बुधवार, 25 मार्च 2020

Symptoms & Causes of Diabetes (मधुमेह के लक्षण और कारण )

प्रिये मित्रो, आज हम Symptoms & Causes of Diabetes (मधुमेह के लक्षण और कारण ) के बारे में जानकारी जानकारी प्राप्त करते है। मधुमेह आज की बड़ी ज्वलन्त समस्या है। मधुमेह, बहुमूत्र मूत्र शर्करा, डायबिटीज आदि नामो से पुकारे जानेवाले इस रोग की व्यापकता सर्वविदित है।यह ऐसी बीमारी है जो एक बार किसी के शरीर को पकड़ ले तो उसे फिर जीवन भर छोड़ती नहीं। विश्व में मधुमेह के रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अनुमान लगाया जाता है कि सारी  दुनिया में प्रतिवर्ष १० लाख से अधिक नए रोगी बनते जा रहे है। आइये इस सर्वसधारण। सर्वसुलभ, सर्वव्यपाक किन्तु साइलेंट किलर रोगो में शमिल इस महारोग के बारे में कुछ महत्पूर्ण जानकारी प्राप्त की जाय।
Symptoms & Causes of Diabetes

 Symptoms of Diabetes (मधुमेह के लक्षण)


शुगर या मधुमेह (Diabetes) मरीज़ के ब्लड शुगर के स्तर (Blood Sugar Level) के आधार पर पहचाना जाता है।तो सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि डायबिटीज के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं। मधुमेह के सबसे आम संकेतो में निम्नलिखित प्रमुख है:-

Top 21 Symptoms of Diabetes: 

  1. भूख का अत्यधिक बढ़ जाना 
  2. अधिक मात्रा में बार अब्र पेशाब होने लगना 
  3. रोगी को थकन और शिथिलता बनी रहना 
  4. फोड़े फुंसियों का अधिक निकलना। खासकर जांघों, जननांगो, पेशाब की जगह खुजली अधिक होती है। 
  5. आँखों से धुंधला दिखाई देने लगता है। चश्मे का नंबर  बढ़ जाता है। 
  6. टांगों पैरो पर चीटियाँ चलती महसूस होता है। 
  7. पिंडलियों और एड़ी में दर्द बना रहता है। 
  8. रात  में सोते समय या दिन में चलते समय पिंडलियों में ऐठन होती है। 
  9. शरीर पर हुए जख्म देर तक सही न होता है। 
  10. खुले में पेशाब करने पर पेशाब के आस पास चीटियां जम जाती है। 
  11. प्यास अधिक लगती है और गला सूखा महसूस होता है। 
  12. रोगी के मुँह और शरीर से अजीब सी बदबू आने लगती है। 
  13. कोमा की अवस्था में रोगी का ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, रोगी खड़ा नहीं हो पाता है। 
  14. रोग के अत्यधिक बढ़ जाने पर चक्क्रर आने लगते है। 
  15. रक्त में कोलेस्ट्रॉल की भी मात्रा बढ़ जाता है। 
  16. महिलाओं के जनंनाग में सूजन हो जाता है। 
  17. मूत्र मार्गो और जननांगों पर फंगल इंफेक्शन हों जाता है। 
  18. रोग के अत्यधिक बढ़ने पर दिल का दौरा होने की संभावना  बढ़ जाती है। 
  19. किसी किसी को स्नायु विकृति होकर लंकवा भी हो जाता है। 
  20. डायबिटीज होने पर अचानक वजन कम हो जाता है. तो अगर आपका वजन तेजी से कम हुआ है तो यह गौर करने वाली बात है। 
  21. रोग के अंतिम अवस्था में किडनी और लिवर काम नरना बंद कर  देते है। 

Causes of Diabetes:

मधुमेह होने के निम्नलिखित कारण होते है: 
  1. आनुवंशिक कारण: मधुमेह के उत्पत्ति में वंश परम्परा एक मुख्य कारण मन जाता है। जिन लोगों के परिवार में मधुमेह का इतिहास होता है, उनमें इस रोग की सम्भावना अधिक होती है। कई मामलों में देखा गया है की एक पीढ़ी मधुमेह से बच जाती है, पर दूसरी पीढ़ी में रोग दूबारा उभर आता है। 
  2. मोटापा: मोटापे के साथ मधुमेह का गहरा सम्बन्ध देखा गया है। मोटापे का स्पस्ट वजह है ज्यादा भोजन करना और कम शरीरिक मेहनत। अधिक वसा इन्सुलिन को ठीक प्रकार से काम करने में बाधा पहुंचाती है। इससे इन्सुलिन पैदा करने की क्षमता धीरे धीरे कम होने लगती है। 
  3. असुंतलित जीवन शैली: गतिहीन जीवनशैली, अधिक भोजन के साथ अनियमित एवं असंतुलित भोजन भी मधुमेह का एक मुख्य कारण है। संतृप्त वसा (Saturated fatty acid) का अधिक प्रयोग और शक़्कर और अधिक मात्रा में जंक फूड का अधिक सेवन भी  मधुमेह उत्पन कर  सकता है। परिष्कृत कार्बोज अधिक लेने से मधुमेह होने की सम्भवना बढ़ जाती है। 
                                इसके आलावा स्नायविक थकान, तनाव, भावात्मक असुरक्षा और Cortisone and Steroids Drugs का अधिक सेवन, बुढ़ापा आदि अन्य कारण है जो मधुमेह के लिए उत्तरदायी हैं। उच्च रक्तचाप और उच्च कॉलेस्ट्रॉल भी मधुमेह के जोखिम कारक हैं। 
धन्यवाद,


रविवार, 17 फ़रवरी 2019

"Homeopathic Medicines for Sciatica"

HOMOEOPATHIC REMEDIES FOR SCIATICA


What is Sciatica?

Homeopathic remedies for sciatica

होम्योपैथिक मेडिसिन फॉर साइटिका


Sciatica nerve is the largest nerve in the body that starts in the lower back and runs down the back of each leg. It controls the muscles and the sensation of the leg and foot. Sciatica is radiating nerve pain in the buttock and leg. In addition to this pain, there may also be tingling of numbness. In rare cases there is also a loss of strength, with complaints as a dropping foot, falling through the leg or not being able to stand on foot. Sciatica is usually a begins illness that disappears spontaneously with six weeks. if the complaints longer than there is the reason to carry out further research into the cause. An x-ray or MRI scan of the lower back is then necessary to be able to make the correct diagnosis. If it appears that long term complaints are caused by a hernia, spondylolisthesis or unstable vertebrae, endoscopic or minimally invasive surgery can offer a salutation bed rest has been traditionally advocated for the treatment of active sciatica. Homeopathy has the best treatment for sciatica.
Homeopathic remedies for sciatica
Homeopathic Medicines for Sciatica
Homeopathy treatment offers superb lead to neuralgy. The pain, symptom symptoms area unit cured fully with homeopathy care treatment.

The homeopathic medicines area unit is terribly effective for action sciatic pain. a number of the necessary remedies area unit given below.
Top 10 homeopathic medicine for Sciatica

COLOCYNTHIS 200- Colocynthis is that the best medication for neuralgy. It will work wonders in treating neuralgy. it's most suited in treating righted neuralgy pain. Dul, handicraft pains within the hip that come back suddenly and shoot all the way down to the posterior a part of the thigh or to knee or foot. Pain is eased by heat and onerous pressure however worse by bit or motions. Few persons requiring Colocynthis may additionally get relief from heat applications.

CHAMOMILLA 200- Chamomilla is a good remedy for neuralgy of terribly sensitive patients WHO feels the pain way more than what it truly is. it's conjointly having a mental symptom of – I might like death instead of the pain. there's a numb feeling related to sciatic pain. The pain is additional at midnight and conjointly by motion.


Homeopathic Medicines for SciaticaRHUS TOX 200- Magnoliopsid genus tox is a good remedy for neuralgy thanks to exposure to dampish weather or from the muscular effort. The pain is additional on the correct facet. The sciatic pain is additional in bed at midnight or once at rest. the primary movement provides terrific pain that is eased once walking a bit. magnoliopsid genus tox conjointly works splendidly well in treating neuralgy that arises from lifting a heavyweight.

GNAPHALIUM 30- this can be the highest grade medical aid medication for neuralgy pain. asterid dicot genus is prescribed for neuralgy once symptom related to pain. symptom alternates with sciatic pain. there's intense pain within the nerve in the middle of cramps or alternating with the symptom. The pain is worse from lying and walking and higher from sitting. The patient experiences pain within the calf and feet.

Homeopathic Medicines for SciaticaMAGNESIUM PHOS 1000- this can be rattling medication for neuralgy pain. atomic number 12 Phos is prescribed once the patient experiences lightning-like pain that is healthier by heat. The pain comes and goes chop-chop. periclase Phos is taken into account to be a right-sided neuralgy remedy.

ARSENIC ALBUM 200- Arsenic album is effective for neuralgy once the patient has been subjected to perennial attacks of protozoal infection and also the pain is intermittent. there's violent, drawing, burning, and tearing pain in left hip extending to thighs. there's nice restlessness and is healthier from the nice and cozy application.

GINSENG 30- Ginseng is taken into account to be specific for neuralgy once there's a frequent need for voiding. there's a sense of contraction and stiffness within the affected half.

GUAIACUM OFF. 1000- Guaiacum is tried for neuralgy once well-selected remedies fail. there's ill, tearing, stabbing pains and feeling of contraction within the affected limb. it's acidity, coated tongue, filthy style, and breath.

AMMONIUM MUR. 30- Ammonia Mur is effective for neuralgy of the left hip as if the tendons were too short. Legs feel contractile, limps once walking. Painful jerks, feet feel as if asleep. Pain worse whereas sitting however higher on lying down.

