक बढ़ रहा है। इनका अत्यधिक इस्तेमाल ही बैक्टीरिया का संक्रमण बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण है, जो एंटीबैक्टीरियल दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट हो गए हैं। एंटीबायोटिक्स रेजिस्टेंस ने विश्व स्तर पर जन स्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न कर दिया है। अगर यह ट्रेंड लगातार चलता रहा तो लाखों जिंदगियां खतरे में पड़ जाएंगी।
एंटीबायोटिक्स लेने के तरीके
ओरल (मुंह से लेना): टेबलेट्स, कैप्सूल्स या सिरप के रूप में।
टॉपिकल (एक्सटर्नल): क्रीम्स, लोशन्स, स्प्रे और ड्रॉप्स।
इंजेक्शन्स: इंजेक्शन मांसपेशियों में एंटीबायोटिक्स को पहुंचाता है या एंटीबायोटिक्स को ड्रिप से सीधे रक्त में पहुंचाया जाता है।
एंटीबायोटिक्स के दुष्प्रभाव
सर्वाधिक गंभीर संक्रमण के लिए जो क्लिंडामाइसिन एंटीबायोटिक दवा ली जाती है, आमतौर पर उसके दुष्प्रभाव अधिक दिखाई देते हैं। हालांकि पेनिसिलीन, सेफैलोस्पोरिन और इरिथ्रोमाइसिन के इस्तेमाल से भी ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- मुंह, पाचन मार्ग और योनि का फंगल इन्फेक्शन।
- किडनी स्टोन का निर्माण।
- असामान्य ब्लड क्लॉटिंग।
- सूरज की किरणों के प्रति संवेदनशील होना।
- कुछ की बड़ी आंत में सूजन आ जाती है, जिससे डायरिया हो सकता है।
- एंटीबायोटिक्स लेने के तुरंत बाद एलर्जिक रिएक्शन दिखाई देना।
- अधिक सेवन से मोटापा बढ़ना।
-एंटीबायोटिक दवाएं आंतों के लाभदायक बैक्टीरिया को मार देती हैं, जिससे रोग प्रतिरोधक तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- छोटी उम्र में ही एंटीबायोटिक्स का अधिक सेवन इम्यून सिस्टम को अग्नाशय पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे शरीर में इंसुलिन के निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे डायबिटीज की आशंका बढ़ जाती है।
मिथक और तथ्य
मिथक: एंटीबायोटिक्स किसी भी संक्रमण को जड़ से समाप्त कर सकते हैं।
तथ्य: सच यह है कि एंटीबायोटिक्स वायरस से होने वाले संक्रमण के उपचार में कारगर नहीं हैं। हां, बैक्टीरिया, फंफूद आदि से होने वाले संक्रमणों के उपचार में ये काफी हद तक कारगर हैं, लेकिन कुछ बैक्टीरिया भी इनके प्रति एक प्रकार की इम्युनिटी उत्पन्न कर लेते हैं, जिससे उन पर एंटीबायोटिक्स का प्रभाव नहीं होता।
मिथक: एंटीबायोटिक्स लेने से कोई नुकसान नहीं होता।
तथ्य: यह भ्रम है। सच यह है कि एंटीबायोटिक्स के अधिक प्रयोग से शरीर को नुकसान पहुंचता है। कई बार बीमारी खत्म होने की बजाय और बढ़ जाती है। 
मिथक: ये सर्दी-जुकाम और फ्लू के लिए कारगर हैं।
तथ्य : एंटीबायोटिक्स वायरस से होने वाले संक्रमणों से नहीं लड़ते। अगर सर्दी-जुकाम, फ्लू, खांसी, ब्रोंकाइटिस, गले की खराश बैक्टीरिया से हुए हों, तभी ये कारगर हैं। अगर वायरस आपको बीमार बना रहे हैं तो एंटीबायोटिक्स लेने से लाभ की जगह नुकसान है।
न करें इनका इस्तेमाल
- जिनकी किडनी या लिवर ठीक प्रकार से काम न कर रहे हों।
- गर्भवती महिलाएं।
-स्तनपान कराने वाली महिलाएं।
- एंटीबायोटिक्स दूसरी दवाओं से भी रिएक्शन कर लेते हैं, इसलिए अगर आप एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं तो दूसरी दवाओं का इस्तेमाल न करें।
(एससीआई इंटरनेशनल हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के कंसल्टेंट डॉ. हिमांशु शेखर व यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. निशांत सिंह से बातचीत पर आधारित-हिंदुस्तान)

