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रविवार, 29 सितंबर 2013

धूम्रपान की लत [Smoking Addiction]

तंबाकू और धूम्रपान की लत ने कब हमारे जीवन में जगह बना ली, पता तक नहीं चल पाता। कभी दूसरे को देखकर, तो कभी बुरी संगत में आकर लोग सिगरेट, गुटखा, तंबाकू व दूसरी नशीली चीजों को साथी बना लेते हैं। इन्हें लेने वालों को लगता है कि इन चीजों ने उनकी जिंदगी आसान बना दी है। कई बार कम उम्र में ही खुद को बड़ों जैसा महसूस करने की ख्वाहिश में धुएं के छल्ले उड़ाने की ललक भी इस दलदल में धकेल देती है। जब इससे परेशानी होने लगती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। हर कश स्वस्थ जीवन पर जुल्म ढाता है। हर पुड़िया में जिंदगी घुल रही है। तंबाकू की हर चुटकी जिंदगी को चाट रही है। 
तंबाकू में नुकसानदायक केमिकल
तंबाकू में चार हजार से ज्यादा नुकसानदायक केमिकल पाए जाते हैं। सिगरेट में 40 ऐसे रसायन हैं, जो कैंसर की वजह बनते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
निकोटिन: यह लत लगाने वाला केमिकल है। काफी शक्तिशाली है और तेजी से रिऐक्शन करता है। सिगरेट की लत इसी की वजह से लगती है।

बेंजीन: इसमें कोयला और पेट्रोलियम जैसे ज्वलनशील पदार्थों का गुण होता है। यह सिगरेट के जले रहने में मदद करता है। इसकी वजह से ल्यूकेमिया हो सकता है।

फॉर्मल्डिहाइड: काफी जहरीला होता है। इसका इस्तेमाल शवों को सुरक्षित रखने में किया जाता है। इसकी वजह से कैंसर होने का खतरा रहता है।

अमोनिया: टॉयलेट क्लीनर और ड्रायक्लिनिंग लिक्विड में इस्तेमाल किया जाता है। यह तंबाकू से निकोटिन को अलग कर गैस में बदल देता है।

एसिटोन: इसका इस्तेमाल नेल पॉलिश हटाने में होता है। इसमें ज्वलनशील गुण होता है जो फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाता है।

टार: स्मोकिंग के समय धुएं के रूप में यह फेफड़े में जमा होता है। स्मोकिंग के दौरान जितनी टार बनती है, उसका 70 फीसदी फेफड़ों में जमा होता है। आर्सेनिक (चूहे मारने का जहर), हाइड्रोजन साइनाइड जैसे काफी जहरीले रसायन भी होते हैं।

धूम्रपान से खतरे:
-एक सिगरेट में 9 मिग्रा निकोटीन होता है, जो जलकर 1 ग्राम रह जाता
है। निकोटीन सीधा शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता लेकिन यह सैकड़ों केमिकल के साथ रिएक्शन कर टार बनाता है। यह टार फेफड़ों के ऊपर परत के रूप में चढ़ जाता है और बाद में उन्हें खत्म करने लगता है। अलग-अलग सिगरेट में निकोटीन का स्तर अलग-अलग होता है। सूखे हुए एक ग्राम तंबाकू में निकोटीन का स्तर 13.7 से 23.2 मिलीग्राम तक होता है।
* फेफड़ों का कैंसर : सबसे अधिक असर मनुष्य के फेफड़ों पर पड़ता है। 90 प्रतिशत फेफड़ों का कैंसर पुरुषों में और 80 प्रतिशत महिलाओं में होता है।

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मुँह का कैंसर : भारत वर्ष में कैंसर के मरीजों की कुल संख्या में 40 प्रतिशत मरीज मुँह के कैंसर से पीड़ित हैं जिसका एकमात्र कारण धूम्रपान एवं तंबाकू का सेवन है। मुँह का कैंसर अगर प्रारंभिक अवस्था में पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है।

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बर्जर डीसीज : अधिक धूम्रपान से पाँव की नसों में बीमारी पैदा हो जाती है। कभी-कभी तो पाँव भी काटना पड़ जाता है।

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हृदय रोग : स्ट्रोक व हार्ट अटैक की अधिक संभावना रहती है। धूम्रपान से उच्च रक्तचाप व कार्डियोवेस्कूलर बीमारियाँ अधिक होती हैं।

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मोतियाबिंद : धूम्रपान करने वालों में मोतियाबिंद होने की 40 प्रतिशत अधिक संभावना रहती है।

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बहरापन : धूम्रपान करने वाले की सुनने की शक्ति कम हो जाती है। बहरेपन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

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पेट की बीमारी : पेट में छाले हो जाते हैं, स्मोकर्स अल्सर का इलाज कठिन है एवं ये छाले बार-बार होते हैं।

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हड्डियों के रोग : आस्टियोपोरोसिस होता है, हड्डी की डेन्सिटी कम हो जाती है। फ्रेक्चर होने की स्थिति में हड्डी जुड़ने में 80 प्रतिशत अधिक समय लगता है।

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चेहरे पर झुर्रियाँ : धूम्रपान करने वाले की चेहरे की चमड़ी समय से पूर्व बूढ़ी हो जाती है क्योंकि चमड़ी का लचीलापन कम हो जाता है व आदमी उम्र से पहले बूढ़ा होने लगता है।

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मुँह के अन्य रो :अगर आप लम्बें समय से धुम्रपान कर रहे है तो अब आप अपने दांतों और मसूड़ो की ठीक से देख-रेख शुरू कर दिजिए। दरअसल धूम्रपान करने से दांत पीले होने के साथ-साथ मुंह से बास और मसूड़ों के खराब होने संबंधी बीमारियां पैदा होती है। एक सोध के अनुसार धुम्रपान ना करने वालों के मुकाबले धुम्रपान करने वालों के दांत ज्यादा कमजोर होते है और उनके टूटने की संभावना भी काफी अधिक होती है, साथ ही मसूड़ों में जलन और सूजन संबंधी दिक्कतें भी पैदा होती है।


निकोटिन की लत के लक्षण :
अगर नीचे दिए गए लक्षण नजर आने लगें तो समझ लेना चाहिए कि इंसान को निकोटिन की लत लग चुकी है।

-भूख कम महसूस होना।

-अधिक लार और कफ बनना।

-प्रति मिनट दिल की धड़कन 10 से 20 बार बढ़ जाती है तो यह लत का लक्षण है।

-छोटी बात पर भी बेचैनी महसूस होना।

-ज्यादा पसीना आना और उल्टी-दस्त होना।

-हर काम करने के लिए तंबाकू की जरूरत महसूस होना।

-निकोटीन लेने की इच्छा बढ़ जाना।

-चिंता बढ़ना, अवसाद, निराशा आदि महसूस होना।

-सिर दर्द होना और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होने लगे तो भी इसे निकोटिन की लत का लक्षण माना जाता है।

कैसे बनते हैं चेन स्मोकर
जब कोई सिगरेट या बीड़ी पीता है तो ब्रेन में लगभग 10 सेकंड और उसके बाद सेंट्रल नर्वस सिस्टम में 5 मिनट तक निकोटिन का असर रहता है। हालांकि स्मोकिंग करने से थोड़ी देर के लिए काम करने की क्षमता बढ़ती है, लेकिन बाद में शरीर सुस्त होने लगता है। धीरे-धीरे काम करने की क्षमता कम होती जाती है और फिर धूम्रपान की जरूरत महसूस होती है। बार-बार इस तलब को मिटाने की कोशिश में इंसान चेन स्मोकर हो जाता है।

निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरपी :
निकोटिन ही वह केमिकल है, जो बार-बार स्मोकिंग करने को मजबूर करता है। इससे मुक्ति पाने के लिए निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरपी दी जाती है। इसमें निकोटिन लॉजेंज (Nicotine Lozenges), ट्रांसडर्मल निकोटिन (Transdermal Nicotine), निकोटिन इनहेलर (Nicotine Inhaler), निकोटिन नेजल स्प्रे (Nicotine Nasal spray), निकोटिन गम्स (Nicotine Gums) का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा, निकोरेट-200 या 400 लिया जा सकता है। यह च्यूइंग-गम है। इन दवाओं को डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए। एक्सपर्ट के मुताबिक इन तमाम दवाओं को तब-तब लेने की सलाह दी जाती है, जब-जब सिगरेट की बहुत ज्यादा तलब महसूस हो। धीरे-धीरे इसे कम किया जाता है। बाद में स्मोकिंग की लत छूट जाती है। जो कभी-कभार शौकिया स्मोकिंग करते हैं, उन्हें इन दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

होमियोपैथी :
होमियोपैथी  में ये दवाएं दी जाती हैं, लेकिन इन्हें किसी विशेषज्ञ से पूछकर ही लेना चाहिए। डॉक्टर लक्षण और स्थिति के आधार पर ही दवा और डोज तय करते हैं।

-प्लैंटेगो मेजर (Plantago Major) निकोटिन की वजह से होने वाली सुस्ती और अनिदा से राहत दिलाती है।

-डैफ्ने इंडिका (Daphne Indica) तंबाकू और उससे बनी चीजों की इच्छा खत्म कर देती है।

-कैलेडियम सेग्विनम (Caladium Seguinum) तंबाकू लेने की इच्छा को खत्म कर देती है।

-टबैकम (Tabacum) तंबाकू लेने वाले को उस स्थिति में ला देती है कि तंबाकू लेने की इच्छा होने से उबकाई आने लगती है।