BELLADONNA 200- Belladonna is prescribed once there's sharp violent pain and redness and warmth of the affected components. Here the pains area unit like jerks or shocks. The lower a part of the rear feels as if broken. there's a full sensation in buttocks and thighs. There area unit restlessness and dryness and throat. The sciatic pain is worse fro heat, checked sweat, jarring, pressure, hanging down the leg, higher from bending backward or by bed rest.

Homeopathic Medicines for Sciatica


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मंगलवार, 30 जनवरी 2018

मांसपेशियों के दर्द: Homeopathic treatment for muscle aches

मांसपेशियों में दर्द बहुत आम है, और कई अलग अलग चीजों के कारण हो सकता है। कोई चीज़ पकड़ते या उठाते हुए, सीढ़ियां चढ़ते हुए या फिर तेज भागने से मांसपेशियां खिंच सकती है। इसे मांसपेशियों में खिंचाव या तनाव कहा जाता है। मांसपेशियों का ये खिंचाव हाथ, पैर, जोड़ों या पीठ में हो सकता है। इसके अलावा इससे घुटने, कंधे, कोहनी में सूजन या दर्द भी उठ सकता है। कभी कभी बहुत अधिक व्यायाम करने से भी मांसपेशियों में दर्द हो जाता है। आजकल की व्‍यस्‍त और भाग-दौड़ भरी दिनचर्या में मांसपेशियों में दर्द एक आम समस्‍या बन गई है। वैसे तो मांसपेशियों का दर्द किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन तीस से चालीस वर्ष की आयुवर्ग के युवाओं में यह समस्‍या तेजी से बढ़ रही है। इस दर्द का सामना कुछ लोगों को कभी-कभी होता है, लेकिन कुछ लोगों को स्थाई रूप से इसका सामना करना पड़ता है।

Homeopathic Remedies for muscle pain and aches

मांसपेशियों के दर्द को होम्योपैथिक औषधियों से दूर करने के लिए कुछ प्रभावी उपचार उपलब्ध है।

Homeopathic Medicines to Help You Beat Spring Aches and Pain

Homeopathic treatment for muscle aches

What is the top best homeopathic cure for muscle pain and weakness?

Top 4 homeopathic medicine for muscle pain and weakness

आर्निका: मांसपेशियों के दर्द में आर्निका एक प्रभावी औषधि है। चोट लगने या गिरने के कारण होनेवाले माँसपेशियों के दर्द में आर्निका उपयोगी है। चोट लगने में सबसे पहले आर्निका की तरफ ध्यान जाता है। इस औषधि के लोशन का बाह्य उपयोग भी लाभकारी है।

Single medicines like Arnica montana help relieve these common spring aches and pain.

सिमसिफुएगा: इसे ऐक्टिया रेसिमोसा भी कहा जाता है। शारीरिक-लक्षणों के दब जाने पर मानसिक-लक्षणों का प्रकट हो जाना और मानसिक-लक्षणों के दब जाने पर शारीरिक-लक्षणों का प्रकट होना इस औषधि का विशेष गुण है। यह शीत-प्रधान औषधि है। Often times people that will benefit from cimicifuga are prone to depression and hormone imbalance.

नक्स वोमिका: नक्सवोमिका मासपेशियों के दर्द में काफी प्रभावी रूप से असर करती है। मासपेशियों के ऐठन, अकड़न का भाव दिखाई पड़ता है। Often times people that will benefit from nux vomica suffer from digestive problems such as heartburn or stomach aches and they are easily irritated or constantly feel fatigued.  नक्स प्रकृति का व्यक्ति बड़ा नाजुक-मिजाज (Oversensitive) होता है। ऊंची आवाज, तेज रोशनी, हवा का तेज झोंका – किसी चीज को बर्दाश्त नहीं कर सकता।  नक्स को जहां तक संभव हो, प्रात:काल नहीं देना चाहिये। औषधि लेने के बाद किसी प्रकार का मानसिक-कार्य-पढ़ना-लिखना, वाद-विवाद, ध्यान आदि नहीं करना चाहिये।

रस टॉक्स: विश्राम से रोग-वृद्धि; हरकत से रोग घटना, प्रथम हरकत से दर्द, गर्मी से, गर्मी सूखी हवा से रोग में कमी नमी या ठंड को न सह सकना, लगातार हरकत से रोग में कमी गर्मी या पसीने की हालत में भीग जाने या ठंड लगने से उत्पन्न हुए रोग मांसपेशियों के अकड़ जाने से उनमें दर्द होने से बेचैनी आदि लक्षण रहने पर यह औषधि कारगर है मांसपेशियों के दर्द में। इस औषधि का मुख्य प्रभाव मांसपेशियों, पुट्ठों पर होता है। मांसपेशियों के पुट्ठे अकड़ जाते हैं, दर्द करने लगते हैं। This treatment works best if the symptoms tend to improve when the person is active or applies warm applications.

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इन मुख्य औषधियों के अलावा बहुत सारी होमियोपैथिक औषधियाँ जो मांसपेशियों के दर्द में लक्षणानुसार उपयोग की जाती हैं, जैसे की ब्रायोनिया, मैग फास, क्यूप्रम मेटालिकम ,रूटा  आदि।    


बुधवार, 24 जनवरी 2018

सांस की नली की सूजन (Bronchitis)-Homeopathic treatment of Bronchitis

Homeopathic treatment of Bronchitis
Bronchitis symptoms & treatments - Illnesses & conditions
सर्दियों के मौसम में ठण्डी हवाओं और नमी  के कारण शरीर के विभिन्न अंगों में परेशानियां होती है, इन्हीं में से एक है सांस की नली की सूजन। रोगी की सांस की नली के आगे का हिस्सा जो टेंटुए से आगे फेफड़ों तक जाता है उस पूरी की पूरी नली को सांस की नली कहा जाता है। जब सूजन आवाज की नली से भी आगे गहराई में चली जाती है उस समय जो खांसी उठती है उसे सांस की नली की सूजन कहा जाता है। इसमें रोगी को ऐसा महसूस होता है जैसे कि सांस की नली में बलगम जमा हुआ है जिसे काफी जोर लगाकर निकालना पड़ता है। सांस नली की दीवारें इंफेक्शन व सूजन की वजह से अनावश्यक रूप से कमजोर हो जाती हैं। इस वजह से इनका आकार नलीनुमा न रहकर गुब्बारेनुमा या फिर सिलेंडरनुमा हो जाता है। कई प्रकार के बैक्टीरिया की प्रजातियां श्वास रोग के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। अगर कोई व्यक्ति अचानक गर्म मौसम से ठण्डे मौसम में पहुंचता है तो अचानक इस बदलाव के कारण रोगी की सांस की नली में सूजन आ जाती है। यह मुख्य रूप से बच्चों में होता है और सूजन वाले वायुमार्ग से साँस लेना मुश्किल होता है। यदि सूजन आगे फेफड़ों में प्रवेश करती है, तो यह निमोनिया पैदा कर सकता है। सांस नली बलगम या सूजन की वजह से संकरी हो जाती है। सिगरेट पीने वालों, फैक्टरी में रसायनों के बीच काम करने वालों और प्रदूषण में रहने वाले लोगों को यह खासतौर पर होती है। सांस की नली में सूजन आने के लक्षणों में रोगी को हल्का-हल्का सा बुखार आता है, ठण्ड लगने लगती है, सूखी खांसी होती रहती है और सांस लेने में रुकावट होती है। अगर रोगी को इन लक्षणों के आधार पर सही उपचार या चिकित्सा न मिले तो उसकी यह सूजन बढ़कर फेफड़ों तक पहुंच जाती है जिसे न्युमोनिया कहा जाता है। रोग के कारगर इलाज के लिए इसके कारणों को ढूंढ़कर और उन पर नियंत्रण करना आवश्यक है। 

How Bronchitis Is Treated


Homeopathic treatment of Bronchitis
What Is Acute and Chronic Bronchitis Symptoms Cure in Hindi

HOMOEOPATHY FOR BRONCHITIS

Top Homeopathic Remedies for bronchitis


सांस की नली की सूजन के रोग मे होमियोपैथिक औषधियों का प्रयोग:

1. ट्युबर्क्युलीनम- सांस की नली की सूजन या फेफड़ों के दूसरे रोग में अक्सर चिकित्सक ट्युबर्क्युलीनम औषधि को सबसे पहले दे देते है क्योंकि उनके मुताबिक इस औषधि से ही रोगी को लाभ मिल जाता है। जिस तरह से सल्फर औषधि को दूसरी औषधियों के बीच-बीच में दे दिया जाता है वैसे ही इसको भी दे सकते है। लेकिन इन दोनों औषधियों में से सिर्फ एक का ही सेवन किया जा सकता है।


2. ब्रायोनिया- रोगी की सांस की नली में दर्द सा होता है जिसके कारण रोगी को ऐसा लगता है जैसे कि उसकी सांस की नली पक गई हो। रोगी अगर ज्यादा तेज आवाज में बोलता है या सिगरेट आदि पीता है तो उसकी खांसी चालू हो जाती है। सांस की नली में दर्द सा होना, ठण्डी हवा से गर्म कमरे में घुसते ही खांसी उठ पड़ना आदि सांस की नली के रोग वाले लक्षणों में ब्रायोनिया औषधि की 30 शक्ति का सेवन करना अच्छा रहता है।

3. ऐन्टिम-टार्ट- रोगी की सांस की नली में सूजन आ जाने के रोग वाले लक्षणों में रोगी की छाती बलगम के मारे हर समय घड़घड़ाती रहती है लेकिन बलगम बहुत कम मात्रा में निकलता है। रोगी को रात में सोते समय इस प्रकार की खांसी होती है जैसे कि उसका दम घुट रहा हो और उसे खांसते-खांसते उठकर बैठना पड़ता है। रोगी की सांस की नलियों में बलगम भरा हुआ रहता है। इस प्रकार के लक्षणों में अगर रोगी को ऐन्टिम-टार्ट औषधि की 3X मात्रा या 30 या 200 शक्ति देना लाभकारी रहता है।

