बुधवार, 3 जुलाई 2013

स्वास्थ्य समाचार



१. मोटे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है एक्सरे
अगर आप मोटे हैं तो आपको अपनी चर्बी घटाने के लिये एक बार फिर से सोचना चाहिये। एक नये अध्ययन से पता चला है कि मोटे लोगों का सीटी स्कैन होने पर उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

२.उच्च रक्तचाप की समस्या 
उच्च रक्तचाप की समस्या से परेशान हैं तो दिन में कम से कम तीन बार काली चाय पीयें. यह आपके उच्च रक्तचाप को नीचे लाने में मददगार है। जो लोग दिन में तीन बार बिना दूध की चाय पीते हैं वे अपने रक्तचाप को औसतन दो से तीन प्वाइंट तक नियंत्रित करने में सफल रहते हैं। हो सकता है इतना नियंत्रण काफी न लगे लेकिन यह उच्च रक्तचाप के होने अथवा दिल की बीमारी के जोखिम को रोकने के लिये अत्यधिक प्रभावी है।

३. सॉफ्ट फूड मतलब दांतों की बीमारी
अगर आप सॉफ्ट फू़ड के शौकीन है और किसी भी कीमत पर उसे छोड़ना नहीं चाहते तो यह ख़बर आपको चौंका देगी। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है दांतों में होने वाली बीमारियों की वजह सॉफ्ट फूड हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि सॉफ्ट फूड खाने वालों के जबड़े की वृद्धि प्रभावित होती है। इन लोगों का जबड़ा उनके दांत के मुकाबले छोटा रह जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि आधुनिक आहारों को लेते वक्त जोर से चबाने की जरूरत नहीं पड़ती है, जिससे जबड़े पर कम दबाव पड़ता है। ऐसे में जबड़े का विकास कम हो पाता है।

४. नशे की लत से सिकुड़ जाता है दिमाग
एक अध्ययन से पता चला कि प्रौढ़ावस्था के व्यसन आपके दिमाग को छोटा कर देते हैं. धूम्रपान और मद्यसेवन जैसे प्रौढ़ावस्था के व्यसनों के कारण दिल को ही नुकसान नहीं पहुंचता बल्कि इससे दिमाग का आकार भी सिकुड़ जाता है. 

५. किशोरों को बना देगा बहरा सिगरेट का धुआं
अब संभल जाए सिगरेट पीने वाले, सिगरेट का धुआं किशोरों में सुनने की शक्ति कम कर देता है. एक नए शोध से यह पता चला है.सिगरेट के धुएं से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत असर को लेकर आपको पहले से ही पता होगा, लेकिन अब एक नए अध्ययन के अनुसार सिगरेट के धुएं की चपेट में आए किशोरों में सुनने को खतरा अन्य लोगों के मुकाबले दोगुना होता है।

६. गूगल कर रहा है आपकी याददाश्त कमजोर
वैसे तो सर्च इंजन गूगल अपने अंदर दुनिया भर का ज्ञान समेटे हुए है लेकिन ज़रा सोचिए इस पर अपनी आत्मनिर्भरता बढ़ाना कहां तक सही है। अगर गूगल पर आप कोई जानकारी ढूंढने जा रहे हैं तो दोबारा सोचिए। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि इंटरनेट सर्च इंजन से लोगों की याददाश्त कमजोर होती है। कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि कंप्यूटर पर लोगों की बढ़ती निर्भरता से उनका दिमाग संकुचित हो रहा है।

७. सुंदर बच्चा चाहिए तो नारियल खाइए
अक्सर जिनेक घरों में बड़े-बूढ़े लोग होते हैं और उनके घर में कोई महिला मां बनने वाली होती है तो अक्सर सुना जाता है कि महिला को नारियल खिलाओं ताकि बच्चा या बच्ची का रंग गोरा हो। जानते हैं इसके पीछे कारण क्या हैं, नारियल के पानी में इतनी ताकत होती है जितनी की सोयाबीन में, इसके अलावा नारियल में बहुत ज्यादा पोटेशियम होता है जो कि बच्चे की त्वचा और बाल के लिए अच्छा होता है।

८. दिमाग को रखिए चुस्त, रहिए डिमेंशिया से मुक्त
कहते हैं कि इंसान का शरीर एक मशीन की तरह काम करता है। जिस तरह वक्त के साथ मशीन के पुर्ज़े कमजो़र होने लगते हैं ठीक उसी तरीके से उम्र के साथ धीरे धीरे इंसान की याद्दाशत भी कमजो़र होने लगती है। और इस बिमारी को मेडिकल की भाषा में डिमेंशिया नाम से जाना जाता है। शहरों में डिमेंशिया बहुत ही तेज़ी से ज़्यादातर उम्रदराज लोगों के बीच फ़ैल रहा है। 30 से 40 प्रतिशत ये बिमारी उन लोगों में देखने को मिल रही है जिनकी उम्र 70 साल से ज़्यादा है।