-इपिकॉक (Ipecac) ज्यादा उबकाई और उलटी होने पर फायदा करती है।

-आर्सेनिक अल्बम (Arsenic Album) तंबाकू चबाने के बुरे प्रभावों से राहत दिलाती है।

-नक्स वोमिका (Nux vomica) स्मोकिंग के बाद गैस्ट्रिक की स्थिति में राहत दिलाती है।

-फॉस्फोरस (Phosphorus) धड़कन बढ़ने और यौन शक्ति कमजोर पड़ने पर काम करती है।

आयुर्वेदिक दवाएं :
तंबाकू से संबंधित नशे से मुक्ति पाने के लिए नीचे लिखी आयुर्वेदिक दवाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इन दवाओं का इस्तेमाल करने से धूम्रपान करने वालों को काफी फायदा मिलता है।

-2 ग्राम फिटकरी का फूला, 3 ग्राम गोदंती भस्म और 15 पत्ते सत्व सत्यानाशी का मिश्रण बनाकर पाने के पत्ते में डालकर चबाएं।

-मुलहठी और शरपुंखा सत्व का मिश्रण कत्थे की तरह पान पर लगाकर 15 दिन तक रोज सुबह नाश्ते के बाद लें।

-4 ग्राम आमली चूर्ण, 10 ग्राम भुनी हुई सौंफ, 4 ग्राम इलायची के बीज, 4 ग्राम लौंग, 2 ग्राम मधुयष्ठी, 1 ग्राम सोनामाखी भस्म, 10 ग्राम सूखा आंवला, 7-8 खजूर और 20 मुनक्का मिलाकर पीस लें। एक पैकेट में अपने साथ रखें। जब नशे की तलब महसूस हो तो एक चुटकी मुंह में डाल लें। धीरे-धीरे नशे से मन हट जाएगा।
-बड़ी सौफ को घी में भुनकर चबाने से सिगरेट से नफरत होने लगती है। 
- ऐरोबिक से भी सिगरेट की तलब कम होती है।
- मुंह में गाजर, लौंग, इलायची, चिंगम जैसी वस्तु मुंह में रखें। इससे सिगरेट की तलब कम होती है।


वैकल्पिक तरीके:
ई-सिगरेट (इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट)
ई-सिगरेट के मामलों से जुड़े विशेषज्ञ अंकित गौड़ का कहना है कि इससे शत-प्रतिशत निकोटिन के जीरो लेवल तक पहुंच जाने का दावा तो नहीं किया जा सकता, लेकिन सिगरेट छोड़ने में इससे मदद जरूर मिलती है। इसमें कार्टेज में अलग-अलग स्तर में निकोटिन डाला जाता है। एक अध्ययन से पता चलता है कि जब कोई सिगरेट की 15 कश लेता है तो उसके अंदर 1 से 2 मिलीग्राम निकोटिन जमा होता है, जबकि ई-सिगरेट में 16 मिलीग्राम निकोटिन वाले कार्टेज का इस्तेमाल करने से इतनी ही कश लेने पर 0.15 मिलीग्राम निकोटिन जमा होता है। स्वास्थ के लिहाज से यह तरीका भी सही नहीं है क्योंकि इसके जरिए भी निकोटिन तो शरीर में जाता ही है। इसकी मदद से निकोटिन के स्तर को कम किया जा सकता है और धीरे-धीरे कोई स्मोकर निकोटिन के जीरो लेवल तक पहुंच सकता है। पान की दुकानों पर, दवा की दुकानों पर और इंटरनेट के जरिए इसे खरीदा जा सकता है। पूरी किट 1 से 2 हजार तक मिल जाती है। इससे इतनी कीमत में लगभग 500 सिगरेट पी जा सकती हैं।

हर्बल सिगरेट:
धूम्रपान छोड़ने के लिए हर्बल सिगरेट की भी मदद ली जा सकती है। आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाली कंपनियां हर्बल सिगरेट बना रही हैं। इनमें पुदीना, वाइल्ड लेटिस (सलाद पत्ता), कैट्रिनप (एक प्रकार की सुगंधित वनस्पति), कमल के पत्ते, मकई के रेशे, मुलेठी की जड़ें आदि के सूखे चूर्ण का इस्तेमाल होता है। जब धूम्रपान की तलब महसूस हो तो इसे इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें भी धुआं फेफड़े में जाता है, इसलिए पूरी तरह से इसे भी ठीक नहीं माना जा सकता। शौकिया तौर पर कभी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पांच से दस रुपये में आयुर्वेदिक दवाओं की दुकान पर मिल जाती है।

मुद्रा, ध्यान और योगाभ्यास:
किसी प्रकार की लत होने से व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। सिगरेट, तंबाकू, गुटखा, पान मसाला जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले भी अगर मुद्रा, ध्यान और योगाभ्यास करते हैं तो उनका आत्मबल बढ़ता है। ऐसे में इन लतों को त्याग पाने की इच्छा शक्ति उनके अंदर पैदा होती है।

ज्ञान मुद्रा
दाहिने हाथ के अंगूठे को तर्जनी के टिप पर लगाएं और बायीं हथेली को छाती के ऊपर रखें। सांस सामान्य रहेगा। सुखासन या पद्मासन में बैठकर भी इस क्रिया को किया जा सकता है। लगातार 45 मिनट तक करने से काफी फायदा मिलता है।

ध्यान
ध्यान करने से शरीर के अंदर से खराब तत्व बाहर निकल जाते हैं। एकाग्रता लाने के लिए त्राटक किया जाता है। इसमें बिना पलक झपकाए प्रकाश की लौ को लगातार देखने का अभ्यास किया जाता है। एक समय ऐसा आता है जब बस बिंदु दिखाई देता है। ऐसी स्थिति में कुछ समय तक रहने की कोशिश करनी चाहिए।

कुछ क्रियाएं
कुंजल क्रिया: नमक मिला गुनगुना पानी भरपेट पीकर इसकी उल्टी कर दें। इससे पेट के ऊपरी हिस्से का शुद्धिकरण हो जाता है।

बस्ती: इस क्रिया के माध्यम से शरीर के निचले हिस्से की सफाई की जाती है। इसे एनीमा भी कहते हैं।

अर्द्ध शंख प्रक्षालन: यह बड़ी आंत की सफाई और कब्ज मिटाने के लिए किया जाता है। इसमें चार लीटर गुनगुने पानी में स्वाद के मुताबिक नमक मिला लें। पानी को पांच भागों में बांटकर बारी-बारी से पीएं और क्रमश: कागासन, ताड़ासन, कटिचक्रासन, त्रियक, भुजंगासन, स्कंधासन नौ-नौ बार करें। क्रियाएं तब तक करें जब तक मल विसर्जन की जरूरत महसूस न हो। मल त्याग तब तक करें, जब तक उसकी जगह पानी न आने लगे। क्रिया के बाद ठंडे पानी का सेवन न करें। ठंडी हवा से बचें। मूंग दाल, चावल की खिचड़ी, शुद्ध घी में मिलाकर खाएं। खाते वक्त पानी न पीएं। कुंजल, बस्ती और अर्द्ध शंख प्रक्षालन हफ्ते में दो बार करने की सलाह दी जाती है। इन क्रियाओं को किसी योग प्रशिक्षक की देख-रेख में ही करना चाहिए।

खानपान:
नेचरल फूड खासकर फल और सब्जियों में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो धूम्रपान करने वाले के स्वास्थ्य को ज्यादा नुकसान होने से रोकते हैं। दूसरी तरफ, ये फल और सब्जियां स्मोकिंग छुड़ाने में भी मददगार होती हैं। इनमें विटामिन सी, विटामिन ए, जिंक और सेलेनियम पाए जाते हैं। नीचे दी गई चीजें खानपान में शामिल करनी चाहिए:

इन्हें लें:
-संतरा, नीबू, अंगूर, केले, सेव, अनानास, नाशपाती, पपीता, आम, अनार, नारियल।

-फूलगोभी, पत्तागोभी, मूली, पालक, गाजर, लहसुन, बेरी, मटर, स्ट्रॉबेरी, अंजीर, बीन, आलू, सोयाबीन, टमाटर, धनिया।

इनसे बचें:
उच्च वसा वाला खान: मीट, मक्खन, दूध व दूसरे डेरी प्रॉडक्ट। पहले का पका हुआ या पैकेटबंद भोजन जिसमें काफी मात्रा में फैट होता है।

कैफीन: कैफीन और दूसरे उत्तेजक पदार्थों का इस्तेमाल कम कर देना चाहिए। ये चीजें स्मोकिंग छोड़ने वालों में एंजाइटी बढ़ाती हैं।

इन पर भी ध्यान दें:
-धूम्रपान बंद करने और गुटखा चबाना छोड़ने के लिए पहले उसकी मात्रा कम करें।
-मन मे ठोस निश्‍चय करके कोई एक दिन निश्‍चित कर लें कि फलां दिन से वीडी सिग्रेट नही पिऐगें।

-सभी मित्रों और परिजनों से कहें कि आपने सिगरेट और गुटखा छोड़ दिया है। ऐसा करने से आपका दोस्त इसे लेने के लिए बाध्य नहीं करेगा।