4. फास्फोरस- आवाज की नली तथा सांस की नली में दर्द होने के साथ-साथ अन्दर की ओर जमे हुए बलगम को बाहर निकालने के लिए रोगी को जोर-जोर से खांसना पड़ता है, लेकिन फिर भी रोगी को लगता है कि बलगम तो बाहर निकल ही नहीं रहा। सांस की नली की गहराई में, छाती में, नीचे की तरफ खुरखुरी सी होना, अगर बलगम निकलता है तो वो गाढ़ा सा मवाद वाला निकलता है। जहां से सांस की नली फेफड़ों में जाने के लिए 2 भागों में बंट जाती है उस स्थान पर खुरखुरी सी होने लगती है इस तरह के लक्षणों में रोगी को फास्फोरस या आर्सेनिक ऐल्बम औषधि की 30 शक्ति देने से लाभ मिलता है।


5. फेरम-फॉस- सांस की नली में सूजन के रोगी को जब रोग की शुरुआती अवस्था में किसी प्रकार के लक्षण नजर नहीं आते जैसे उसे बेचैनी महसूस नहीं होती तो ऐकोनाइट औषधि दी जा सकती है। अगर जलन या किसी प्रकार के मानसिक लक्षण उत्पन्न नहीं होते तो बेलाडोना औषधि का सेवन उपयोगी रहता है। फेरम-फास इन दोनों औषधियों के बीच में दी जा सकने वाली औषधि है। इसके अलावा रोगी शरीर से काफी हष्ट-पुष्ट नज़र आता है लेकिन अन्दर से वह बहुत कमजोर होता है। रोगी को सांस लेने में परेशानी होती है, थोड़ी दूर पैदल चलते ही रोगी हांफने लगता है, रोगी को खांसी के साथ खून आने लगता है। इस प्रकार के लक्षणों में भी फेरम-फॉस औषधि की 3x मात्रा या 3 या 6 शक्ति दी जा सकती है।



6. कार्बो-वेज- अगर सांस की नली के नीचे का हिस्सा खुश्क हो और रोगी को ऐसा महसूस हो जैसेकि उसके ऊपर के भाग में खुरखुरी हो रही है जिसके कारण रोगी को खांसी उठती है। रोगी का गला बैठ जाए, रोग सर्दी के या बरसात के मौसम मे बढ़ जाता है। इस रोग के लक्षण शाम के समय या ज्यादा तेज बोलने से भी बढ़ जाते है। रोगी की जीवन जीने की इच्छा बिल्कुल खत्म हो जाती है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को कार्बो-वेज की 30 शक्ति लाभदायक रहती है।

7. नक्स-वोमिका- सांस की नली के ऊपर के भाग में चिपचिपे से बलगम का जमना, सांस की नली के उस भाग में जो वक्षास्थि के पीछे है उसमें खुरखुरी सी होना जिससे रोगी को खांसी शुरू हो जाती है। रोगी जब सांस को बाहर छोड़ता है तो उसकी खांसी शुरू हो जाती है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को नक्स-वोमिका औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग कराना उचित रहता है।

8. कैलकेरिया कार्ब- सांस की नली में खुरखुराहट सी होना जैसे वहां पर कोई पंख सा छू रहा हो जिसके कारण रोगी को खांसी उठने लगती है। रोगी जब भोजन करता है तो उसको खांसी होने लगती है ऐसा लगता है जैसे की सांस की नली में कोई चीज अटकी है जिससे खुरखुराहट सी हो रही है। बलगम का बहुत ही कठिनाई से निकलना, ऐसा लगना जैसे कि बलगम का कोई थक्का सांस की नली के कभी ऊपर आता है और कभी नीचे चला जाता है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को कैलकेरिया कार्ब औषधि की 30 शक्ति का सेवन लाभदायक रहता है।

9. इपिकाक- बच्चे को छोटी उम्र में ही सांस की नली में सूजन आने के रोग के लक्षणों में हर समय खांसी होती रहती है, उसकी सांस सही तरह से नहीं आती, छाती हर समय घड़घड़ाती रहती है, उल्टी आने लगती है। रोगी अगर खांसता है या सांस लेता है तो दोनों ही अवस्थाओं में धड़धड़ की आवाज होती रहती है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को इपिकाक औषधि की 3, 30 या 200 शक्ति का सेवन कराना चाहिए। यह औषधि रोगी के गले में जमे बलगम को भी निकाल देता है।

10. कैपसिकम- रोगी जैसे ही रात को सोने के लिए लेटता है उसकी आवाज की नली तथा सांस की नली में ऐसा महसूस होता है जैसे की उसमे कीड़े से रेंग रहे हो, सांस की नली में खुरखुराहट के साथ बार-बार छींके सी आती रहना आदि लक्षणों में रोगी को कैपसिकम औषधि की 3 या 6 शक्ति देना लाभदायक रहता है।

11. सल्फर- सांस की नली में लगातार खुरखुराहट सी होना, रोगी की छाती के अन्दर से सूखी या बलगम वाली खांसी का उठना, रोगी का रोग रात के समय बढ़ जाता है। इस प्रकार के लक्षणों में रोगी को सल्फर औषधि की 30 शक्ति देना लाभदायक रहता है।

12. ऐन्टिम-टार्ट- रोगी की सांस की नली में सूजन आ जाने के रोग वाले लक्षणों में रोगी की छाती बलगम के मारे हर समय घड़घड़ाती रहती है लेकिन बलगम बहुत कम मात्रा में निकलता है। रोगी को रात में सोते समय इस प्रकार की खांसी होती है जैसे कि उसका दम घुट रहा हो और उसे खांसते-खांसते उठकर बैठना पड़ता है। रोगी की सांस की नलियों में बलगम भरा हुआ रहता है। फेफड़े के हर प्रकार के रोग में जब छाती में कफ भरा हो, घड़-घड़ करता हो, चाहे जुकाम हो, ब्रोंकाइटिस हो, क्रूप हो, खासी हो, न्यूमोनिया हो, प्लूरो-न्यूमोनिया हो, तब ऐन्टिम टार्ट प्रमुख औषधि का काम करती हैं। इस प्रकार के लक्षणों में अगर रोगी को ऐन्टिम-टार्ट औषधि की 3X मात्रा या 30 या 200 शक्ति देना लाभकारी रहता है। 

13. स्टैनम- सांस की नली में बलगम जमा होने के कारण खुरखुराहट होने से खांसी उठना, रोगी को जितनी भी बार खांसी होती है हर बार रोगी की सांस की नली के नीचे वाले हिस्से में दर्द सा होता है। सांस की नली में से पीले रंग का, बदबूदार, मीठा सा बलगम आना जैसे लक्षणों में स्टैनम औषधि की 3 या 30 शक्ति देना लाभकारी रहता है।

14. कैनाबिस सैटाइवा- सुबह उठने पर रोगी को ऐसा महसूस होता है जैसे कि उसकी सांस की नली में बहुत सारा बलगम जमा हुआ पड़ा है जिसे आसानी से निकाला भी नहीं जा सकता। रोगी अगर ज्यादा खांसता है तो उसकी सांस की नली में दर्द होने लगता है। रोगी के बहुत ज्यादा खांसने पर बलगम ढीला हो जाता है लेकिन रोगी को खांसी लगातार होती रहती है। इन लक्षणों में अगर रोगी को कैनाबिस सैटाइवा औषधि की 3 शक्ति दी जाए तो रोगी को इससे बहुत आराम मिलता है।

विशेष: सांस नली की सूजन में धूम्रपान से बचाना चाहिए, धूल धुऐं से बचाना चाहिए, दूध और इससे बनी चीजों से परहेज करना चाहिए, ज्यादा ठंढ और ज्यादा गर्म स्थानों पर जाने से बचाना चाहिए। सेब के सिरका सेवन करना, हरी सब्जियों का सेवन लाभप्रद होता है। ४ लौंग को आधे ग्लास पानी में उबाल कर गुनगुना ही शहद मिला कर सेवन करना लाभकारी होगा।

बुधवार, 10 जनवरी 2018

बिच्छु डंक का होमियोपैथिक इलाज (Scorpion sting homeopathic treatment)

बिच्छु डंक का होमियोपैथिक इलाज

बिच्छू काटने पर कितना दर्द होता है इसको वहीं जानता है जिसको बिच्छु ने डंक मारा हो। ऐसे तो बहुत सारे घरेलू उपचार हैं परन्तु मैं यहाँ केवल होमियोपैथिक इलाज के बारे में ही चर्चा करूँगा। 
सर्वप्रथम आप  Silicea साइलीसिया २०० शक्ति की दवा १-१ बून्द १०-१० मिनट के अंतराल पर केवल तीन बार दें।  इससे बिच्छु का डंक बाहर आ जायेगा और  आधा कष्ट दूर हो जायेगा। इसके बाद आप निचे लिखे औषधि का सेवन करें। 
Scorpion sting homeopathic treatment
Scorpion sting homeopathic treatment

एपिस, द्रौणा, इचिनेसिया और लीडम पाल
की मूल औषधि यानि Q शक्ति का मिश्रण तैयार करें और १०-१० बून्द पांच पांच मिनट पर रोगी को दें। ज्यादा कष्ट में ५ बून्द दवा 2CC डिसटिल वाटर के साथ मिला कर  काटे स्थान पर त्वचा में इंजेक्ट कर दें।  यह आजमाया और शर्तिया कष्ट को दूर करने में लाभकारी है। 