९. आपके मधुमेह के लिए आपकी मां जिम्मेदार
अगर आप को मधुमेह है तो इसके पीछे आपकी मां जिम्मेदार हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे यह बात कही है कुछ वैज्ञानिकों ने जिन्हें यह सबूत मिला है कि गर्भावस्था में माँ को पौष्टिक आहार न मिलने से बच्चे में बड़े होने पर मधुमेह का ख़तरा होता है। शोधकर्ताओं ने पहले चूहों पर इसका शोध किया और फिर यह दावा किया कि मां के असंतुलित आहार के कारण बच्चे में इन्सुलिन बनाने वाले एक जीन पर असर होता है।

१० . एक आयुर्वेदिक पौधा और डायबिटीज गायब 
अगर आपको डायबिटीज है और आप मीठा नहीं खा पाते हैं, तो सुनिए अब आप मीठा खा पाएंगे । जी हाँ चौकियेगा मत! ऐसा हम नहीं कह रहे है डायबिटीज की बीमारी से बचाव के लिए शोधकर्ताओं ने एक आयुर्वेदिक पौधा खोज निकाला है जो इस खतरनाक बीमारी से राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। इस पौधे का नाम स्टीविया है।शोधकर्ताओं के अनुसार डायबिटीज के मरीज मीठा खाने के तुरंत बाद आयुर्वेदिक पौधे स्टीविया की कुछ पत्तियों को चबा ले, जिससे मीठा खाना जहर नहीं बनेगा।

११. वॉवेल गाओ, खर्राटा दूर भगाओ
खर्राटे लेने की समस्या इन दिनों बहुत ही आम हो गई है। धीरे-धीरे यह और भी भयावह रूप लेता जा रहा है। इसका मुख्य कारण श्वास नली में चर्बी का बढ़ जाना है। यह हमारी नींद खराब करते हैं और कम नींद लेने का परिणाम होता है दिनभर की थकान, चिड़चिड़ापन और स्वास्थ्य सम्बन्धी कई और समस्याएं।(a,e,i,o,u) 

गुरुवार, 13 जून 2013

होमियोपैथी और कुछ मिथ


होमियोपैथी को लेकर कई तरह के मिथ और गलत अवधारणाएं हैं। कई लोगों को तो होमियोपैथी पर अटूट विश्वास है, जबकि कई अन्य इसे कौड़ी का भाव नहीं देते। इसकी वजह होमियोपैथी से जुड़ी लोगों की गलतफहमी है, जबकि यह दुनिया भर में इलाज की एक जानी-मानी पद्धति है। इस पद्धति को लेकर लोगों की आम गलतफहमियां क्या हैं, और क्या है हकीकत, जानते हैं. होमियोपैथी दुनिया भर में जानी-मानी इलाज पद्धति है, लेकिन इसकी पॉपुलरिटी आज भी एलोपैथी की तुलना में काफी कम है। इसके कारणों में से प्रमुख है इस पैथी को लेकर प्रचलित कुछ मान्यताएं।

देर से असर करने वाली पैथी नहीं है होमियोपैथी
होमियोपैथी को लेकर जो सबसे आम धारणा है, वह यह कि यह बड़ी सुस्त रफ्तार से असर करता है और मरीज को काफी देर से राहत मिलती है। इस मान्यता के उलट, सच यह है कि अगर मरीज के केस का गहराई से अध्ययन कर सही ट्रीटमेंट किया जाए, तो होमियोपैथी तुरंत असरकारी साबित होता है। जब कोई गंभीर बीमारी हो, तो इलाज लंबे समय तक जारी रखना पड़ सकता है। अगर बीमारी काफी पुरानी है और बुरी तरह मरीज को चपेट में ले चुकी है, तो इलाज कई साल भी चल सकता है, क्योंकि हैमियोपैथी में मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखते हुए सावधानी से ट्रीटमेंट किया जाता है। 

पैथॉलजी से ज्यादा जोर साइन और सिम्पटम पर

लोग ऐसा मानते हैं कि होमियोपैथी से इलाज करने वाले डॉक्टर पैथॉलजी में विश्वास नहीं करते। इसीलिए वे मरीज की कोई पैथॉलजिकल जांच वगैरह नहीं करवाते। सच बात यह है कि किसी भी फिजिशियन के लिए सबसे पहले जरूरी है बीमारी को जानना। उसके बाद ही वह बीमारी के सिम्पटम्स, पैथॉलजी, कोर्स, कॉम्प्लिकेशन आदि के बारे में सही जानकारी ले सकता है। होमियोपैथी के तहत इलाज के दौरान मरीज की समस्याओं को उसके संपूर्ण व्यक्तित्व (सायकॉलजिकल व फिजिकल) के संदर्भ में देखा जाता है, न कि सिर्फ समस्याग्रस्त अंगों तक सीमित रहकर। 