-इन लतों को छोड़ने की वजहों को दिन में दो-चार बार दुहराएं।

-उत्प्रेरक के रूप में काम करने वाली आदतों को छोड़ें मसलन चाय, शराब, कॉफी लेने या भोजन के बाद सिगरेट या गुटखे की तलब।

-अपने पास लाइटर, माचिस, गुटखे की पुड़िया, तंबाकू रखना छोड़ दें।

-तनाव की स्थिति में घर या ऑफिस से बाहर टहलने न निकलें।

-सिगरेट या गुटखे की तलब हो तो कुछ पसंदीदा चीजें चबाएं।

-मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए दिन भर में पांच बार खाएं लेकिन थोड़ा-थोड़ा खाएं।

-अपने भोजन में नमक का ज्यादा इस्तेमाल न करें।

-क्षमता के मुताबिक रोजाना व्यायाम करें।
उपरोक्त बातो को अपने जीवन मे अपना कर आप सिग्रेट रुपी मीठे जहर से बच सकते हैं।
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स्मोकिंग इफेक्ट से बचाए 'स्मोकर्स डाइट'

स्मोकर्स डाइट स्मोकिंग से होने वाले साइड इफेक्ट्स को काफी हद तक कम कर देती है। अगर आप स्मोकिंग पर कंट्रोल नहीं कर पा रहे हें, तो हेल्दी रहने के लिए आपको स्मोकर्स डाइट को लेना बेहद जरूरी है:

अगर आपको स्मोकिंग की लत पड़ चुकी है, तो आपको होने वाली प्रॉब्लम्स से बचने के लिए आपको उसे छोड़ने की कोशिश करनी चाहिए। बेशक, आप ऐसा बखूबी कर सकते हैं, जरूरत है बस मेंटली प्रिपेयर होने। हो सकता है कि इसमें थोड़ा समय लग जाए, लेकिन आपको इसे लेकर परेशान नहीं होना चाहिए। दरअसल, तब आप स्मोकर्स डाइट लेकर सिगरेट के साइड इफेक्ट्स से जो बच सकते हैं।

एक्सपर्ट डॉ. विजय शुक्ला बताते हैं, 'स्मोकिंग करने से कैंसर, हार्ट डिसीज, स्ट्रोक, कोल्ड और कफ जैसी प्रॉब्लम्स हो जाती हैं। आमतौर पर ये दिक्कतें स्मोकिंग ज्यादा करने और न्यूट्रिशंस फूड कम खाने से होती हैं। स्मोकिंग के बाद बॉडी में विटामिन सी, ई, जिंक, कैल्शियम, फ्लोट और ओमेगा- थ्री की कमी हो जाती है। अगर वे खाने के जरिए इन चीजों को ले लेते हैं, तो बॉडी डैमेज होने के चांस कम हो जाते हैं।'

विटामिन सी
स्मोकिंग करने वाले इंसान के लिए विटामिन सी बेहद जरूरी है। इसलिए दिनभर में एक खट्टा फल जरूर खाएं। ऑरेंज, वॉटर मेलन और टोमैटो ये सभी विटामिन सी से भरपूर होते हैं। ये आप पर अटैक कर रही कई बीमारियों से लड़ने में आपकी मदद करते हैं। दरअसल, बॉडी में विटामिन सी की कमी होने से स्मोकिंग का बेहद नेगेटिव असर पड़ता है। इससे इम्यून सिस्टम वीक हो जाता है। रिसचर्स के मुताबिक, रोजाना 1000 मिलीग्राम विटामिन ई लेने से स्मोकिंग का रिस्क फैक्टर 45 फीसदी कम हो जाता है। यही नहीं, विटामिन सी स्मोकर्स में होने वाली कॉमन गम प्रॉब्लम से भी आपको बचाए रखता है।

ग्रीन टी
स्टडीज से पता चला है कि अगर आप रोजाना छह से सात कप ग्रीन टी पीते हैं, तो आपको स्मोकिंग से होने वाले साइड इफेक्ट्स 40 से 50 फीसदी कम हो जाते हैं। ग्रीन टी में एंटी ऑक्सिडेंट होते हैं, जो बॉडी को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। स्मोकिंग करने से बैड ब्रीथ की प्रॉब्लम हो जाती है। ऐसे में ब्रीथ को फ्रेश रखने में भी ग्रीन टी बेहद काम आती है। यही नहीं, ग्रीन टी कैंसर के रिस्क को भी कम करती है। यह इम्यून सिस्टम को भी ठीक रखती है, जिससे आप स्किन की प्रॉब्लम से भी बचे रहते हैं।

ग्रीन वेजीटेबिल
ग्रीन वेजीटेबिल्स में करोटिनॉयड्स नाम का एक खास तत्व होता है। हरी सब्जियों में मौजूद ये तत्व स्मोकर्स केलिए खास फायदेमंद है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्रीन वेजीटेबिल्स खाने से कैंसर का रिस्क 20 फीसदी कम होजाता है। इसलिए पालक और ब्रोकली जैसी सब्जियों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।

केप्सिकम
केप्सिकम्स एंटी ऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं। स्मोकिंग करने वालों की डाइट में इनका होना बेहद फायदेमंदहोता है। जहां तक हो सके, केप्सिकम्स को कच्चा खाने की कोशिश करें। इन्हें अधिक फ्राई व पकाएं नहीं।

लहसुन
सलाद, शोरबे व करी में लहसुन मिलाएं। अगर आपको इसकी स्मैल पसंद नहीं है, तो लहसुन की फांक कच्ची हीखा लें। लहसुन में ट्यूमर से लड़ने की ताकत होती है, जो स्मोकर्स के लिए जरूरी है। दरअसल, सिगरेट बॉडी मेंकार्सिनोमा नाम का जहरीला तत्व बनाता है, जिससे ट्यूमर बनता है। ऐसे में, लहसुन उससे लड़ता है।

विटामिन ई
स्मोकिंग करने से हार्ट अटैक होने के चांस बढ़ जाते हैं। दरअसल, स्मोकिंग बैड कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ाती है। तबविटामिन ई इस कॉलेस्टॉल को हार्मफुल होने से रोकता है। विटामिन ई सनफ्लॉवर सीड्स, ऑलमंड, ऑलिव्सऔर ग्रीन पत्तियों में बहुत क्वांटिटी में होता है।

ओमेगा थ्री एसिड्स
अगर आप रोजाना ओमेगा थ्री फैटी एसिड्स लेते हैं, तो आप स्मोकिंग के साइड इफेक्ट्स से काफी हद तक बचसकते हैं। ओमेगा थ्री में पाया जाने वाला पॉलिसैचुरिएट फैटी एसिड लंग्स के साथ दांतों व जबड़ों को भी ठीकबनाए रखता है।

पिएं खूब पानी
पानी ही एक ऐसी चीज है, जो आपकी बॉडी से निकोटिन और दूसरे केमिकल्स को बाहर करने में मदद करती है।इसलिए खूब सारा पानी पिएं। यही नहीं, पानी स्मोकिंग के मुंह में होने वाले इफेक्ट्स को भी काफी कम कर देताहै।

फिल्टर सिगरेट
अगर आप दिनभर में तीन से ज्यादा सिगरेट लेते हैं, तो फिल्टर सिगरेट यूज करें। फिल्टर लगा होने से आपकेलंग्स में निकोटिन की क्वांटिटी बेहद कम पहुंचती है। हालांकि यह नॉर्मल सिगरेट से थोड़ी महंगी होती है, लेकिनआपके रिस्क फैक्टर को काफी कम कर देती है।

महिलाएं लें हेल्दी फूड
जो महिलाएं स्मोकिंग करती हैं, उनके लिए हेल्दी फूड लेना बेहद जरूरी है। दरअसल, स्मोकिंग आपके बोंस परभी सीधे इफेक्ट डालती है। इसके सेवन से ऑस्टियोपोरेसिस, बोन में वीकनेस आना जैसी प्रॉब्लम्स आ जाती हैं।अगर आप हेल्दी डाइट लेती हैं, तो स्मोकिंग के इफेक्ट को कम कर सकती हैं। हेल्दी बोंस के लिए कैल्शियम,मैग्निशियम और विटामिन डी की भरपूर क्वांटिटी लेना जरूरी है।

इन्हें रखें याद
- रोजाना 20 से अधिक सिगरेट पीने वालों को हार्ट अटैक के चांस 5 गुना, 10 से 19 सिगरेट पीने से 3 गुना और5 से कम सिगरेट पीने से यह जोखिम 1.5 गुना बढ़ जाता है।
-एक सिगरेट जिंदगी के 11 मिनट कम कर देती है और सिगरेट के धुएं से हार्ट अटैक्स का खतरा 90 फीसदी बढ़जाता है।
- देश में स्मोकिंग करने वाली महिलाओं का औसत 1.5 फीसदी है।
-कॉल सेंटरों और टीवी चैनल में काम करने वाली तकरीबन 8 फीसदी महिलाएं सिगरेट की लत की शिकार हैं.
इन योगासनों से मिलती  है धूम्रपान से निजात:
योगासन: सर्वागासन (शोल्डर स्टैंड), सेतु बंधासन (ब्रिज मुद्रा), भुजंगासन (कोबरा पोज), शिशुआसन (बाल पोज)।
प्राणायाम: सहज प्राणायाम, भसीदा प्राणायाम, नाड़ी शोधन प्राणायाम (नोस्ट्रिल ब्रीदिंग तकनीक)।