. धन्यवाद,


शनिवार, 20 मई 2017

"आँख आना" (Conjunctivitis)


Conjunctivitis

सुर्ख लाल गुलाबी आंखें, उनसे रिसता पानी, सूजी हुई पलके, उनका चिपचिपापन ‘आंख आने’ का पर्याय हैं। बोल-चाल की भाषा का यह पर्याय आंख के रोगी होने का सूचक है जिसे चिकित्सा की भाषा में कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है। Conjunctivitis एक आम वायरल इन्फ़ेक्शन है जो कभी-कभी बैक्टीरिया से भी होता है, इसे आम भाषा में आँख आना कहते हैं .इस बीमारी में आखों के उजले भाग पर संक्रमण हो जाता है और इसका रंग लाल हो जाता है। यह संक्रमण एक आदमी से दूसरे तक आसानी से पहुंचता है। हालांकि कई बार धूल, धुंआ और प्रदूषण से भी यह समस्या हो जाती है।इस बीमारी के दौरान संक्रमित इंसान को आंखों में खुजली, धुंधला दिखना जैसी समस्याएं होती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, दिन में खूब पानी पीना इससे बचने का एक अच्छा उपाय है। इसके अलावा हरी सब्जियों, ताजे फलों का सेवन, अच्छी नींद लेना आदि भी इस बीमारी को दूर रखने में मदद करता है। ठंडी चीजों, जैसे ककड़ी आदि को आखों पर रखने से भी इस मौसम में ताजगी महसूस होती है।
लक्षण :

The eyes feel light prick when the eye comes and it feels like something stuck in the eye. In this disease, pain is also caused by opening an eye and the thickness of the disease also increases due to the disease, so the eyelids stick in the night.
This is an infectious disease. It also spread through the use of patient towels or handkerchief. Today, we are telling you some of its home remedies that you can easily get comfort in this disease.
अचानक एक या दोनों आंखों में जलन आरंभ होती है और किरकिरापन महसूस होता है। आंखें लाल-गुलाबी हो जाती हैं, उनमें सूजन, पानी व मवाद आने की स्थिति प्रकट होती है। सोकर उठने पर पलकों के बाल आपस में चिपके मिलते हैं, आंख खोलना मुश्किल हो जाता है। कभी-कभी दर्द व खाज की भी शिकायत होती है। आंखें थकी सी रहती है, पढ़ना-तेज रोशनी में देखना कठिन हो जाता है। रोग अधिक उग्र होने पर नेत्र-श्लेष्मिका का सूक्ष्म रक्त नाड़ियों से रक्तस्राव भी संभव है।

Symptoms

Bacterial conjunctivitis affects both eyes. The eyes will usually feel gritty and irritated with a sticky discharge.
The eyelids may be stuck together, particularly in the mornings, and there may be discharge or crusting on the eyelashes.

आंख आने` की बीमारी के बचने के कुछ उपाए-
  • संक्रमित आंख को छूने या रगड़ने से बचें।
  • दिन में अपनी आंखों को कई बार ठंडे पानी से धोएं। खासकर दिनभर के काम के बाद घर लौटने पर यह जरूर करें।
  • किसी दूसरे का तौलिया, रूमाल, तकिया, बिस्तर आदि इस्तेमाल करने से बचें।
  • दुपहिया वाहन पर चलते समय हमेशा धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें।
  • हमेशा चश्मा पहन कर ही तैराकी करें।
  • जो इस बीमारी से पहले से ही ग्रसित हैं, उनसे दूर रहें।
  • आंखों पर जोर देने वाला कोई काम न करें। घर में बैठकर आराम करें। आपके साथ उनका भी भला होगा, जिनको आपके कारण रोग हो सकता है। प्रभावित आंख के छूने के बाद दरवाजे की चिटकनी, बर्तन, फ्लश की जंजीर आदि को छुएं तो तौलिए के माध्यम से। अन्य लोभ भी रोगी की आंखों से अपनी आंख को दूर रखें।
आँख का लाल होना, दर्द होना और आँख से पानी आना इसके मुख्य लक्षण हैं. आँख आने पर आँखों में कुछ अटका हुआ सा प्रतीत होता है. इस रोग में आँख खोलने से भी दर्द होता है और रोग के बढ़ने पर गाढ़ा -गाढ़ा पदार्थ भी निकलता है इसलिए रात में पलकें चिपक जाती हैं, जो कि पीड़ादायक है.

यह एक संक्रामक रोग है, यह रोगी के तौलिये या रुमाल के इस्तेमाल से भी फैलता है. आज हम आपको इसके कुछ घरेलू उपचारों से अवगत कराते हैं
Conjunctivitis home remedies
1- मुलहठी को दो घंटे तक पानी में भिगोकर रखें. उसके बाद उस पानी में रुई डुबोकर पलकों पर रखें, ऐसा करने से आँखों की जलन व दर्द में आराम मिलता है.

2 -आधे गिलास पानी में दो चम्मच त्रिफ़ला चूर्ण दो घंटे भिगोकर रखें. अब इसे छान लें, इस पानी से दिन में 3 -4 बार छींटें मारकर आँखें धोने से लाभ होता है.

3 -नीम के पानी से आँख धोने के बाद आँखों में गुलाबजल डालें लाभ होगा.

4 -हरी दूब (घास ) का रस निकालें अब इस रस में रुई भिगोकर पलकों पर रखें, आँखों में ठंडक मिलेगी.

5 -हरड़ को रात भर पानी में भिगोकर रखें. सुबह उस पानी को छानकर उससे आँख धोएं, आँखों की लाली और जलन दूर होगी.

6 -दूध पर जमी मलाई उतार  लें, अब इसे दोनों पलकों पर रख कर ऊपर से रुई रखकर पट्टी बांध दें. यह प्रयोग रात को सोते समय करें, लाभ होगा.

7- प्रातःकाल उठते ही अपना बासी थूक भी संक्रमित आँखों पर लगा सकते हैं.
होमियोपैथिक उपचार :
Homeopathic Treatment for Conjunctivitis
Conjunctivitis

हिपर सल्फ (Hepar Sulph) -आँखें आने पर लाली एवं मवाद बनने के लक्षण दिखाई देना, पलको का सूज जाना एवं उनमे टपटप के साथ दर्द महसूस होना,गर्म वस्तु से सिकाई से आराम, ठंढ से तकलीफ का बढ़ जाना, दिन की अपेक्षा रात एवं प्रातःकाल में तकलीफ का बढ़ना जैसे लक्षणों में हिपर सल्फ ३०,२०० शक्ति लाभप्रद है।
कोनायम (Conium Maculatum) - आँख आ जाने की स्थिति में रोगी का निरंतर आखँ बंद रखने की इच्छा होना, सामान्य रौशनी भी सहन न कर पाना जैसे लक्षणों में इस औषधि की ३० शक्ति लाभकारी है। 
क्रोटेलस (Crotalus) - आँख आ जाने पर नेत्र गोलकों के श्वेत भाग में सूजन आ जाना, रोगी का आँखे न खोल पाना, आँखों का रंग पीला पड़ जाना, रेटिना में सूजन न रहने पर भी रक्त स्राव होना, पलकों के अग्र भाग में दर्द, स्त्रियों की माहवारी का समय बढ़ जाना जैसे लक्षणों में इस दवा की ३०, २०० शक्ति काफी लाभकारी है। 
साइलीशिया (Silicea) - कनीनिका पर अल्सर के छाले  पड़ जाना, सूजन का आ जाना, कनीनिका में मवाद का आना, इसमें छेद हो जाना, आसपास के स्थान का निष्क्रिय हो जाना, पलको के बाल  झड़ जाना, लगातार गुहेरियों का होना आदि लक्षणों में साइलीशिया की २०० शक्ति की दवा बेहद लाभकारी है। 
कैलिआयोड (Calcarea Iodata) - शरीर में उपदंश के कारण आँखों का संक्रमित हो जाना, आँखों में भारीपन एवं दर्द का होना, परे मिश्रित औषधियों के सेवन के कारण  आँखों का प्रभावित हो जाना आदि लक्षणों में इस औषधि की ३० शक्ति लाभकारी है। 
सल्फर ( Sulphur) - पलकों और कनीनिका के बीच घर्षण महसूस होना, रोगी को आँखों के अंदर बालू के कण चुभने जैसा महसूस होना, आंखों का सूज जाना, गर्मी के मौसम में अत्यधिक बेचैनी, अग्नि के सम्पर्क में आने पर दर्द और जलन महसूस होना अदि लक्षणों में सल्फर ३० शक्ति की औषधि लाभप्रद है। 
एपिस मेल ( Apis Mellifica ) - निरंतर जलन और खुजली के कारण आँखों की पलकों में सूजन, आँखों में डंक मरने जैसा दर्द, आँखों के कोने से पीब युक्त श्लेष्मा का निकलना जैसे लक्षणों में एपिस मेल की ३० शक्ति उपयोगी है। आंख की सूजन में एपिस का विशेष लक्षण यह है कि आंख के नीचे की पलक सूज कर पानी के थैले जैसी हो जाती है।
Conjunctivitisइयूफ़्रेसिया आफी (Euphrasia Offi.) - आँख आने की किसी भी अवस्था में इयूफ़्रेसिआ २०० लाभकारी है।  कनीनिका पर फफोले एवं छले पड़ जाना, चिपचिपा स्राव का निकलना, आँखों पर अतिरिक्त दबाव महसूस होना, आंखौं से कड़वा और नाक से गर्म स्राव होते रहना, आँखे चपक जाना, धुंधला दिखाई देना, सूर्य की रौशनी में तकलीफ बढ़ जाने पर इस दवा की १० बून्द मूल अर्क एक गिलास साफ पानी में घोलकर आँखों को धोते रहना चाहिए। इसका आई ड्राप भी मिलता है।
एकोनाइट ( Aconite Nap) - ठंढी हवा के लगते ही पलकों में सूजन का बढ़ जाना, आँखों में प्रदाह के कारण शुष्क और लाल हो जाना, आँखों में गर्मी महसूस होना, रोगी का वात एवं गठिया से ग्रसित आदि लक्षणों में इस दवा की ३० शक्ति लाभकारी है। 
हिपर सल्फ (Hepar Sulph) - आँखों में नेत्र शोथ के कारण स्पर्श एवं ठंढी हवा के प्रति अत्यधिक सवेदनशील हो जाना, पलको का सूज कर लाल हो जाना, नेत्र से अधिक पीले  श्लेष्मा का स्राव होना आदि रहने पर २०० शक्ति की दवा लाभकारी है। 