सोमवार, 24 दिसंबर 2012

होमियोपैथिक प्रतिरोधक औषधियाँ (Homeopathic resistant medicine)


अनियमित दिनचर्या होने का प्रभाव शरीर की रोग-प्रतिरोध क्षमता पर पडता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण कई प्रकार के रोग शुरू होने लगते हैं।यदि उचित समय पर रोग से सम्बिधित प्रतिरोधक औषधी का सेवन किया जाय तो या तो रोग होता ही नही यदि होता भी है तो उसका प्रभाव निम्न रहता है। होमियोपैथी में बहुत सारे रोग प्रतिरोधक औषधियाँ हैं। सुझ बुझ से इनका उपयोग किया जाय तो बहुत हद तक हम रोग को प्रतिरोध कर  सकते हैं। यहाँ पर हम उन्ही औषधियों का संक्षिप्त परिचय करेंगे।


1.गर्भपात :

  • एलेट्रिस फ़ेरिनोसा 6X  (Aletris Farinosa)-समय से बहुत पहले ज्यादा मात्रा में रक्तस्राव,प्रसव जैसा दर्द, रोगिणी हर वक्त थकी थकी,चेहरा पीला और शरीर में रक्त का अभाव।
  • प्ल्म्बम मैट (Plumbm Met.)-अत्यधिक रक्तस्राव,रोगिणी को ऐसा लगता है पैर से पीठ की ओर मानो खिचाव हो रहा है,जम्भाईयाँ  ज्यादा आती है,शरीर में ऐठन होती है तथा छाती में मानो सुइयाँ चुभ रही हो।
  • बाईबर्नम प्रुनिफोलियम Q (Viburmum Prunifolium)-गर्भपात की  प्रकृति, जिन्हें मरी सन्तान होती हो,चोट लग जाने का उपक्रम, गर्भ का  नीचे खिसक जाना।इसमें अक्सर 2-3 महीने का गर्भ नष्ट होता है।
  • क्रोकस सैटाइवस  (Crocus Sativus)-गर्भावस्था में स्त्री के भुर्ण  के ज्यादा हिलने डोलने से कष्ट में लाभप्रद है।
  • सैबाईना (Sabina)-गर्भपात की आशंका में Q या  30 शक्ति। रुधिर का रंग चमकीला लाल,सम्भोग की प्रबल इच्छा और कमर पेट में दर्द मुख्य लक्षण है।
  • ओपियम (Opium)-भय से गर्भपात की आशंका,इतना दर्द की रोगिणी शौच जाने को दौडती है।
  • एको नाइट (Aconite)-भय से प्रबल आशंका,मानसिक उतेजना।
  • कोलोंफाइलम Q  (Caulophyllum )-गर्भाशय की कमजोरी के कारण  गर्भपात में इसे लगातार देते रहें।