बुधवार, 3 जुलाई 2013

स्वास्थ्य समाचार



१. मोटे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है एक्सरे
अगर आप मोटे हैं तो आपको अपनी चर्बी घटाने के लिये एक बार फिर से सोचना चाहिये। एक नये अध्ययन से पता चला है कि मोटे लोगों का सीटी स्कैन होने पर उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

२.उच्च रक्तचाप की समस्या 
उच्च रक्तचाप की समस्या से परेशान हैं तो दिन में कम से कम तीन बार काली चाय पीयें. यह आपके उच्च रक्तचाप को नीचे लाने में मददगार है। जो लोग दिन में तीन बार बिना दूध की चाय पीते हैं वे अपने रक्तचाप को औसतन दो से तीन प्वाइंट तक नियंत्रित करने में सफल रहते हैं। हो सकता है इतना नियंत्रण काफी न लगे लेकिन यह उच्च रक्तचाप के होने अथवा दिल की बीमारी के जोखिम को रोकने के लिये अत्यधिक प्रभावी है।

३. सॉफ्ट फूड मतलब दांतों की बीमारी
अगर आप सॉफ्ट फू़ड के शौकीन है और किसी भी कीमत पर उसे छोड़ना नहीं चाहते तो यह ख़बर आपको चौंका देगी। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है दांतों में होने वाली बीमारियों की वजह सॉफ्ट फूड हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि सॉफ्ट फूड खाने वालों के जबड़े की वृद्धि प्रभावित होती है। इन लोगों का जबड़ा उनके दांत के मुकाबले छोटा रह जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि आधुनिक आहारों को लेते वक्त जोर से चबाने की जरूरत नहीं पड़ती है, जिससे जबड़े पर कम दबाव पड़ता है। ऐसे में जबड़े का विकास कम हो पाता है।

४. नशे की लत से सिकुड़ जाता है दिमाग
एक अध्ययन से पता चला कि प्रौढ़ावस्था के व्यसन आपके दिमाग को छोटा कर देते हैं. धूम्रपान और मद्यसेवन जैसे प्रौढ़ावस्था के व्यसनों के कारण दिल को ही नुकसान नहीं पहुंचता बल्कि इससे दिमाग का आकार भी सिकुड़ जाता है. 

५. किशोरों को बना देगा बहरा सिगरेट का धुआं
अब संभल जाए सिगरेट पीने वाले, सिगरेट का धुआं किशोरों में सुनने की शक्ति कम कर देता है. एक नए शोध से यह पता चला है.सिगरेट के धुएं से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत असर को लेकर आपको पहले से ही पता होगा, लेकिन अब एक नए अध्ययन के अनुसार सिगरेट के धुएं की चपेट में आए किशोरों में सुनने को खतरा अन्य लोगों के मुकाबले दोगुना होता है।

६. गूगल कर रहा है आपकी याददाश्त कमजोर
वैसे तो सर्च इंजन गूगल अपने अंदर दुनिया भर का ज्ञान समेटे हुए है लेकिन ज़रा सोचिए इस पर अपनी आत्मनिर्भरता बढ़ाना कहां तक सही है। अगर गूगल पर आप कोई जानकारी ढूंढने जा रहे हैं तो दोबारा सोचिए। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि इंटरनेट सर्च इंजन से लोगों की याददाश्त कमजोर होती है। कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि कंप्यूटर पर लोगों की बढ़ती निर्भरता से उनका दिमाग संकुचित हो रहा है।

७. सुंदर बच्चा चाहिए तो नारियल खाइए
अक्सर जिनेक घरों में बड़े-बूढ़े लोग होते हैं और उनके घर में कोई महिला मां बनने वाली होती है तो अक्सर सुना जाता है कि महिला को नारियल खिलाओं ताकि बच्चा या बच्ची का रंग गोरा हो। जानते हैं इसके पीछे कारण क्या हैं, नारियल के पानी में इतनी ताकत होती है जितनी की सोयाबीन में, इसके अलावा नारियल में बहुत ज्यादा पोटेशियम होता है जो कि बच्चे की त्वचा और बाल के लिए अच्छा होता है।

८. दिमाग को रखिए चुस्त, रहिए डिमेंशिया से मुक्त
कहते हैं कि इंसान का शरीर एक मशीन की तरह काम करता है। जिस तरह वक्त के साथ मशीन के पुर्ज़े कमजो़र होने लगते हैं ठीक उसी तरीके से उम्र के साथ धीरे धीरे इंसान की याद्दाशत भी कमजो़र होने लगती है। और इस बिमारी को मेडिकल की भाषा में डिमेंशिया नाम से जाना जाता है। शहरों में डिमेंशिया बहुत ही तेज़ी से ज़्यादातर उम्रदराज लोगों के बीच फ़ैल रहा है। 30 से 40 प्रतिशत ये बिमारी उन लोगों में देखने को मिल रही है जिनकी उम्र 70 साल से ज़्यादा है।

९. आपके मधुमेह के लिए आपकी मां जिम्मेदार
अगर आप को मधुमेह है तो इसके पीछे आपकी मां जिम्मेदार हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे यह बात कही है कुछ वैज्ञानिकों ने जिन्हें यह सबूत मिला है कि गर्भावस्था में माँ को पौष्टिक आहार न मिलने से बच्चे में बड़े होने पर मधुमेह का ख़तरा होता है। शोधकर्ताओं ने पहले चूहों पर इसका शोध किया और फिर यह दावा किया कि मां के असंतुलित आहार के कारण बच्चे में इन्सुलिन बनाने वाले एक जीन पर असर होता है।

१० . एक आयुर्वेदिक पौधा और डायबिटीज गायब 
अगर आपको डायबिटीज है और आप मीठा नहीं खा पाते हैं, तो सुनिए अब आप मीठा खा पाएंगे । जी हाँ चौकियेगा मत! ऐसा हम नहीं कह रहे है डायबिटीज की बीमारी से बचाव के लिए शोधकर्ताओं ने एक आयुर्वेदिक पौधा खोज निकाला है जो इस खतरनाक बीमारी से राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। इस पौधे का नाम स्टीविया है।शोधकर्ताओं के अनुसार डायबिटीज के मरीज मीठा खाने के तुरंत बाद आयुर्वेदिक पौधे स्टीविया की कुछ पत्तियों को चबा ले, जिससे मीठा खाना जहर नहीं बनेगा।

११. वॉवेल गाओ, खर्राटा दूर भगाओ
खर्राटे लेने की समस्या इन दिनों बहुत ही आम हो गई है। धीरे-धीरे यह और भी भयावह रूप लेता जा रहा है। इसका मुख्य कारण श्वास नली में चर्बी का बढ़ जाना है। यह हमारी नींद खराब करते हैं और कम नींद लेने का परिणाम होता है दिनभर की थकान, चिड़चिड़ापन और स्वास्थ्य सम्बन्धी कई और समस्याएं।(a,e,i,o,u) 

गुरुवार, 30 मई 2013

सर्वगुण सम्पन्न :पुदीना



आइये आज हम सब पोदीने के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं.पोदीना एक प्रकार की घास है, जिसके पत्ते गोल छोटे और खुशबूदार होते हैं, यह जमीन के ऊपर फैलता है।पोदीना का लेटिन नाम मेन्था स्पाइकेटा है। पुदीना बहुत ही स्वादिष्ट और रिफ्रेशिंग होता है। यह विटामिन ए से भरपूर होने के साथ-साथ बहुत ही गुणकारी भी है। यह स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी होता है। यह पेट के विकारों में काफी फायदेमंद होता है।पोदीना धातु के लिए हानिकारक होता है। पित्तकारक प्रकृति होने के कारण पित्त प्रवृति के लोगों को पोदीने का सेवन कम मात्रा में कभी-कभी ही करना चाहिए।पोदीना भारी, मधुर, रुचिकारी, मलमूत्ररोधक, कफ, खांसी, नशा को दूर करने वाला तथा भूख को बढ़ाने वाला है। पोदीने में कैलोरी ,प्रोटीन, पोटेशियम, थायमिन, कैल्शियम, नियोसीन, रिबोफ्लेविन, आयरन, विटामिन-ए,बी ,सी डी और इ, मेन्थाल, टैनिन आदि रासायनिक घटक पाए जाते हैं।इसे तो देखते ही ठंडक दिल में उतर जाती है.पोदीना है बड़े काम की चीज ,कई सारे रोग आप इससे दूर भी कर सकते हैं.
पोदीने की उपयोगिता:

१.पोदीने का रस कृमि (कीड़े) और वायु विकारों (रोगों) को नष्ट करने वाला होता है। पोदीने के ५ मिलीलीटर रस में नींबू का 5 मिलीलीटर रस और 7-8 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से उदर (पेट) के रोग दूर हो जाते हैं।


२.२ चम्मच पुदीने का रस, 1 चम्मच नींबू का रस और २ चम्मच शहद को मिलाकर सेवन करने से पेट के रोग दूर होते हैं। 


३.100 मिलीलीटर पुदीना का रस गर्म करके, ९ ग्राम शहद और लगभग ६ ग्राम नमक को मिलाकर पीने से उल्टी होकर पेट की बीमारी ठीक हो जाती है।

४.हरा धनिया, पोदीना, कालीमिर्च, अंगूर या अनार की चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस मिलाकर खाने से अरुचि (भूख का न लगना) समाप्त होती है और पाचन क्रिया तेज होने से भूख भी अधिक लगती है।