नोट : ऊपर उल्लेखित मुख्य औषधियों के अतिरिक्त बहुत सारी औषधियां हैं जो लक्षणानुसार प्रयोग की जाती हैं। 


रविवार, 23 अप्रैल 2017

होमियोपैथिक फर्स्ट एड बॉक्स (Homeopathic Emergency Kit)

प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा की स्थिति में आप एक होम्योपैथी आपातकालीन किट सहायता से आप चिकित्सा कर सकते हैं। एक तो होम्योपैथिक उपचार सस्ते, प्रभावी होते हैं, और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है यह चिकित्सा विज्ञान शरीर को उत्तेजित करने के लिए प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करता है। अधिकांश होम्योपैथिक उपचार जड़ी-बूटियों और खनिजों से बने होते हैं, और वे 200 साल पहले की खोज के सिद्धांत पर आधारित होते हैं कि स्वस्थ व्यक्ति में लक्षण पैदा करने वाला पदार्थ बीमार व्यक्ति में उसी लक्षण का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। साधारण होमियोपैथी की जानकारी रखने वालों को भी ये किट हर घर में रखना चाहिए। 

Homeopathy is best known for its treatment of acute and chronic disease but it also has a lot to offer emergency medicine; the correct remedy acts with remarkable speed in life-threatening situations.
Homeopathic Emergency Kit



1.पेट्रोलियम 30- कार, बस आदि से यात्रा के दौरान उल्टी आए, जी मिचलाए या चक्कर आएं।

2.इपिकाक 30- सामान्य तौर पर उबकाई आए, उल्टी आए, जी मिचलाए या चक्कर आएं।

3.कार्बोवेज 30-जब रोगी ठंडा पड़ जाता है, नब्ज़ भी कठिनाई से मिलती है, शरीर पर ठंडे पसीने आने लगते हैं, चेहरे पर मृत्यु खेलने लगती है, अगर रोगी बच सकता है तब इस औषधि से रोगी के प्राण लौट आते हैं।

4.नक्स 200- गैस, अफारा, अपच, एसिडिटी, उल्टी, दस्त, कमजोरी, कब्ज।

5.पल्सेटिला 30- उदर विकार यदि आइस्क्रीम, केक, पेस्ट्री, घी या तली- भुनी चीजें खाने से हो।

6.जैलसीमियम 30- मौसम या स्थान परिवर्तन से उत्पन्न जुकाम, नजला, खांसी, बुखार।

7.आर्सेनिक एल्ब 30- सामान्य या पुराना नजला, जुकाम, छीकें, श्वास कष्ट, दर्द, बुखार।

8.अर्निका 200- गुम चोट, मोच, मानसिक थकान, भागदौड़ से उत्पन्न तनाव।

9.एकोनाइट 30- सर्दी में कॉमन कोल्ड से राहत हेतु, नींद लाने के लिए।

10.केलेंडुला- त्वचा के कटने-फटने से उत्पन्न घाव।(मूल अर्क) तथा मूल अर्क को बराबर पानी में मिलाकर घाव साफ करें और कैलेंडुला 30 कैलेंडुला 30 की 6-7 गोली तीन-तीन घंटे पर घाव सुखाने के लिए सेवन करें।

11.मेग फास 200- पेट दर्द, मासिक धर्म के दौरान पेडू में दर्द, चक्कर।

12.बेलाडोना 30- सिरदर्द, कान दर्द, लू लगना, आंख की लाली।

13.प्लेन्टेगो 30- दांत दर्द, कान दर्द, बवासीर।

14.यूप्रेशिया 6- कंजक्टेराइटिस (आंख लाल, सूजन, मवाद, चिपकना, दर्द इत्यादि।

15.सीपिया 200-ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर)

16.हेमेमलिस- रक्त प्रदर। माह में एक से अधिक बार मासिक स्राव या अधिक दिनों तक स्राव।

17.क्रोटन टिग 30- पतले दस्त, पिचकारी की भांति मल निकलना, हरा या फटा हुआ मल।

18.रेस्क्यू रेमेडी- चक्कर, मूच्छा, बेहोशी, घबराहट, बिजली का शाक।

19.ग्रेफाइटिस 30- बच्चा तुतलाकर बोलता हो, अंधेरे से डरता हो, चर्म विकार, एग्जिमा।

20.क्रोल्चिकम 30- मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, लाली, सूजन, पेट खराब, ठंड से कष्ट बढ़े।

21.सेनेगा- सांस फूलना, छाती में कफ का बोझ, सांस लेने में तकलीफ, प्रौढ़ावस्था में।

22.कैलिकेरिया कार्ब 30- बच्चों के दांत निकलते समय के रोग, बच्चा मुंह में उंगली डाले।




मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017

यौन दुर्बलता और समस्याओं का आयुर्वेदिक उपचार

यौन दुर्बलता और समस्याओं का आयुर्वेदिक उपचार
हमारे शरीर को स्वस्थ्य और बलवान बनाये रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जो काम करना चाहिए वह है पथ्य आहार विहार का पालन और अपथ्य आहार विहार का परित्याग। आपने भी इस बात पर गौर किया होगा की आहार विहार में लापरवाही और भूल चूक करते हैं तो या तो डॉक्टर घर पर आता है या हमें डॉक्टर के पास जाना पड़ता है। आज कल के अधिकांश नवयुवक यौन दौर्वल्य, यौन विकार और यौन रोगों से परेशान हैं। इस समस्या पर हमने पहले भी दो आलेख लिखा था जिसमें इन समस्याओं का होमियोपैथिक इलाज पर प्रकाश डाला था। आप इन आलेखों को यहां पढ़ सकते हैं।
०१. Homeopathic treatment of impotence

आज हम  यौन समस्यायों के आयुर्वेदिक और घरेलू उपचार के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। सर्वप्रथम हमें काम ऊर्जा की महत्ता और उपयोगिता को ठीक से न सिर्फ समझना  होगा बल्कि इसकी कद्र भी करनी होगी। शरीर में अधिक  आयु तक, काम ऊर्जा बानी रहे यह स्त्री-पुरुष दोनों के लिए आवश्यक है। ऐसा तभी सम्भव है जब काम-ऊर्जा की फिजूलखर्ची न  की जाए और इसे बनाये रखने के लिए का क्षतिपूर्ति के लिए वाजीकारक योगों एवं पदार्थो का सेवन किया जाय तथा बलपुष्टिदायक आहार लिया जाय।आयुर्वेद एक बहुत ही सरल चिकित्सा उपाय है। आयुर्वेद के द्वारा यौन रोग, यौन दुर्बलता, आंशिक व नपुंसकता का सही रूप से इलाज किया जा सकता है। भागदौड़ और तनावपूर्ण जिंदगी में लोग अपने भोजन पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाते, जिसके कारण कई बार बीमारियों का भी शिकार हो जाते हैं। ऐसे में लोगों की सेक्स क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं बेहद साधारण घरेलू नुस्खे और  बलपुष्टिदायक योगों के बारे में, जिनसे आप इस समस्या से बहुत जल्द छुटकारा पा सकते हैं।
यौन दुर्बलता और समस्याओं का आयुर्वेदिक उपचार
घरेलू उपचार (Home remedies)

०१. कौंच के शुद्ध बीज २५० ग्राम, २५० गेहूं और २५० ग्राम छिलका रहित उड़द की दाल को दरदरा पीस लें और इसमें १०० ग्राम सफेद मूसली, ५० ग्राम गोखरू, २५ ग्राम गिलोय सत्व, १०० ग्राम ताल मखाना, केशर, जावित्री, जायफल, काली मिर्च, तेजपात, छोटी इलाइची, विदारीकंद, खरैटी  के बीज,बरियारी के बीज, सलाम मिश्री शतावर, असगन्ध, सोंठ, पीपल, बालछड़, अकरकरा, कमलगट्ठा की गिरी के २५-२५ ग्राम बारीक़ पिसा चूर्ण मिला लें। इन मिश्रण  को गाय  के शुद्ध २५० ग्राम घी में भूनते हुए आधा किलो बुरा मिलाकर लड्डू बना लें।  इसे पुरे शीत-काल में खली पेट दूध  के साथ सेवन करे। इसके प्रयोग से यौन दौर्वल्य, नपुंसकता और इन्द्रिय शिथिलता शर्तिया दूर होगी। अपनी पाचन शक्ति के अनुसार ही सेवन करें और पेट को हमेशा साफ रखें। 

०२. सफेद प्याज का रस ४ चम्मच, अदरख का रस ३ चम्मच, और लहसुन का रस ३ चम्मच मिला कर  २ चम्मच शुद्ध शहद मिला लें -इस मिश्रण को सुबह खाली पेट पी लें। इसके आधा घंटा बाद तक कुछ भी खाना पीना नही है। यह नुस्खा रोज ताजा ही तैयार करना चाहिए। कम से कम इसे २१ दिनों तक सेवन करें।  इसको लगातार 2 महीने तक सेवन करने से स्नायविक दुर्बलता, शिथिलता, लिंग का ढीलापन, कमजोरी आदि दूर हो जाते हैं।संजीवनी बूटी की तरह लाभप्रद है। 