2.मुहांसे : 
  • बर्बेरिस एकवी .( )-मूल अर्क 20 बूंद  रोज कुछ दिनों तक सेवन करें। मूल अर्क का 1 भाग गिलास्रिन के 9 भाग में लोशन बना कर चेहरे पर लगाना चाहिए।
  • बार बार मुहांसे निकलते हो तो साइलीसिया 200 प्रति सप्ताह सेवन करे। अन्य दिनों में  साइलीसिया 12X बायोकेमिक दवा का दिन में दो बार सेवन करें।
  • बालको के मुहांसे में कैल्केरिया फास  और बालिकाओं के मुहांसे में कैलकेरिया पिक्रेटा लाभप्रद है।
3.शराब :
  • शराब के प्रतिरोध के लिए क्वेरेक्स  ग्लेनिडम  स्प्रिट का 10 बूंद चम्मच भर जल के साथ दिन में चार बार सेवन करें। दस्त की प्रवाह न करें।
  • स्टेरकुलिया ( ) का सेवन करने से लाभ होता है और हाजमा भी सुधर जाता है।
  • सल्फ्यूरिक एसिड Q  को अल्कोहल में मिला  क़र 15 बूंद दिन में तीन बार सेवन करने से  बहुत लाभ मिलता है।
4. दुश्चिंता
  • परीक्षा के पूर्व दुश्चिंता,घबराहट में अर्जेंन्टम नाइट्रीकम 30 शक्ति की चार चार गोली का सेवन करे। परीक्षा में बैठने के 15 मिनट पूर्व सेवन करें।
5. घबडाहट 
  • स्टेज पर जाने की घबडाहट में जैल्सीमियम और इग्नेसिया लाभप्रद है। इसे 30 शक्ति में लेना चाहिए।
6. फोड़े फुंसियाँ :
  • साईंलिसिया फोड़े फुंसी उत्पन्न होने की प्रवति  को रोक देती है।नाखुनो के विकार की भी उतम औषधि है।बर्वेरिस एव हिपर सल्फ़ भी अवरोधक है। साईंलिसिया एव हिपर उच्च शक्ति में लें और बर्वेरिस का Q लेना चाहिए।
  • गन पाउडर 2X लेने से फोड़े फुंसी होना कम हो जाता है।
  • इचेंनसिया Q भी एक प्रतिरोधक औषधी है।
7.पथरी:
  • पथरी निर्माण के रोकथाम के लिये फ्रेगेरिया की उच्च शक्ति लाभप्रद है।इससे दांतों पर मैल भी नही लगता है।मुत्राश्य की पथरी को हाईड्रेनजिया Q रोकता है।कैलकेरिया रैनेलिस 2X भी लाभप्रद है।
8.यात्रा कष्ट :
  • यात्रा के कष्ट में काकुलस 30,समुद्री यात्रा में टबेकम 30 एव हवाई सफर में बेलेडोना 30 लाभप्रद है।सफर के 15 मिनट पहले सेवन करें 
9.छोटी माता :
  • छोटी माता में एन्टीम टार्ट उच्च शक्ति,रस टाक्स 3x या वेरियोलिनम 200 की एक मात्रा लेने पर छोटी माता (चिकेन पाक्स )का अवरोध होता है, इसका 1M ,10M  एक बार सेवन कर लेना चाहिए। खसरा फैलने के दिनों में प्लस 30 प्रातकाल और एकोनाइट सायंकाल 10 दिनों तक सेवन करे। मेलेड्रीनम 200 की की दो खुराक से चेचक का प्रतिरोध हो जाता है। 
10.सुजन 
  • सर्दी के दिनों में पैर की अगुलियों के सुजन में सल्फर 10M की एक मात्रा का सेवन लाभदायक है।
11.सर्दी जुकाम 
  • बार बार सर्दी जुकाम की होने की स्थिति बनी रहने पर सोरिनम 200 का उपयोग करना चाहिए।जुकाम में फेरम फास30,कलि म्यूर 30 पर्यायक्रम से देना चाहिए।
12. भयमुक्ति 
  • कुतो से भयमुक्ति के लिए बेलेड़ोना,होयासियाम्स  उपयोगी है।कुत्ते के काटने पर लाइसिन एव इड्रोफोबियम 30 का सेवन करना चाहिए।
13. हैजा 
  • हैजा में कुप्रम मेट प्रतिरोधक है। हैजा फैलने के समय इसकी उच्च शक्ति का सेवन  करना  चाहिए।
14.मिर्गी 
  • मिर्गी में कुप्रम मेट एव इग्नेशिया 200 पर्यायक्रम से सप्ताह भर ले।
15. डिप्थीरिया 
  • डिप्थीरिया के रोकथाम के लिए डिप्थीरियम 200,लेक केनाइनम 1M ,मर्क साइमेट्म 200 उपयोगी है। फाईटोलैका Q भी लाभ पहुचाता है।
16. सुजाक 
  • इथुजा सुजाक की प्रतिरोधक औषधि है।
17.सफेद बाल 
  • सफेद बाल के प्रतिरोध के लिए कुछ दिनों तक थायरोडिनम 30 का सेवन करें,फिर 200 शक्ति का सप्ताहिक सेवन करे।
18. सिर दर्द 
  • चियोनैन्थस Q  सिर दर्द की लगातार बनी रहने की स्थिति को रोक देती है। इसे कम से कम एक सप्ताह ले।
19.खुजली 
  • बार बार खुजली होने की स्थिति के प्रकोप को रोकने के लिए आयोडीनम 3X का सेवन करें।
20.हस्तमैथुन 
  • हस्तमैथुन के आदत छुड़ाने के लिए ब्यूफोराना 30 का कुछ दिनों तक सेवन करण चाहिए।
21.आदत 
  • बरबेरिस बल्गेरिस के मूल अर्क से अफीम की आदत छुटटी है। कैलेडियम CM  के सेवन से धुम्रपान की आदत छुट जाती है।

Continuous .........


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