स्टेरॉयड्स के प्रयोग की धारणा गलत

आम तौर पर माना जाता है कि होमियोपैथिक फिजिशियंस मरीज का इलाज करने के लिए स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल करते हैं। अस्थमा, आर्थराइटिस आदि क्रॉनिक बीमारियों के इलाज को लेकर तो यह मान्यता लोगों में गहराई तक जड़ जमाई हुई है। लेकिन ज्यादातर मामलों में ऐसे मरीजों को पहले ही स्टेरॉयड्स दिए जा चुके होते हैं। होमियोपैथिक फिजिशियंस अपने पास ऐसे केस आने पर केस की डीटेल स्टडी करते हैं और मरीज के सिम्पटम्स व साइन समझने की कोशिश करते हैं। वे मरीज की हेरिडेटरी हिस्ट्री भी स्टडी करते हैं और यह भी समझने की कोशिश करते हैं कि मरीज को अपने आसपास की किन चीजों से परेशानी होती है। तमाम बातों को समझते हुए उसके अनुकूल दवा दी जाती है। ऐसे में स्टेरॉयड्स का अनावश्यक और नियमित इस्तेमाल होमियोपैथी के सिद्धांतों के खिलाफ है और कोई भी एक्सपर्ट डॉक्टर ऐसा नहीं करता। 

रविवार, 9 जून 2013

तनाव से जुड़े भ्रम और तथ्य

 myths about stress
आइये आज हम जीवन में तनाव के बारे में जानते हैं।कामकाज के बोझ और व्यस्त रुटीन की इस जीवनशैली में तनाव की समस्या हमारे बीच बेहद आम है। अक्सर हम तनाव के बारे में जो धारणाएं पाल लेते हैं वे खुद कई बार हमारे लिए तनाव की स्थिति बन जाती हैं, जबकि उनका कोई वास्तविक आधार होता ही नहीं। जानिए, तनाव से जुड़ें ऐसे ही 5 मिथकों के बारे में।

मिथ 1- तनाव हमेशा बुरा ही होता है।
फैक्ट - तनाव हमेशा बुरा ही होता है यानी अगर आपको किसी भी बात का तनाव नहीं है तो आप बेहद खुश व स्वस्थ रहेंगे। असलियत यह है कि थोड़ा तनाव हमें मेहनत करने की प्रेरणा देता है। कई शोधों में यह सा‌बित हो चुका है कि जीवन में अगर तनाव न हो तो नीरसता भी जल्द घर करती है।

मिथ 2- हम नशे में भूल जाते हैं तनाव।
फैक्ट - अगर आप अपने दिन भर की थकान और तनाव से कुछ पल राहत पाने के लिए शराब का सहारा लेते हैं तो यह आपकी गलती होगी। डॉक्टरों का मानना है कि शराब के सेवन से शरीर में कार्टिजोल नामक हार्मोन बनता है जो तनाव बढ़ाता है। ऐसे में तनाव की स्थिति में शराब का सेवन फायदेमंद नहीं बल्कि और भी घातक है।

मिथ 3- अगर लक्षण नहीं दिख रहे तो स्ट्रेस का प्रभाव कम है।
फैक्ट - ऐसा जरूरी नहीं है। तनाव के जिन लक्षणों - अनिद्रा, वजन बढ़ने की बात हम करते हैं वे हमें तुरंत नहीं पता चलते हैं। कई बार तो स्ट्रोक या हार्ट अटैक के बाद हमें तनाव के इन लक्षणों का पता चल पाता है। ऐसे में अपना रुटीन चेकअप कराते रहें जिससे शरीर में होने वाले बदलावों और उनके कारणों की आपको पूरी जानकारी हो।

मिथ 4- अल्सर की वजह है तनाव।
फैक्ट - अक्सर लोग ऐसा मानते हैं कि अधिक तनाव वाले व्यक्ति को अल्सर होने की आशंका सबसे अधिक होती है जो गलत है।
अल्सर तनाव से नहीं होता बल्कि एक ऐसे बैक्टीरिया से होता है जो पेट और आंतों में जलन पैदा करता है। हो सकता है स्ट्रेस से पेट में गड़बड़ी हो लेकिन इसे अल्सर की वजह नहीं माना जा सकता है।

मिथ 5- तनाव के लक्षण सबके  लिए समान हैं।
फैक्ट - जिस तरह से तनाव के कई कारण हो सकते हैं, उसी तरह अलग-अलग लोगों में तनाव के अलग-अलग लक्षण दिखते हैं। तनाव को लेकर आपके शरीर की जो प्रतिक्रिया होती है, उसी आधार पर उसके लक्षण अलग-अलग होते हैं। मसलन, किसी को तनाव के दौरान चिढ़चिढ़ापन अधिक होता या नींद नहीं आती है तो किसी को अधिक नींद आती है या पेट खराब हो सकता है।


(ब्लॉग जगत से बीते दिनों दूर रहने के कारण मुझे भी तनाव हो गया था,कामकाजी जगहों पर तनाव का असर दूरगामी होता है. इससे उस व्यक्ति के व्यक्तित्व और उसके कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ता है.आशा है यह आलेख आपके लिए लाभप्रद होगा)

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