०३. दो चम्मच छिलका रहित उड़द की दाल रत को भिंगो दें, सुबह सील पर पीसकर शहद मिला कर  चाट लें। ऊपर से गुनगुना दूध पी कर आधे घंटा तक कुछ बजी न खाये पिए। 


04. ५० छोटी पीपल को लगभग ५0 ग्राम गाय के घी में भूनकर बिल्कुल पाउडर बना लें। फिर उसमें शहद और शक्कर मिलाकर दूध निकालने के बर्तन में डालकर उसी के अंदर गाय का दूध दूह लें। इस दूध को अपनी रुचि के अनुसार सेवन करें। इसको 1-1 चम्मच की मात्रा में गाय के ताजा निकले हुए दूध के साथ सेवन करने से बल और वीर्य की वृद्धि होती है।


05. सुबह सुबह बरगद के पतो से निकला ४ बून्द ४ दूध बतासे में डाल  कर ३०  दिनों तक सेवत करें। यह दूध मुफ्त में मिलता है पर महंगे नुस्खों की बराबरी करता है।  वीर्य सम्बन्धी सभी दोषो को दूर करता है। 



06. बरगद के कच्चे फल छाया में सुखाकर पीस लें और बराबर वजन में पिसी मिश्री मिला कर १०-१० ग्राम दूध के साथ ४० दिनों तक सेवन करने से बलपुष्टि और स्रम्भणशक्ति बढ़ती है। 



07. बबूल की कच्ची पत्तियां, कच्ची फलियां और गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें और इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी डिब्बे आदि में रख लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह योग शीघ्रपतन और स्वप्नदोष जैसै रोगों में बहुत लाभकारी रहता है।


08. एक गिलास  दूध  में १० ग्राम असगन्ध चूर्ण डालकर इतना उबालें की दूध एक चौथाई कम हो जाये, इसमें एक छोटा चम्मच पिसी मिश्री और आधा चम्मच शुद्ध घी  डाल कर सोते समय पियें।  इस चिकित्सा के साथ २-२ चम्मच लोहासव और द्राक्षासव और २ गोलों दिव्य रसायन की गोली का सेवन करें। 



09. घी के साथ उड़द की दाल को भूनकर और इसके अंदर दूध को मिलाकर तथा अच्छी तरह से पकाकर इसकी खीर तैयार कर लें। इसके बाद इसमें चीनी या खांड मिलाकर इसका इस्तेमाल करने से वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है तथा संभोग करने की शक्ति भी बढ़ जाती है।

10. 100 ग्राम आंवले के चूर्ण को लेकर आंवले के रस में 7 बार भिगों लें इसके बाद इसे छाया में सूखने के लिए रख दें। इसके सूख जाने के बाद इसको इमामदस्ते से कूट-पीसकर रख लें। रोजाना इस चूर्ण को एक चम्मच लेकर शहद के साथ मिलाकर चाट लें तथा इसके ऊपर से एक गिलास गुनगुना दूध पी लें। इसके सेवन करने खोई हुई शक्ति की प्राप्ति होगी।


11. 100 ग्राम इमली के बीजों को लेकर उन बीजों को पानी में भिगोकर 4-5 दिनों के लिए रख दें तथा पाचवें दिन उन बीजों का छिलका उतारकर उनका वजन करके देखें। उनका वजन करने के बाद उनके वजन से दुगुना पुराने गुड़ को लेकर उन बीजों में मिलाकर रख दें। इसके बाद इन्हें बारीक पीसकर अच्छी तरह से घोट लें। तत्पश्चात इस मिश्रण की चने के बराबर बारीक-बारीक गोलियां बना लें। रात्रि में सहवास 1 से 2 घंटे पहले दो गोलियों को खा लें। इसका सेवन करने से सेक्स शक्ति में अजीब की शक्ति आ जाती है।



12. सेमल की जड़ : 5 मिलीलीटर से 10 मिलीलीटर के आसपास पुराने सेमल की जड़ का रस निकालकर व इसका काढ़ा बना लें तथा इसके अंदर चीनी मिला लें। इस मिश्रण को 6-7 दिनों तक पीने से वीर्य की बहुत ही अधिक बढ़ोत्तरी होती है।



13. विदारीकंद : 6 ग्राम विदारीकन्द के चूर्ण में चीनी व घी मिला लें। इस चूर्ण को खाने के बाद इसके ऊपर से दूध पीने से वृद्ध पुरुष की भी संभोग करने की क्षमता वापस लौट आती है। 

14. मूसली के लगभग 10 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर अच्छी तरह से उबालकर किसी मिट्टी के बर्तन में रख दें। इस दूध में रोजाना सुबह और शाम पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और संभोग क्रिया की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना आदि रोगों में बहुत लाभ मिलता है।


15. १००-१०० ग्राम शतावरी, गोखरू, तालमखाना, कौंच के बीज, अतिबला और नागबला को एकसाथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तंभन शक्ति तेज होती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतला होना, यौन-दुर्बलता और शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत लाभकारी रहता है। मिर्च मसालेदार भोजन से परहेज करें। 



१४. 25 ग्राम पिसी-छनी हुई मुलहठी, 25 ग्राम पिसी और छनी असगंध, और 12 ग्राम पिसा और छना हुआ बिधारा को एकसाथ मिलाकर शीशी में भर लें। सर्दी के मौसम में इसमें से 3 ग्राम चूर्ण को अच्छी तरह से घुटे हुए लगभग 0.12 ग्राम मकरध्वज के साथ मिला लें। इसके बाद इसे मिश्री मिले दूध के साथ रोजाना सुबह और शाम 3-4 महीनों तक सेवन करने से संभोग शक्ति तेज होती है।

15. लगभग 10-10 ग्राम जायफल, काला अनार, रुमी मस्तंगी, खस की जड़, बालछड़, तालमखाना,दालचीनी, बबूल और शहद, 1 ग्राम कस्तूरी, 9 ग्राम सालममिश्री और 125 ग्राम मिश्री को एक साथ मिलाकर पीसकर छान लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह और शाम 3-4 महीने तक सेवन करने से यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। 


16. एक सेब में जितनी हो सके उतनी लौंग लगा दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग लगाकर दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग बोतल में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।

17. शतावरी के चूर्ण 20 ग्राम को 150 मिलीलीटर गाय के दूध के साथ मिलाकर 600 मिलीलीटर पानी के अंदर उबाल लें। उसके बाद केवल दूध बाकी रह जाने पर इसे आंच से नीचे उतारकर इसके अंदर चीनी या खांड मिलाकर इस दूध को पीने से खोई हुए शक्ति पुनः प्राप्त हो जाती है। 

18. 500 ग्राम विधारा और 500 ग्राम नागौरी असगंध- इन दोनों को ले लें। फिर इसे अच्छी तरह से कूट-पीसकर तथा इसे छानकर रख लें। सुबह के समय रोजाना इस चूर्ण को 2 चम्मच खा लें। उसके बाद ऊपर से मिश्री मिला हुआ गर्म-गर्म दूध को पी लें। यह बहुत ही कारगर मिश्रण है। 


१९. 6 ग्राम गोखरू का चूर्ण और काले तिल 10 ग्राम को बराबर मात्रा में लेकर इसे 250 मिलीलीटर बकरी के दूध में उबालकर तथा उसे ठंडा करके शहद को मिलाकर खाना चाहिए। इसका सेवन करने से हस्तमैथुन से यौन क्रिया में आई कमजोरी भी समाप्त हो जाती है।



२०. गोंद के लड्डू तथा तिल के लड्डू को खाने से संभोग करने में आई कमजोरी दूर हो जाती है। · रात के समय में 4-5 पीस बादाम को भिगोकर, 2 से 4 पीस अंजीर, नारियल की गिरी, छुहारे, तालमखाना. चिलगोजे, पिस्ता तथा 8-10 पीस मुनक्का, इसमें से किसी भी एक चीज का प्रयोग अपनी शक्ति के अनुसार करने से सेक्स क्षमता में आई कमजोरी दूर हो जाती है।




हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। आपका चिकित्सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नहीं है।परिक्षित चिकित्सक से  चिकित्सा कराने से अवश्य ही कामयाबी मिलती है। 



धन्यवाद,

शनिवार, 11 जून 2016

उचित आहार विहार का महत्व (Importance of proper dieting)

चिकित्सक हमें स्वास्थ्य लाभ देता है और वकील हमें न्याय दिलाने में सहायक होता है लेकिन हमें इन दोनों की आवश्यकता तभी पड़ती है जब हम उचित आहार विहार और आचार विचार का पालन नहीं करते। यदि हम उचित आहार विहार का नियमित पालन करें तो बीमार ही क्यों पड़ें? अगर बीमार न पड़ें तो  दवाखाने जाने या डॉक्टर बुलाने की .नौबत ही क्यों हो। उचित आहार विहार न करने, नियमित रूप से उचित दिनचर्या का पालन न करने, आलसी बने रहने, पर्याप्त नींद सोने, देर रात तक जागने, और सुबह देर तक सोये रहने, पाचन शक्ति ठीक न रहने तथा कब्ज रहने से शरीर निर्बल और दुबला पतला हो जाता है और कमजोरी बढ़ती जाती है। 
Importance of proper dieting