५.५-५ ग्राम पोदीना, लोहबान और अजवायन का रस, ५ ग्राम कपूर और ५ ग्राम हींग को २५ ग्राम शहद में मिलाकर एक साफ शीशी में भरकर रख लें, फिर पान के पत्ते में चूना-कत्था लगाकर शीशी में से ४ बूंदे इस पत्ते में डालकर खाने से गले का दर्द दूर होता है।

६.शराब के अंदर पुदीने की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग, धब्बे, झांई सब मिट जाते हैं और चेहरा चमक उठता है।


७.पुदीना के रस को शहद के साथ पन्द्रह दिनों तक सेवन करने से पीलिया में लाभ होगा। पोदीने की चटनी नित्य रोटी के साथ खाने से पीलिया में लाभ होता है।

८.५0 ग्राम पोदीने को पीसकर उसमें स्वाद के अनुसार सेंधानमक, हरा धनिया और कालीमिर्च को डालकर चटनी के रूप में सेवन करने से निम्न रक्तचाप में  लाभ होता है।

९.हरे पोदीने को पीसकर कम से कम २0 मिनट तक चेहरे पर लगाने से चेहरे की गर्मी समाप्त हो जाती है।

१०.गठिया के रोगी को पोदीने का काढ़ा बनाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है और गठिया रोग में आराम मिलता है।

११.२ चम्मच पुदीने की चटनी शक्कर में मिलाकर भोजन के साथ खाने से मूत्र रोग में  लाभ होता है।

१२.पोदीने की पत्तियों को थोड़े-थोड़े समय के बाद चबाते रहने से मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है। पोदीने की १५-२०हरी पत्तियों को १ गिलास पानी में अच्छी तरह उबालकर उस पानी से गरारे करने से भी मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है।

१३.पोदीने के पत्तों को पीसकर किसी जहरीले कीड़े के द्वारा काटे हुए अंग (भाग) पर लगाएं और पत्तों का रस २-२ चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार रोगी को पिलाने से आराम मिलता है।

१४.पोदीने की पत्तियों को पीसकर गाढ़े लेप को सोने से पहले चेहरे पर अच्छी तरह से मल लें। सुबह चेहरा गर्म पानी से धो लें। इस लेप को रोजाना लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे, झांइयां और फुंसियां दूर हो जाती हैं और चेहरे पर निखार आ जाता है।

१५.बेहोश व्यक्ति को पुदीना की खुशबू सुंघाने से बेहोशी दूर हो जाती है। पोदीने के पत्तों को मसलकर सुंघाने से बेहोशी दूर हो जाती है।

१६.पेट दर्द :
  • २ चम्मच पोदीने के पत्तों का सूखा चूर्ण और 1 चम्मच मिश्री या चीनी मिलाकर सेवन करने से पेट के दर्द में आराम होता है।
  • सूखा पोदीना और चीनी को बराबर मात्रा में मिलाकर २ चम्मच की फंकी लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता है।
  • ५-५ मिलीलीटर पोदीना का रस, अदरक का रस और 1 ग्राम सेंधानमक को मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द दूर हो जाता है।
  • ५ मिलीलीटर पोदीने का रस और ५ मिलीलीटर अदरक के रस को मिलाकर, उसमें थोड़ा-सा सेंधानमक डालकर सेवन करने से उदर शूल (पेट में दर्द) समाप्त हो जाता है।
  • पोदीना के ७ पत्ते और छोटी इलायची का 1 दाना पानी के पत्ते में लगाकर खाने से पेट में होने वाले दर्द में लाभ करता है।
  • पोदीना के पत्तों का शर्बत पीने से पेट का दर्द समाप्त हो जाता है। 4 ग्राम पुदीने में आधा-आधा चम्मच सौंफ और अजवायन, थोड़ा-सा कालानमक और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग हींग को मिलाकर बारीक मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें, इस बने चूर्ण को गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट में होने वाले दर्द में लाभ होता है।
  • 3 ग्राम पोदीना, जीरा, हींग, कालीमिर्च और नमक आदि को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
  • पोदीना, सौंफ, सोंठ और गुलकंद को अच्छी तरह पीसकर पानी में उबालकर दिन में 3 बार रोजाना खुराक के रूप में पीने से पेट के दर्द और कब्ज की शिकायत दूर होती है।
  • 2 चम्मच सूखे पुदीने को काले नमक के साथ सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
  • सूखा पोदीना और चीनी को बराबर मात्रा में पीसकर रख लें, फिर २ चम्मच को फंकी के रूप में गर्म पानी के साथ पीने से पेट के दर्द में लाभ होता है। 
१७.पोदीना १० ग्राम और २0 ग्राम गुड़ को 100 मिलीलीटर पानी में उबालकर पीने से बार-बार पित्ती निकलना ठीक हो जाती है। पोदीने को पानी के साथ काढ़ा बनाकर थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर खाने से पित्त में बहुत ही लाभ होता है।

१८.पेट के गैस :

  • ४ चम्मच पोदीने के रस में 1 नींबू का रस और २ चम्मच शहद मिलाकर पीने से गैस के रोग में आराम आता है।
  • सुबह 1 गिलास पानी में २५ मिलीलीटर पोदीना का रस और 30 ग्राम शहद मिलाकर पीने से गैस समाप्त हो जाती है।
  • ६० ग्राम पोदीना, 10 ग्राम अदरक और ८ ग्राम अजवायन को 1 गिलास पानी में डालकर उबाल लें। उबाल आने पर इसमें आधा कप दूध और स्वाद के अनुसार गुड़ मिलाकर पीएं। चौथाई कप पोदीने का रस आघा कप पानी में आधा नींबू निचोड़कर ७ बार उलट-उलट कर पीने से भी गैस से होने वाला पेट का दर्द तुरंत ठीक हो जाता है।
  • पोदीने की ताजी पत्ती, छुहारा, कालीमिर्च, सेंधानमक, हींग, कालीद्राक्ष (मुनक्का) और जीरा इन सबकी चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस निचोड़कर खाने से भोजन के प्रति रुचि उत्पन्न होती है, स्वाद आता है, गैस दूर होकर भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है और मुंह का फीकापन दूर होता है।
  • 20 मिलीलीटर पोदीने का रस, 10 ग्राम शहद और ५ मिलीलीटर नींबू के रस को मिलाकर खाने से पेट के वायु विकार (गैस) समाप्त हो जाते हैं।
  • पुदीने की पत्तियों का २ चम्मच रस, आधा नींबू का रस मिलाकर पीने से लाभ होता है। 
१९.पोदीने का रस रोगी को पिलाने से आंतों के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

२०.बिच्छू के काटने पर पोदीने का लेप करने और पानी में पीसकर रोगी को पिलाने से लाभ होता है।पोदीने का रस पीने से या उसके पत्ते खाने से बिच्छू के डंक मारने से होने वाला कष्ट दूर होता है।

२१.लू का लगना:
  • लगभग २० पोदीने की पत्तियां, लगभग 3 ग्राम सफेद जीरा और २ लौंग मिलाकर इन सबको पीसकर जल में घोलकर, छानकर रोगी को पिलाने से लू से होने वाली बेचैनी खत्म हो जाती है।
  • लगभग १५० मिलीलीटर पोदीने के रस को इतने ही ग्राम पानी के साथ पीने से लू से होने वाले खतरों से बचा जा सकता है।
  • सूखा पोदीना, खस तथा बड़ी इलायची लगभग ५०-५०ग्राम की बराबर मात्रा में लेकर कूट लें और इसका चूर्ण बना लें, फिर इसे एक लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को ठंडा करके लगभग १०० मिलीलीटर की मात्रा में पीने से लू ठीक हो जाती है। 
२२.घबराहट व बैचेनी में पोदीने का रस लाभदायक होता है।

२३.पुदीने के रस में नींबू का रस मिलाकर, पानी में डालकर पिलाने से यकृत वृद्धि मिट जाती है।

२४.जंगली पुदीना और हंसराज दोनों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सेवन करने से प्रजनन में दर्द नहीं होता है।

२५.कफ (बलगम) होने पर चौथाई कप पोदीने का रस इतने ही गर्म पानी में मिलाकर रोज 3 बार पीने से कफ में लाभ होता है।
२६.1 कप पानी में पुदीने की चटनी बनाकर, थोड़ी-सी चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त के कारण पेट में होने वाली जलन को शांत होती है।

२७.3 ग्राम पोदीने के रस में हींग, जीरा, कालीमिर्च और थोड़ा सा नमक डालकर गर्म करके पीने से पेट के दर्द और अरुचि (भोजन की इच्छा न होना) रोग ठीक हो जाते हैं।

२८.पोदीने की पत्तियों और कालीमिर्च को मिलाकर गर्म-गर्म चाय रोगी को पिलाने से सर्दी-खांसी, जुकाम, दमा और बुखार में आराम मिलता है।

२९.आधा कप पोदीने का रस दिन में २ बार नियमित रूप से कुछ दिनों तक पिलाते रहने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
३०.४-६ मुनक्का के साथ १० पोदीने की पत्तियां सुबह-शाम खाने के बाद नियमित रूप से चबाते रहने से बदहजमी में आराम मिलेगा। 

३१.चौथाई कप पोदीना का रस इतने ही पानी में मिलाकर रोजाना 3 बार पीने से खांसी, जुकाम, कफ-दमा व मंदाग्नि में लाभ होता है।