आचार विचार ठीक रखें तो ना तो हमें कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेंगे और ना तो किसी वकील की सेवाएं लेने की जरूरत पड़े। अब एक सोचने वाली विशेष बात यह है की यदि वकील पैरवी करने में भूल-चूक कर जाये तो मुलजिम छ: फुट हवा में लटक सकता है और चिकित्सा में कोई घातक भूल हो जाये तो रोगी छ: फुट जमीन के अंदर जा सकता है।
      एक कहावत है -गुजर गई गुजरान, क्या झोपडी और क्या मैदान? अतः जो बीत चुका सो बीत चुका, उसे अब बदलने से रहे, हाँ जो आने वाला समय है उसे सजाया संवारा जा सकता है इसलिये "बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध लेय के अनुसार हमें पिछले समय में की गयी भूलों, गलतियों और हरकतों से सबक लेकर आगे के जीवन को सुधारना चाहिये।  
जिस तरह से हंस रहा हूँ पी-पी के अश्के  गर्म, 
यूँ  दूसरा  हंसे  तो  .....  कलेजा  निकल  पड़े। 

रविवार, 13 मार्च 2016

Homeopathic treatment of impotence (नपुंसकता का होमियोपैथिक इलाज)

जैसा की आपने पिछले पोस्ट में स्वप्नदोष (Nocturnal emission) के होमियोपैथिक उपचार के बारे में पढ़ा होगा।
Homeopathic treatment of impotence
यौन दुर्बलता (sexual weakness) में नपुंसकतता (impotence) भी एक बड़ी समस्या है।स्त्री-पुरुष की मैथुन क्रिया में पुरुष पक्ष जब किसी कारणवश सम्भोग क्रिया को पूर्ण नही कर पता या वह किसी असमर्थतावश स्त्री से सम्भोग नही कर पाता तो ऐसी स्थिति  नपुंसकता कहलाती है। 
By nature, men and women complement each other and colleagues have created and are incomplete without each other. When both are together and both are enjoying their lives when their real-life is called successful. The sex life of men and women contribute greatly to success. If the husband and wife's marriage is completely satisfied both mentally and physically so they can stay healthy and depressed. Otherwise, their disease, disease, suffering, discord arises wall slowly shake the foundation of the relationship of husband and wife is a sweet and holy, and finally many terrible outcomes.
नपुंसकता इसको स्तंभन दोष भी कहा जाता है, दुनिया भर में पुरुषों के लिए और जीवन के सभी चरणों में आम है।होम्योपैथिक उपचार इरेक्टाइल डिसफंक्शन से संबंधित समस्याओं की एक विस्तृत रेंज है, जो या तो शारीरिक या मनोवैज्ञानिक समस्याओं या दोनों की वजह से हो सकता है के लिए उत्कृष्ट परिणाम प्रदान करते हैं। यौन रोग से ग्रसित होना कोई  शर्म की बात नहीं है, यदि हम सर्दी बुखार आदि होने पर डॉक्टर से सलाह लेने में संकोच नही करते फिर जनेन्द्रियों से संबंधित किसी भी विकार से ग्रसित होने पर संकोच कैसा ? 
Erectile dysfunction, also called impotence, is common to men worldwide and at all stages of life.
Homeopathic remedies provide excellent results for a wide range of problems related to erectile dysfunction, which may be caused by either physical or psychological problems or both.
                  These are some among the many homeopathic remedies which cater to relieve of impotence specifically.
Homeopathic treatment of impotence
Impotency Treatment
Top Homeopathic Remedies For Impotency
पुरुषों में नपुंसकता की स्थिति आने पर निम्नलिखित होमियोपैथिक अौषधियों का लक्षणानुसार सेवन करना चाहिए.... 

Top 10 Homeopathic medicine for impotence

रविवार, 13 सितंबर 2015

A handbook of materia medica and homoeopathic therapeutics (E-Book)


मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

"स्वाइन फ्लू: बचाव और इलाज"


स्वाइन फ्लू एक बार फिर देश में पांव पसार रहा है। फ्लू से डरने के बजाय जरूरत इसके लक्षणों के बारे में जानने और सावधानी बरतने की है। आइए जानें स्वाइन फ्लू से सेफ्टी के तमाम पहलुओं के बारे में :

क्या है स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है। 2009 में जो स्वाइन फ्लू हुआ था, उसके मुकाबले इस बार का स्वाइन फ्लू कम पावरफुल है, हालांकि उसके वायरस ने इस बार स्ट्रेन बदल लिया है यानी पिछली बार के वायरस से इस बार का वायरस अलग है।
कैसे फैलता है
जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन, दरवाजे, फोन, कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं, अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।

शुरुआती लक्षण
- नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना।
- मांसपेशियां में दर्द या अकड़न महसूस करना।
- सिर में भयानक दर्द।
- कफ और कोल्ड, लगातार खांसी आना।
- उनींदे रहना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
- बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार का लगातार बढ़ना।
- गले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ते जाना।

नॉर्मल फ्लू से कैसे अलग
सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के वायरस में एक फर्क होता है। स्वाइन फ्लू के वायरस में चिड़ियों, सूअरों और इंसानों में पाया जाने वाला जेनेटिक मटीरियल भी होता है। सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे ही होते हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू में यह देखा जाता है कि जुकाम बहुत तेज होता है। नाक ज्यादा बहती है। पीसीआर टेस्ट के माध्यम से ही यह पता चलता है कि किसी को स्वाइन फ्लू है। स्वाइन फ्लू होने के पहले 48 घंटों के भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। पांच दिन का इलाज होता है, जिसमें मरीज को टेमीफ्लू दी जाती है।

कब तक रहता है वायरस
एच1एन1 वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रहते हैं। इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेंट, एल्कॉहॉल, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण इन्फेक्शन के बाद 1 से 7 दिन में डिवेलप हो सकते हैं। लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।

चिंता की बात
इस बीमारी से लड़ने के लिए सबसे जरूरी है दिमाग से डर को निकालना। ज्यादातर मामलों में वायरस के लक्षण कमजोर ही दिखते हैं। जिन लोगों को स्वाइन फ्लू हो भी जाता है, वे इलाज के जरिए सात दिन में ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों को तो अस्पताल में एडमिट भी नहीं होना पड़ता और घर पर ही सामान्य बुखार की दवा और आराम से ठीक हो जाते हैं। कई बार तो यह ठीक भी हो जाता है और मरीज को पता भी नहीं चलता कि उसे स्वाइन फ्लू था। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि जिन लोगों का स्वाइन फ्लू टेस्ट पॉजिटिव आता है, उनमें से इलाज के दौरान मरने वालों की संफ्या केवल 0.4 फीसदी ही है। यानी एक हजार लोगों में चार लोग। इनमें भी ज्यादातर केस ऐसे होते हैं, जिनमें पेशंट पहले से ही हार्ट या किसी दूसरी बीमारी की गिरफ्त में होते हैं या फिर उन्हें बहुत देर से इलाज के लिए लाया गया होता है।
यह रहें सावधान

5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं। जिन लोगों को निम्न में से कोई बीमारी है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए :
- फेफड़ों, किडनी या दिल की बीमारी
- मस्तिष्क संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी मसलन, पर्किंसन
- कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
- डायबीटीजं
- ऐसे लोग जिन्हें पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो। ऐसे लोगों को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं का प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) शरीर में होने वाले हॉरमोन संबंधी बदलावों के कारण कमजोर होता है। खासतौर पर गर्भावस्था के तीसरे चरण यानी 27वें से 40वें सप्ताह के बीच उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है।

अकसर पूछे जाने वाले सवाल
- अगर किसी को स्वाइन फ्लू है और मैं उसके संपर्क में आया हूं, तो क्या करूं?
सामान्य जिंदगी जीते रहें, जब तक फ्लू के लक्षण नजर नहीं आने लगते। अगर मरीज के संपर्क में आने के 7 दिनों के अंदर आपमें लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से सलाह करें।
- अगर साथ में रहने वाले किसी शफ्स को स्वाइन फ्लू है, तो क्या मुझे ऑफिस जाना चाहिए?
हां, आप ऑफिस जा सकते हैं, मगर आपमें फ्लू का कोई लक्षण दिखता है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं और मास्क का इस्तेमाल करें।
- स्वाइन फ्लू होने के कितने दिनों बाद मैं ऑफिस या स्कूल जा सकता हूं?
अस्पताल वयस्कों को स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर सामान्यत: 5 दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखते हैं। बच्चों के मामले में 7 से 10 दिनों तक इंतजार करने को कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति को 7 से 10 दिन तक रेस्ट करना चाहिए, ताकि ठीक से रिकवरी हो सके। जब तक फ्लू के सारे लक्षण खत्म न हो जाएं, वर्कप्लेस से दूर रहना ही बेहतर है।

- क्या किसी को दो बार स्वाइन फ्लू हो सकता है?