३२.जुकाम:
  • पोदीना, कालीमिर्च के पांच दाने और नमक इच्छानुसार डालकर चाय की भांति उबालकर रोजाना तीन बार पीने से जुकाम, खांसी और मामूली ज्वर में लाभ मिलता है।
  • पोदीने के रस की बूंदों को नाक में डालने से पीनस (जुकाम) के रोग में लाभ होता है।
  • पोदीने की चाय बनाकर उसके अंदर थोड़ा-सा नमक डालकर पीने से खांसी और जुकाम में लाभ मिलता है।
  • पोदीने के रस की 1-2 बूंदे नाक में डालने से पीनस (जुकाम) रोग नष्ट हो जाता है। 


३३.चोट लग जाने से रक्त जमा हो जाने (गुठली-सी बन जाने पर) पुदीना का अर्क (रस) पीने से गुठली पिघल जाती है।पोदीने का रस पिलाने से जमा हुआ खून टूटकर बिखर जाता है।सूखा पोदीना पीसकर फंकी लेने से खून का जमाव बिखर जाता है।

३४.२० हरे पुदीना की पत्तियां, ५ ग्राम जीरा और थोड़ी-सी हींग, कालीमिर्च के 10 दाने, चुटकीभर नमक को मिलाकर चटनी बनाकर 1 गिलास पानी में उबालें जब पानी आधा गिलास शेष रह जाए, तो छानकर पीने से अपच में लाभ होता है।

३५.पुदीने के पत्तों को पीसकर पोटली बनाकर जख्म पर बांधने से घाव के कीड़े मर जाते हैं।

३६.पुदीना के पत्तों का अधिक मात्रा में बार-बार सेवन करने से माहवारी शुरू हो जाती है। इसे चाहे जिस रूप में सेवन किया जाए या इसके पत्तों को पीस-घोलकर या मिश्री मिलाकर शर्बत के रूप में सेवन करना चाहिए।
३७.पुदीने की चटनी कुछ दिनों तक लगातार खाने से मासिक-धर्म नियमित हो जाता है। 

३८.कान के अंदर अगर बहुत ही बारीक कीड़ा चला जाये तो कान में पुदीने का रस डालने से कान का कीड़ा समाप्त हो जाता है।कान में दर्द हो तो पोदीना का रस डालें या हरी मकोय का रस कान में डालना चाहिए।

३९.पुदीना का रस लगभग ३० मिलीलीटर प्रत्येक ६ घंटे पर गर्भवती स्त्री को सेवन कराने से जी का मिचलाना बंद हो जाता है।
४०.पुदीना को पानी से पीसकर घोल बनाकर दिन में 3 से ४ बार कुल्ला करने से मुंह से दुर्गंध व अन्य रोग भी ठीक होते हैं।

४१.हिचकी:
  • पोदीने के पत्तों को चूसने और पत्तों को नारियल (खोपरे) के साथ चबाकर खाने से हिचकी दूर होती है।
  • पोदीने के पत्ते या नींबू को चूसने या पोदीने के पत्तों को शक्कर (चीनी) में मिलाकर चबाने से हिचकी का आना बंद हो जाता है।
  • पुदीना के सूखे और हरे पत्ते को शक्कर के साथ चबाने से हिचकी नहीं आती है।
  • २ मिलीलीटर हरे पुदीने के रस में २ ग्राम चीनी मिलाकर चबाने से हिचकी मिट जाती है।
  • पुदीने के पत्ते को मिश्री के साथ खाने से हिचकी मिट जाती है।
  • पुदीना के रस को हिचकी में पीने से लाभ होता है।
  • हिचकी बंद न हो तो पुदीने के पत्ते या नींबू चूसें। पुदीने के पत्तों पर शक्कर डालकर हर दो घंटे में चबाने से हिचकी में फायदा होता है।
  • 1-1 गोली पुदीना खाना-खाने के बाद सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।
  • 1 चम्मच पुदीने का रस, 1 चम्मच नींबू का रस और 1 चम्मच शक्कर आदि तीनों को एक साथ मिलाकर पीने से हिचकी नहीं आती है। 
४२.पोदीना १० या २० ग्राम को २०० मिलीलीटर पानी में उबालकर छानकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है।

४३.सिर पर हरे पोदीने का रस निकालकर लगाने से सिर दर्द दूर हो जाता है। 

४४.हैजा:
  • पोदीने का रस पीने से हैजा, खांसी, वमन (उल्टी) और अतिसार (दस्त) के रोग में लाभ होता है। इससे पेट में से गैस और कीड़े भी समाप्त हो जाते हैं।
  • हैजा होने पर पोदीना, प्याज और नींबू का रस मिलाकर रोगी को देने से लाभ मिलता है।
  • किसी व्यक्ति को हैजा होने पर उस व्यक्ति को प्याज का रस पिलाने से हैजे के रोग में आराम आता है।
  • २५ पुदीने की पत्तियां, ५ कालीमिर्च, काला-नमक २ चुटकी, २ भुनी हुई इलायची, 1 चोई इमली पकी। इन सब चीजों में पानी डालकर चटनी बना लें। इस चटनी को बार बार रोगी को चाटने के लिए दें।
  • पोदीना की ३० पत्तियां, कालीमिर्च के दाने 3 नग, कालानमक 1 ग्राम, भुनी हुई २ छोटी इलायची, कच्ची अथवा पकी इमली 1 ग्राम इन सबको पानी के साथ पीसकर चटनी-सी बना लें। यह चटनी हैजे के रोगी को चटाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त तथा प्यास आदि विकार दूर हो जाते हैं।
  • 10-10 मिलीलीटर पोदीने, प्याज और नींबू का रस मिलाकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोगी को पिलाने से हैजे के रोग में बहुत लाभ होता है। इससे वमन (उल्टी) भी जल्दी बंद हो जाती है। 
४५.पोदीना, तुलसी, कालीमिर्च और अदरक का काढ़ा पीने से वायु रोग (वात रोग) दूर होता है और भूख भी बहुत लगती है।

४६.पुदीने को पीसकर प्राप्त रस को 1 चम्मच की मात्रा में लेकर 1 कप पानी में डालकर पीने से दस्त कम हो जाते हैं.

४७.हरा पोदीना, सूखा धनिया और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर चबायें और लार को नीचे टपकायें। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

४८.पोदीने को सुखाकर बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसे स्त्री को संभोग (सहवास) करने से पहले लगभग 10 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ पिलाने से स्त्री का गर्भ नहीं ठहरता हैं। ध्यान रहे कि जब गर्भाधान अपेक्षित हो तो इस चूर्ण का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

४९.वमन (उल्टी):
  • ४ पोदीने के पत्ते और २ आम के पत्तों को लेकर 1 कप पानी में डालकर उबालने के लिए रख दें। जब उबलता हुआ पानी आधा बाकी रह जाए तो उस पानी में मिश्री डालकर काढ़े की तरह पीने से उल्टी ठीक हो जाती है।
  • ६ मिलीलीटर पोदीने का रस और लगभग लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक मिलाकर पीस लें इसे ताजे पानी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
  • अगर पेट के खराब होने की वजह से छाती भारी-भारी लग रही हो और बेचैनी के कारण उल्टी हो रही हो तो 1 चम्मच पुदीने के रस को पानी के साथ पिलाने से लाभ होता है।
  • २-२ ग्राम पोदीना, छोटी पीपल और छोटी इलायची को एक साथ मिलाकर खाने से उल्टी होना बंद हो जाती है।
  • 10 बूंद पुदीने के रस को पानी में मिलाकर उसमें शक्कर डालकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
  • पुदीना के पत्तों का शर्बत दिन में कई बार पीने से उल्टी और जी मिचलाना (उबकाई) आदि रोग दूर होते हैं।
  • पोदीने का रस और नींबू के रस को बराबर मात्रा में दिन में 1 चम्मच की मात्रा में ३-४ बार रोगी को पिलाने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
  • पोदीना को नींबू के साथ देने से उल्टी आना बंद हो जाती है। आधा कप पोदीना का रस २-२ घण्टे के अंतराल में पिलाते रहने से लाभ उल्टी, दस्त और हैजा में मिलता है। 
५०.पोदीना और इमली को पीसकर उसमें सेंधानमक या शहद मिलाकर खाने से खट्टी डकारे और उल्टी आना शांत हो जाती है।

५१.अफारा (गैस का बनना):
  • पोदीना के ५ मिलीलीटर रस में थोड़ा-सा सेंधानमक मिलाकर सेवन कराने से आध्यमान (अफारा) ठीक हो जाता है।
  • पोदीने का रस ५० मिलीलीटर, मिश्री ५ ग्राम और २ ग्राम यवक्षार मिलाकर खाने से आध्यमान (अफारा, गैस) दूर हो जाता है।
  • पोदीने के पत्तों का शर्बत बनाकर पीने से अफारा में लाभ होता है।
५२.पोदीना का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से आंतों की खराबी और पेट के रोग मिटते हैं। आंतों की बीमारी से पीड़ित रोगियों के लिए पोदीने के ताजे रस का सेवन करना बहुत ही लाभकारी है।

५३.पोदीना और अदरक का रस या काढ़ा पीने से शीतज्वर मिट जाता है। इससे पसीना निकल आता है और हर प्रकार का ज्वर मिट जाता हैं। गैस और जुकाम के रोग में भी यह काढ़ा बहुत लाभ पहुंचाता है।

५४.पोदीना, राम तुलसी (छोटे और हरे पत्तों वाली तुलसी) और श्याम तुलसी (काले पत्तों वाली तुलसी) का रस निकालकर उसमें थोड़ा-सा शक्कर (चीनी) मिलाकर सेवन करने से टायफाइड (मोतीझारा) के रोग में लाभ होता है।

५५.पोदीना का ताजा रस शहद के साथ मिलाकर हर 1 घंटे के बाद देने से न्युमोनिया (त्रिदोषज्वर-वात, पित्त और कफ) से होने वाले अनेक विकारों (बीमारियों) की रोकथाम करता है और बुखार को समाप्त करता है।

५६.पोदीने के रस को मुल्तानी मिट्टी में मिलाकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की झांइयां समाप्त हो जाती हैं और चेहरे की चमक बढ जाती है।

५७.दाद:शरीर के किसी भाग में दाद होने पर उस भाग पर पोदीने के रस को 1 दिन में २-३बार दाद पर लगाने से लाभ मिलता है। 

५८.बुखार:
  • पुदीना और तुलसी का काढ़ा बनाकर रोजाना पीने से आने वाला बुखार रुक जाता है।
  • पोदीने और अदरक को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें, फिर इसे छानकर दिन में २ बार पीने से बुखार ठीक हो जाता है। प्रतिश्याय (जुकाम) में भी इससे बहुत लाभ होता है।
  • पुदीना के पत्तों और मिश्री को मिलाकर शर्बत बनाकर बार-बार पीने से कफ के साथ-साथ बुखार में आराम मिलता है। 
५९.चेहरे की त्वचा अधिक तैलीय होने पर रोजाना पोदीने का रस रूई के साथ चेहरे पर लगाने से त्वचा का तैलीयपन कम होता है और चेहरे का सौंदर्य भी बढ़ता है।

६०.पुदीने में विटामिन-ई पाया जाता है, जो शरीर की शिथिलता (कमजोरी) और वृद्धावस्था (बुढ़ापे) को आने से रोकता है। इसके सेवन करने से नसे भी मजबूत होती हैं।

६१.पुदीना चबाकर खाने से दांतों के बीच छिपे भोजन के कण दूर होते हैं और मुंह की सफाई भी हो जाती है।

रविवार, 26 मई 2013

वास्तु और स्वास्थ्य

वास्तु का भी हमारे जीवन में विशेष प्रभाव रहता है.मानसिक हालत कमजोर होने की स्थिति में हम डिप्रेशन या अवसाद का शिकार हो जाते हैं। ऐसा होने पर व्यक्ति के विचारों, व्यवहार, भावनाओं और दूसरी गतिविधियों पर असर पड़ता है। डिप्रेशन से प्रभावित व्यक्ति अक्सर उदास रहने लगता है, उसे बात-बात पर गुस्सा आता है, भूख कम लगती है, नींद कम आती है और किसी भी काम में उसका मन नहीं लगता। लंबे समय तक ये हालत बने रहने पर व्यक्ति मोटापे का शिकार बन जाता है, उसकी ऊर्जा में कमी आने लगती है, दर्द के एहसास के साथ उसे पाचन से जुड़ी शिकायतें होने लगती हैं। कहने का मतलब यह है कि डिप्रेशन केवल एक मन की बीमारी नहीं है, यह हमारे शरीर को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। डिप्रेशन के शिकार किसी व्यक्ति में इनमें से कुछ कम लक्षण पाए जाते हैं और किसी में ज्यादा।
आमतौर पर शरीर में बीमारी होने पर हम उसके बायोलॉजिकल, मनोवैज्ञानकि या सामाजिक कारणों पर जाते हैं। यहां पर आज हम बीमारियों के उस पहलू पर गौर करेंगे, जो हमारे घर के वास्तु से जुड़ा है। कई बीमारियों की वजह घर में वास्तु के नियमों की अनदेखी भी हो सकती है। अगर आप इन नियमों को जान लेंगे और उनका पालन करना शुरू करेंगे तो आपको इन बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है।

  1. जैसे वास्तु में यह माना जाता है कि अगर आप दक्षिण दिशा में सिर करके सोते हैं तो आपके स्वास्थ्य में सुधार होता है। जहां तक करवट का सवाल है तो वात और कफ प्रवृत्ति के लोगों को बाईं और पित्त प्रवृत्ति वालों को दाईं करवट लेटने की सलाह दी जाती है। 
  2. सीढ़ियों का घर के बीच में होना स्वास्थ्य के लिहाज से नुकसान देने वाला होता है, इसलिए साढ़ियों को बीच के बजाय किनारे की ओर बनवाएं। 
  3. इसी तरह भारी फर्नीचर को भी घर के बीच में रखना अच्छा नहीं माना जाता। इस जगह में कंक्रीट का इस्तेमाल भी वास्तु के अनुकूल नहीं होता। दरअसल घर के बीच की जगह ब्रह्मस्थान कहलाती है, जहां तक संभव हो तो इस जगह को खाली छोड़ना बेहतर होता है।
  4.  घर के बीचोबीच में बीम का होना दिमाग के लिए नुकसानदायक माना जाता है। 
  5. वास्तु के नियमों के हिसाब से बीमारी की एक बड़ी वजह घर में अग्नि का गलत स्थान भी है। जैसे कि अगर आपका घर दक्षिण दिशा में है, तो इसी दिशा में अग्नि को न रखें।
  6.  रोशनी देने वाली चीज को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना स्वास्थ्य के लिए शुभ माना जाता है। घर में बीमार व्यक्ति के कमरे में कुछ सप्ताह तक लगातार मोमबत्ती जलाए रखना भी उसके स्वास्थ्य के लिए शुभ होता है।
  7. अगर घर का दरवाजा भी दक्षिण दिशा में है, तो इसे बंद करके रखें। यह दरवाजा लकड़ी का और ऐसा    होना चाहिए, जिससे सड़क अंदर से न दिखे।
  8. घर में किचन की जगह का भी हमारे स्वास्थ्य से संबंध होता है। दक्षिण-पश्चिम दिशा में किचन होने से  व्यक्ति अवसाद से दूर रहता है। 
  9. घर के मुख्य द्वार से यदि रसोई कक्ष दिखाई दे तो घर की स्वामिनी का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है और उसके बनाए खाने को भी परिवार के लोग ज्यादा पसंद नहीं करते हैं।यदि आपकी रसोई बड़ी है तो आपको रसोई घर में बैठ कर ही भोजन करना चाहिए। इससे कुंडली में राहु के दुष्प्रभावों का शमन होता है।
  10. पूरे परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए घर में दक्षिण दिशा में हनुमान का चित्र लगाना चाहिए।
  11. शैया की माप के बारे में विधान है कि शैया की लंबाई सोने वाले व्यक्ति की लंबाई से कुछ अधिक होना चाहिए। पलंग में लगा शीशा वास्तु की दृष्टि से दोष है, क्योंकि शयनकर्ता को शयन के समय अपना प्रतिबिम्ब नजर आना उसकी आयु क्षीण करने के अलावा दीर्घ रोग को जन्म देने वाला होता है।
  12. बेड को कोने में दीवार से सटाकर बिलकुल न रखें। कमरे में दर्पण को कुछ इस तरह रखें, जिससे लेटी अवस्था में आपका प्रतिबिम्ब उस पर न पड़े।
  13. शयनकक्ष में साइड टेबल पर दवाई रखने का स्थान न हो। अनिवार्य दवाई को भी सुबह वहाँ से हटाकर अन्यत्र रख दें।फ्रिज कभी भी बेडरूम में न हो।
  
                                                                                                         कुछ टिप्स:राजीव एस. खट्टर-हिदुस्तान

गुरुवार, 23 मई 2013

भोजन में फाइबर की जरूरत


स्वास्थ्य चर्चा के क्रम में आज हम भोजन में फाइबर की उपयोगिता के बारे में चर्चा करेंगे.वैसे तो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनेक तरह की बीमारियाँ हमें अपनी चपेट में ले चुकी हैं लेकिन आमतौर पर जिस बीमारी से आज हर इंसान परेशान है, वह है पेट की बीमारी। आज ज्यादातर लोग पेट दर्द, एसिडिटी, जलन, खट्टी डकार जैसी पेट की बीमारियों से परेशान हैं। इस तरह की समस्याएँ रेशेदार भोजन न करने से होती हैं। 
                                  भोजन के उचित पाचन के लिए फाइबर की जरुरत होती है। आपको यह महसूस कराने के लिए कि आपका पेट भरा है, आहार संबंधी फाइबर आवश्यक है। फाइबर की कमी से कब्ज़, बवासीर तथा रक्त में कोलोस्ट्राल और शक्कर की मात्रा का बढ़ना आदि समस्याएँ आ सकती हैं। इसके विपरीत इसकी अत्यधिक मात्रा के उपयोग से आंतडियों में परेशानी, दस्त या निर्जलीकरण की समस्या भी आ सकती है। वे व्यक्ति जो अपने भोजन में फाइबर के सेवन को बढ़ाते हैं, उन्हें पानी का सेवन भी बढ़ाना चाहिए। जब फाइबर की बात आती है तो छोटे से परिवर्तन आपके फाइबर के सेवन और और समग्र स्वास्थ्य पर एक बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। फाइबर के सेवन से दिल की बीमारी, मधुमेह, मोटापा और विशिष्ट प्रकार के कैंसर से बचा जा सकता है। महिलाओं को दिनभर में 25 ग्राम रेशा और पुरुषों को लगभग 35 से 40 ग्राम रेशे की आवश्‍यकता होती है। लेकिन हम केवल 15 ग्राम रेशा ही खा पाते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि आप अपना मनपसंद खाना छोड़ दें या अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं।
           फाइबर दो तरह का होता है। पहला जल में घुलनशीन और दूसरा अघुलनशील होता है। ये दोनों साथ मिल कर आंतो की सफाई करते हैं। आंतो को स्वास्थ और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
घुलनशील फाइबर जैसे पेक्टिन, गम आदि हमे बेरी प्रजाति के फल, अलसी, आड़ू,सेब, ओट, ग्वार की फली आदि से प्राप्त होता है। आंत के प्रोबायोटिक जीवाणु इसका फर्मेंटेशन करते हैं, जिससे शॉर्ट चेन फैटी एसिड बनते हैं। ये जीवाणुओं को पोषण देता है। अघुलनशील फाइबर हमें साबुत अन्न, अलसी, दाल, मटर, मसूर, मेवे, सब्जी और फलों से प्राप्त होता है। इनका फर्मेंटेशन नहीं होता है। लेकिन फिर भी ये बड़े काम की चीज है। ये मल को आयतन प्रदान करते हैं और मल को बाहर निकालने में मदद करते हैं। 