जब भी शरीर में किसी वायरस की वजह से कोई बीमारी होती है, शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र उस वायरस के खिलाफ एक प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है। जब तक स्वाइन फ्लू के वायरस में कोई ऐसा बदलाव नहीं आता, जो अभी तक नहीं देखा गया, किसी को दो बार स्वाइन फ्लू होने की आशंका नहीं रहती। लेकिन इस वक्त फैले वायरस का स्ट्रेन बदला हुआ है, जिसे हो सकता है शरीर का प्रतिरोधक तंत्र इसे न पहचानें। ऐसे में दोबारा बीमारी होने की आशंका हो सकती है।

दिल्ली में इलाज के लिए कहां जाएं
सरकारी अस्पताल
जीटीबी अस्पताल, दिलशाद गार्डन
एलएनजेपी अस्पताल, दिल्ली गेट
सफदरजंग अस्पताल, रिंग रोड
राम मनोहर लोहिया अस्पताल, बाबा खड़क सिंह मार्ग
दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, हरिनगर
संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल, मंगोलपुरी
लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल, खिचड़ीप़ुर
पं. मदन मोहन मालवीय अस्पताल, मालवीय नगर
बाबा साहब आंबेडकर हॉस्पिटल, रोहिणी
चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, गीता कॉलोनी
भगवान महावीर अस्पताल, रोहिणी
महर्षि वाल्मीक अस्पताल, पूठ खुर्द
बाबू जगजीवन राम मेमोरियल अस्पताल, जहांगीरपुरी
अरुणा आसफ अली अस्पताल, राजपुर रोड
एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन हॉस्पिटल, आईजीआई एयरपोर्ट

प्राइवेट हॉस्पिटल
मूलचंद हॉस्पिटल, लाजपतनगर
सर गंगाराम हॉस्पिटल, राजेंद्र नगर
अपोलो हॉस्पिटल, सरिता विहार
ऐक्शन बालाजी हॉस्पिटल, पश्चिम विहार
सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल, तीस हजारी

एनसीआर में स्वाइन फ्लू सेंटर
नोएडा: डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, नोएडा
गुड़गांव: सिविल हॉस्पिटल, ओल्ड गुड़गांव
फरीदाबाद: बादशाह खान (बीके) हॉस्पिटल, फरीदाबाद
गाजियाबाद: एमएमजे हॉस्पिटल, जसीपुरा मोड़, गाजियाबाद

स्वाइन फ्लू से बचाव और इसका इलाज

स्वाइन फ्लू न हो, इसके लिए क्या करें?

- साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरती जाए, तो इस बीमारी के फैलने के चांस न के बराबर हो जाते हैं।
- जब भी खांसी या छींक आए रूमाल या टिश्यू पेपर यूज करें।
- इस्तेमाल किए मास्क या टिश्यू पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंकें।
- थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ को साबुन और पानी से धोते रहें।
- लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से बचें।
- फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
- अगर फ्लू के लक्षण नजर आते हैं तो दूसरों से 1 मीटर की दूरी पर रहें।
- फ्लू के लक्षण दिखने पर घर पर रहें। ऑफिस, बाजार, स्कूल न जाएं।
- बिना धुले हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से परहेज करें।

आयुर्वेद

ऐसे करें बचाव

इनमें से एक समय में एक ही उपाय आजमाएं।
- 4-5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।
- गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं।
- गिलोय सत्व दो रत्ती यानी चौथाई ग्राम पौना गिलास पानी के साथ लें।
- 5-6 पत्ते तुलसी और काली मिर्च के 2-3 दाने पीसकर चाय में डालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।
- आधा चम्मच हल्दी पौना गिलास दूध में उबालकर पिएं। आधा चम्मच हल्दी गरम पानी या शहद में मिलाकर भी लिया जा सकता है।
- आधा चम्मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
-तुलसी पत्र एवं आज्ञाघास (जरांकुश) उबालकर पिएं।
-दालचीनी चूर्ण शहद के साथ अथवा दालचीनी की चाय लाभदायक।
-गिलोय, कालमेध, चिरायता, भुईं-आंवला, सरपुंखा, वासा इत्यादि जड़ी-बूटियां लाभदायक हैं।


स्वाइन फ्लू होने पर क्या करें
यदि स्वाइन फ्लू हो ही जाए तो वैद्य की राय से इनमें से कोई एक उपाय करें:
- त्रिभुवन कीर्ति रस या गोदंती रस या संजीवनी वटी या भूमि आंवला लें। यह सभी एंटी-वायरल हैं।
- साधारण बुखार होने पर अग्निकुमार रस की दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।
- बिल्वादि टैब्लेट दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।

होम्योपैथी

कैसे करें बचाव

फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर इन्फ्लुएंजाइनम-200 की चार-पांच बूंदें, आधी कटोरी पानी में डालकर सुबह-शाम पांच दिन तक लें। इस दवा को बच्चों समेत सभी लोग ले सकते हैं। मगर डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू ज्यादा बढ़ने पर यह दवा पर्याप्त कारगर नहीं रहती, इसलिए डॉक्टरों से सलाह कर लें। जिन लोगों को आमतौर पर जल्दी-जल्दी जुकाम खांसी ज्यादा होता है, अगर वे स्वाइन फ्लू से बचना चाहते हैं तो सल्फर 200 लें। इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और स्वाइन फ्लू नहीं होगा।

स्वाइन फ्लू होने पर क्या है इलाज
1: बीमारी के शुरुआती दौर के लिए
जब खांसी-जुकाम व हल्का बुखार महसूस हो रहा हो तब इनमें से कोई एक दवा डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं:
एकोनाइट (Aconite 30), बेलेडोना (Belladona 30), ब्रायोनिया (Bryonia 30), हर्परसल्फर (Hepursuphur 30), रसटॉक्स (Rhus Tox 30), चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार।
2: अगर फ्लू के मरीज को उलटियां आ रही हों और डायरिया भी हो तो नक्स वोमिका (Nux Vomica 30), पल्सेटिला (Pulsatilla 30), इपिकॉक (Ipecac-30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार ले सकते हैं।
3: जब मरीज को सांस की तकलीफ ज्यादा हो और फ्लू के दूसरे लक्षण भी बढ़ रहे हों तो इसे फ्लू की एडवांस्ड स्टेज कहते हैं। इसके लिए आर्सेनिक एल्बम (Arsenic Album 30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन-चार बार लें। यह दवा अस्पताल में भर्ती व ऐलोपैथिक दवा ले रहे मरीज को भी दे सकते हैं।

योग
शरीर के प्रतिरक्षा और श्वसन तंत्र को मजबूत रखने में योग मददगार साबित होता है। अगर यहां बताए गए आसन किए जाएं, तो फ्लू से पहले से ही बचाव करने में मदद मिलती है। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले अभ्यास करें:
- कपालभाति, ताड़ासन, महावीरासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, मंडूकासन, अनुलोम-विलोम और उज्जायी प्राणायाम तथा धीरे-धीरे भस्त्रिका प्राणायाम या दीर्घ श्वसन और ध्यान।
- व्याघ्रासन, यानासन व सुप्तवज्रासन। यह आसन लीवर को मजबूत करके शरीर में ताकत लाते हैं।


डाइट

- घर का ताजा बना खाना खाएं। पानी ज्यादा पिएं।
- ताजे फल, हरी सब्जियां खाएं।
- मौसमी, संतरा, आलूबुखारा, गोल्डन सेव, तरबूज और अनार अच्छे हैं।
- सभी तरह की दालें खाई जा सकती हैं।
- नींबू-पानी, सोडा व शर्बत, दूध, चाय, सभी फलों के जूस, मट्ठा व लस्सी भी ले सकते हैं।
- बासी खाना और काफी दिनों से फ्रिज में रखी चीजें न खाएं। बाहर के खाने से बचें।


मास्क की बात

न पहने मास्क

- मास्क पहनने की जरूरत सिर्फ उन्हें है, जिनमें फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हों।
- फ्लू के मरीजों या संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को ही मास्क पहनने की सलाह दी जाती है।
- भीड़ भरी जगहों मसलन, सिनेमा हॉल या बाजार जाने से पहले सावधानी के लिए मास्क पहन सकते हैं।
- मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर, नर्स और हॉस्पिटल में काम करने वाला दूसरा स्टाफ।
- एयरकंडीशंड ट्रेनों या बसों में सफर करने वाले लोगों को ऐहतियातन मास्क पहन लेना चाहिए।


कितनी देर करता है काम

- स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सामान्य मास्क कारगर नहीं होता, लेकिन थ्री लेयर सर्जिकल मास्क को चार घंटे तक और एन-95 मास्क को आठ घंटे तक लगाकर रख सकते हैं।
- ट्रिपल लेयर सजिर्कल मास्क लगाने से वायरस से 70 से 80 पर्सेंट तक बचाव रहता है और एन-95 से 95 पर्सेंट तक बचाव संभव है।
- वायरस से बचाव में मास्क तभी कारगर होगा जब उसे सही ढंग से पहना जाए। जब भी मास्क पहनें, तब ऐसे बांधें कि मुंह और नाक पूरी तरह से ढक जाएं क्योंकि वायरस साइड से भी अटैक कर सकते हैं।
- एक मास्क चार से छह घंटे से ज्यादा देर तक न इस्तेमाल करें, क्योंकि खुद की सांस से भी मास्क खराब हो जाता है।


कैसा पहनें

- सिर्फ ट्रिपल लेयर और एन 95 मास्क ही वायरस से बचाव में कारगर हैं।
- सिंगल लेयर मास्क की 20 परतें लगाकर भी बचाव नहीं हो सकता।
- मास्क न मिले तो मलमल के साफ कपड़े की चार तहें बनाकर उसे नाक और मुंह पर बांधें। सस्ता व सुलभ साधन है। इसे धोकर दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।


ध्यान रखें कि

- जब तक आपके आस-पास कोई मरीज या संदिग्ध मरीज नहीं है, तब तक मास्क न लगाएं।
- अगर मास्क को सही तरीके से नष्ट न किया जाए या उसका इस्तेमाल एक से ज्यादा बार किया जाए तो स्वाइन फ्लू फैलने का खतरा और ज्यादा होता है।
- खांसी या जुकाम होने पर मास्क जरूर पहनें।
- मास्क को बहुत ज्यादा टाइट पहनने से यह थूक के कारण गीला हो सकता है।
- अगर यात्रा के दौरान लोग मास्क पहनना चाहें तो यह सुनिश्चित कर लें कि मास्क एकदम सूखा हो। अपने मास्क को बैग में रखें और अधिकतम चार बार यूज करने के बाद इसे बदल दें।
कीमत
- थ्री लेयर सजिर्कल मास्क : 10 से 12 रुपये
- एन-95 : 100 से 150 रुपये

जनउपयोगी के लिए साभार:नवभारत टाइम्स

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