घुलनशील फाइबर के फायदे

१.हृदय रोग का जोखिम कम करता है।
२.रक्त शर्करा को नियंत्रित रखता है।
३.आंतो में हितकारी जीवाणुओं का विकास और पोषण करता है।
४.अतिसक्रिय आहार पथ को सांत्वना और आराम पहुँचाता है।
५.बुरे कॉलेस्टेरोल को कम करता है।

अघुलनशील फाइबर के फायदे

१.कब्जी और दस्त दोनों को ठीक करता है।
२.आंत का शोधन, मर्दन और उपचार करता है।
३.टॉक्सिन, कॉलेस्टेरोल, अपशिष्ट को बाहर निकालता है।
४.आंतो की अम्लता को कम करता है।
५.आंतों को कैंसर से बचाता है।
६.यह मल को आकार और आयतन प्रदान करता है।
७.यह छोटी आंत में जमे मलवे और म्यूकस को भी साफ करता चलता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण ८.बेहतर हो जाता है।
९.अघुलनशील फाइबर को बाहर निकालने में आंतों की मशक्कत और कसरत भी हो जाती है।


यहाँ कुछ खाद्य पदार्थ बताए गए हैं जिनका उपयोग करके आप फाइबर को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं:
                                    
मक्का: फाइबर युक्त अनाज चुनें। ऐसा अनाज चुनें जिसके एक बार के परोसे गए हिस्से में कम से कम 4 ग्राम फाइबर हो जैसे मक्का आदि।

दालें: अपने नियमित अनाज में उच्च फाइबर युक्त अनाज मिलाएं जैसे राजमा, विभिन्न प्रकार की दालें आदि।

फल: फलों का सेवन ज़्यादा करें। नाश्ते या मिष्ठान्न के रूप में फल खाएं और फलों का रस सीमित मात्रा में पीएं। सेब और नाशपाती जैसे फलों को छिलके सहित खाएं। छिलकों में ही सबसे अधिक फाइबर होता है।


रेशेदार सब्‍जियां :सब्ज़ियों का सेवन अधिक करें। सब्जियाँ फाइबर का अच्छा स्त्रोत हैं उदाहरण के लिए मूली, पत्तागोभी आदि।

ब्राउन ब्रेड : गेंहूँ से बनी हुई ब्रेड और पास्ता का उपयोग करें।

सूखे मेवे: सलाद, दही या अन्न में सूखे मेवे, दानें मिलाएं।

गेहूँ का आटासाबूत गेहूं में रेशेदार चोकर पाया जाता है, जो पाचनतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।अपने मनपसंद व्यंजनों में मैदे के स्थान पर गेंहूँ के आटे का उपयोग करें।गेहूं का चोकर फाइबर का सबसे संक्रेन्द्रित स्रोत है।गेहूं के चोकर में अघुलनशील फाइबर होता है, जिसे सैलूलोज कहते हैं। इसमें कैल्सियम, सिलीनियम, मैग्नीशियम, पोटैसियम, फॉस्फोरस जैसे खनिजों के साथ-साथ विटमिन ई और बी कॉम्प्लेक्स पाए जाते हैं।
ब्राउन चावल :सामान्य चांवल के स्थान पर ब्राउन राईस का उपयोग करें।

मटर : मटर को चाहे उबाल कर खाएं या फिर कच्‍ची ही खाइये। एक कप मटर के दानों में 16.3 ग्राम रेशा मिलेगा।

ओटमील : ओट्स में बीटा ग्‍लूकन होता है जो कि एक स्‍पेशल टाइप का फाइबर होता है। यह कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम कर के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है।

मंगलवार, 14 मई 2013

कंप्यूटर से हुए थकान से निजात पाएं

आज की खबर :

क्या घंटों तक कंप्यूटर पर टाइप करने या माउस चलाने से आपके हाथों में दर्द होता है? या फिर कई बार देर तक लिखने-पढ़ने के काम से हाथों में जकड़न महसूस होती है?इस बार हम योग टिप्स लाएँ हैं उन लोगों के लिए जो कंप्यूटर पर लगातार आठ से दस घंटे काम करके कई तरह के रोगों का शिकार हो जाते हैं या फिर तनाव व थकान से ग्रस्त रहते हैं। निश्‍चित ही कंप्यूटर पर लगातार आँखे गड़ाए रखने के अपने नुकसान तो हैं ही इसके अलावा भी ऐसी कई छोटी-छोटी समस्याएँ भी पैदा होती है, जिससे हम जाने-अनजाने लड़ते रहते हैं।

अगर ऐसा है तो आप काम के दौरान ही हाथों की इन सात आसान कसरतों से आराम महसूस कर सकते हैं।


कसकर मुट्ठी बांधे

इससे हथेली और उंगलियों की जकड़न खुलेगी और हाथों में दर्द नहीं होगा।

अंगूठे को भीतर करके मुट्ठी बनाएं।

मुट्ठी को 30 से 60 सेकंड के लिए टाइट करें।
पूरी तरह हाथ को ढीला छोड़ दें।
लगातार चार बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

उंगलियों का फैलाएं
लगातार टाइप करने या माउस पकड़ने से उंगलियों के दर्द में आराम मिलेगा।
हथेली को सीधा टेबल पर रखें।
अब हाथों की उंगलियों पर थोड़ा बल देते हुए उंगलियों को स्ट्रेच करें।
करीब 30 से 60 सेकंड तक इसी अवस्था में रखें।
हाथ को ढीला छोड़ दें।
लगातार चार बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

हथेली को फैलाएं
इससे हथेली की मांसपेशियों का तनाव कम होगा और उंगलियां तेजी से चलेंगी।
दोनों हाथों को सीधा करें और हथेली को मुंह के सामने सीधा रखें।
अब उंगलियों को ज्वाइंट से हथेली की ओर मोड़ें।
हथेली अधखुली मुट्ठी की तरह दिखनी चाहिए।
30 से 60 सेकंड इसी अवस्था में रहें।
इस प्रक्रिया को लगातार चार बार दोहराएं।

पकड़ बनाएं
हथेली की पकड़ मजबूत करने और स्ट्रेच के लिए सॉफ्ट बॉल मिलती है। उसे हमेशा अपनी डेस्क पर रखें।
सॉफ्ट बॉल को अच्छी तरह से पकड़ें और दम लगाकर निचोड़ने का प्रयास करें।
10 से 15 सेकंड तक इस अवस्था में रहें।
इसे आठ से 10 बार दोहराएं।
सप्ताह में दो से तीन बार इस कसरत को करने से हाथों के ज्वाइंट्स खुल जाते हैं।
उंगलियों को उठाएं
इससे उंगलियों की लचक बढ़ती है और देर तक कान के बावजूद भी दर्द नहीं होता।

हथेली को टेबल पर सीधा रखें।
अब पहली इंगली को टेबल से ऊपर उठाएं और कुछ क्षण बाद नीचे रखें।
बारी-बारी सभी उंगलियों के साथ यह प्रक्रिया दोहराएं।
आठ से 12 बार इस पूरी प्रक्रिया को दोहराएं।

अंगूठे के लिए
इससे अंगूठे की मांसपेशियां मजबूत होंगी और लचीलापन बढ़ेगा।
हाथ को टेबल पर सीधा रखें और अपनी चारों उंगलियों को हल्के रबर बैंड से बांध लें।
अब अंगूठे को 30 से 60 सेकंड तक उंगलियों से दूर खींचें।
इस प्रक्रिया को 10 से 15 बार करें।
सप्ताह में तीन दिन भी यह कसरत फायदेमंद है।

विशेषज्ञों ने कहा है कि आंखों की पलझें झपकाने और बीस फिट की दूरी पर रखी वस्तु की ओर देखने से इस दर्द से बचा जा सकता है। बस 20-20-20 के फ़ार्मूले का पालन करना होगा अर्थात बीस मिनट बाद बीस फ़िट दूर बीस सेकेंड तक देखें।

कुछ और जानकारी के लिए (यहाँ क्लिक करें)

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